18 मार्च 1919 को ब्रिटिश सरकार ने रौलेट एक्ट पारित किया, जिसके अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने और बिना किसी मुकदमे के 2 साल तक जेल में रखने की षक्ति सरकार को दी गयी। पंजाब में ये एक्ट 21 मार्च से प्रभावी हो गया। 10 अप्रैल 1919 को, दो स्वतंत्रता सेनानियों, डॉ० सत्यपाल और डॉ० सैफुद्दीन किचलू, जो रौलेट एक्ट के विरूद्ध षांतिपूर्वक विरोध कर रहे थे, को गिरफ्तार किया गया। विरोध प्रदर्शन को देखते हुए, अंग्रेजों ने कर्फ्यू लगा दिया लेकिन कर्फ्यू के बारे में कोई प्रभावी सूचना प्रसारित नहीं की गई एवं बहुत कम लोग जानते थे कि कर्फ्यू लगाया गया था।
अमृतसर में गोल्डन टेंपल के निकट लगभग 7 एकड़ में फैला जलियांवाला बाग स्थित है। यहां नगर एवं आसपास के लोग विभिन्न पर्वों को मनाने, विश्राम करने, समय बिताने, खेल कूद एवं मनोरंजन के लिए या सभा करने एकत्रित होते थे। 13 अप्रैल को बैसाखी के मौके पर लोग जलियांवाला बाग में एकत्रित हुए। उनमें से कुछ लोग षांतिपूर्वक प्रदर्शन भी कर रहे थे। लगभग 10,000 महिलाएं, बच्चे, बूढ़े लोग वहां एकत्रित थे। चेतावनी के बिना अंग्रेजों ने जलियांवाला बाग के एकमात्र निकास को सील कर दिया और कर्नल (ब्रिगेडियर जनरल) रेजिनाल्ड डायर ने निहत्थे लोगो पर गोली चलाने का आदेश दिया। यह निश्चित नहीं है कि रक्तपात में कितने लोग मारे गए, लेकिन, एक रिपोर्ट के अनुसार 1650 राउंड गोलिया चलीं, जिसमें लगभग 500 लोग मारे गऐ, और लगभग 1500 से अधिक लोग घायल हो गए। फायरिंग के बाद, अधमरे लोगो को इसी हालत में छोड़कर अंग्रेजी सैनिक वहाँ से चले गये। चलाई गई गोलियों की संख्या एवं मारे गये घायल लोगों की संख्या को देखने से ही पता चल जाता है कि गोलियां जान बूझकर लोगों की हत्या के उददेश्य से ही चलायी गईं थीं।
13 साल के भगत सिंह के मन में विद्रोह की ज्वाला धधक उठी। उस खून से रंगी जलियांवाला बाग की मिट्टी को बोतल में भर घर ले आये। वीर उधम सिंह ने बदले का प्रण लिया। लंदन में जाकर होटलों में बर्तन धोये और एक दिन माइकल फ्रांसिस ओ ड्वायर का काम तमाम कर अपना प्रण पूरा किया। इस सन्दर्भ में यह उल्लेखनीय है कि कर्नल (ब्रिगेडियर जनरल) रेजिनाल्ड एडवर्ड हैरी डायर जलियांवाला बाग नरसंहार के लिए उत्तरदायी था। इसकी मृत्यु वर्श 1927 में हो गई। माइकल फ्रांसिस ओ ड्वायर 1912 से 1919 तक भारत में पंजाब का लेफ्टिनेट गर्वनर था जिसने कर्नल (ब्रिगेडियर जनरल) रेजिनाल्ड डायर की कार्यवाही का समर्थन किया था और इसे सही ठहराया था।
सुभारती परिवार जलियांवाला बाग में हुए शहीदों और अमर शहीद उधम सिंह को बारम्बार नमन करता है। जय हिन्द ।




