आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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लांस नायक गोपाल सिंह भदोरिया, शौर्य चक्र, विशिष्ट सेवा मैडल का जन्म गुजरात के अहमदाबाद के गोकुलचंद चाली चमनपुरा गांव में हुआ था । वर्ष 2003 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें सिग्नल कोर में नियुक्त किया गया। वर्ष 2008 के 26 /11 आतंकवादी हमलों के दौरान वे एन एस जी कमांडो समूह का हिस्सा थे और उन्होंने एक घायल सूबेदार मेजर को होटल से बाहर निकाला और एम्बुलेंस तक पहुंचाया। इस बहादुरी के कार्य के लिए उन्हें "विशिष्ट सेवा मैडल" से सम्मानित किया गया। वर्ष 2017 में उन्हें आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर में तैनात 1 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) में नियुक्त किया गया। 12 फरवरी 2017 को खुफिया जानकारी के आधार पर श्रीनगर के दक्षिण में फ्रिसल के नागबल गांव के आसपास उनकी यूनिट ने एक ऑपरेशन शुरू किया जिसका वे हिस्सा थे । इसी दौरान दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई जिसमें लांस नायक गोपाल सिंह भदोरिया गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए । लांस नायक गोपाल सिंह भदोरिया को उनके उत्कृष्ट साहस, अदम्य भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Battle Casualty
कैप्टन नीलेश सोनी का जन्म 13 जुलाई 1962 को गुजरात के अहमदाबाद में हुआ था। 09 जून 1984 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें आर्टिलरी के 62 फील्ड रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 1986 के दौरान कैप्टन नीलेश सोनी की यूनिट सियाचिन ग्लेशियर में तैनात थी। 12 फरवरी 1987 को कैप्टन नीलेश और उनके सैनिकों द्वारा नियंत्रण क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना की संदिग्ध गतिविधियां देखी गयी और दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई। इसी दौरान भारी हिमस्खलन हुआ जिसमें कैप्टन नीलेश सोनी दब गए और बाद में शहीद हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







