कैप्टन उमंग भारद्वाज, शौर्य चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 24 मार्च 1977 को हरियाणा के गुड़गांव जिले के गरौली गांव में कर्नल कुंवर भारद्वाज और श्रीमती शिक्षा भारद्वाज के सैन्य परिवार में हुआ था। कैप्टन उमंग के सैन्य परिवार में उनके पिता के अलावा उनके बड़े भाई मेजर राकेश भारद्वाज भी शामिल थे, जो सेना में सेवा करने की पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
कैप्टन उमंग को हमेशा से ही सेना में रहने का शौक था और उनका सपना था कि वह अपने पिता की तरह सेना की वर्दी पहनें। उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए सेना में भर्ती हुए और प्रसिद्ध जाट रेजिमेंट की 7 जाट रेजिमेंट में अधिकारी के रूप में शामिल हुए। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक, कैप्टन उमंग ने इंग्लैंड के विगन और लेह से बिजनेस और मैनेजमेंट का कोर्स भी किया था।
2002 के दौरान कैप्टन उमंग की यूनिट को जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में उग्रवाद विरोधी अभियानों के लिए तैनात किया गया था। जब कैप्टन उमंग ने 18 नवंबर 2002 की आधी रात को एक छोटी छुट्टी के बाद अपनी ड्यूटी फिर से शुरू की, तो उनकी यूनिट को एक गुप्त सूचना मिली कि आतंकवादी उस रात नियंत्रण रेखा के पास राजौरी-पुंछ सेक्टर में घाटी में घुसने की तैयारी कर रहे थे। आतंकवादियों को तलाशी और नष्ट करने के अभियान में शामिल करने का निर्णय लिया गया। कैप्टन उमंग को एक टीम के साथ घुसपैठियों पर हमले का नेतृत्व करने का काम सौंपा गया था।
कैप्टन उमंग ने तुरंत कार्रवाई की और अपनी टीम के सदस्यों के साथ मिलकर हमले का नेतृत्व किया। खूनी मुठभेड़ में कैप्टन उमंग ने छह आतंकवादियों को मौके पर ही ढेर कर दिया। समूह के सातवें और अंतिम आतंकवादी ने लुका-छिपी खेलने की कोशिश की, लेकिन अंततः मुठभेड़ में उसे मार गिराया गया जो अगली सुबह तक चली। ऑपरेशन के दौरान कैप्टन उमंग को गोलियों की बौछार लगी, जिससे उनके सीने और जांघ में चोट लग गई और 19 नवम्बर 2002 को वे शहीद हो गए । कैप्टन उमंग को उनकी असाधारण बहादुरी, अदम्य साहस और उच्च कोटि के नेतृत्व के लिए "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।
कैप्टन उमंग भारद्वाज, शौर्य चक्र (मरणोपरांत) के परिवार में उनके पिता, सेना के सेवानिवृत्त कर्नल कुंवर भारद्वाज, माता श्रीमती शिक्षा भारद्वाज और भाई राकेश भारद्वाज हैं।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से कैप्टन उमंग भारद्वाज, शौर्य चक्र (मरणोपरांत) को उनकी जयंती पर बारंबार नमन !




