गलवान संघर्ष

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गलवान संघर्ष

गलवान घाटी भारत तिब्बत की सीमा पर 12 से 13000 की ऊंचाई पर स्थित एक घाटी है। यह सामरिक रूप से अत्यधिक महत्व रखती है क्योंकि अक्साई चीन पहुंचने के लिए यह निकट का रास्ता है और चीन के लिए भी पूर्वी लद्दाख पहुंचने के लिए यह एक निकट का रास्ता है। यह क्षेत्र भारत के अधिकार में रहा है परंतु चीन इस पर अपना दावा करता है। ऊंचाई पर होने के कारण अगर यह चीन के पास हो तो चीन आसानी से भारतीय क्षेत्र पर नजर रख सकता है और उसकी सप्लाई लाइन को जब चाहे काट सकता है। विवादित क्षेत्र के लिए दोनों पक्षों में यह सहमति हुई कि दोनों पक्ष वहां केवल पेट्रोलिंग कर सकते हैं पर अपनी कोई चौकी वहां नहीं बनाएंगे। भारत ने सुरक्षा संबंधी अपने ढांचे को मजबूत बनाने के लिए अपने क्षेत्र में जो कि गलवान घाटी के निकट से होकर गुजरता है पर 255 किलोमीटर लंबी डार्बूक-श्योक-डीबीओ रोड बनाई। भारत के इस कदम से चीन अत्यधिक बेचैन था जबकि चीन ने भी अपने क्षेत्र में आधारभूत ढाँचे अत्यधिक विकसित कर रखे हैं।

गलवान घाटी क्षेत्र में पेट्रोलिंग पइंट नंबर 14 एक पहाड़ी के ऊपर स्थित है। 15 जून को जब भारत के सैनिक दल पेट्रोलिंग के लिए गए तो नियम अनुसार वे निहत्थे थे। उन्होंने देखा कि पेट्रोलिंग पइंट 14 पर चीन की सेना द्वारा एक अस्थाई पोस्ट बना ली गई है। भारतीय सैनिकों के द्वारा चीनी सैनिकों की इस क्रत्य का जब विरोध किया गया तो चीनी सैनिकों ने भारत के पेट्रोलिंग दल को बंधक बना लिया। जैसे ही 16 बिहार रेजीमेंट के प्रभारी कर्नल संतोष बाबू को इस घटना की जानकारी मिली वे तुरंत चीन के अधिकारियों से बात करने के लिए वहां पहुंचे। जब उन्होंने अपने समकक्ष चीन के अधिकारी से बात करना चाहा तो उन्होंने कहा कि अपने दल बल के साथ ना आएँ एवं अकेले आकर बात करें। कर्नल संतोष बाबू अपने साथ दो सैनिकों को लेकर पेट्रोलिंग पइंट 14 पर चीनी अधिकारियों से बात करने पहुंचे। इस अवसर पर चीन के सैनिकों द्वारा धोखे से कर्नल संतोष बाबू एवं अन्य दोनों सैनिकों पर हमला कर दिया गया एवं वे शहीद हो गए। इस सूचना को पाकर बिहार रेजीमेंट के अन्य सैनिकों एवं अधिकारियों का खून खौल गया। 15 -16 जून की रात्रि में बिहार रेजीमेंट के सैनिकों एवं उनके साथ उनकी घातक प्लाटून के कमांडो, पंजाब रेजीमेंट के सैनिकों एवं पंजाब रेजीमेंट की घातक प्लाटून के कमांडो द्वारा पेट्रोलिंग पइंट 14 पर स्थित चीन की अस्थाई चौकी पर हमला बोल दिया गया। चीन की ओर से पहले से ही पूरी तैयारी थी, उनके पास विभिन्न प्रकार के हथियार थे। भारत के फौजियों ने लाठी, डंडो एवं राईफल की बटों से चीन के सैनिकों पर आक्रमण किया और उनके द्वारा कांटेदार तारो से बनाए गए हथियारों को उनसे छीन कर उन पर प्रहार किया। क्योंकि चीन के सैनिक पहले से ही पूरी तैयारी से थे उन्होंने अपने शरीर पर रक्षा जैकेट पहने हुए थे जबकि भारतीय सैनिक बिना किसी सुरक्षा जैकेट के लड़ाई लड़ रहे थे। घातक प्लाटून के कमांडों ने चीनी सैनिकों की गर्दन पर वार कर उन्हें मौत के घाट सुलाया।

भारत के समस्त सैनिक मिलकर भी लगभग 250 की संख्या में थे जबकि चीन के 400 से अधिक सैनिक वहां उपस्थित थे। कई घंटे भीशण संघर्श चला। पेट्रोलिंग पइंट 14 की पहाड़ी का एक हिस्सा भारत और चीन के सैनिको ं के दबाव में आकर टूट गया जिससे अनेकों सैनिक अत्यंत ठंडी गलवान नदी में जा गिरे और वहां ठंड के कारण उनकी शहादत हुई। भारतीय सैनिकों ने चीन के अस्थाई पोस्ट पर आग लगा दी और उसे नेस्तानाबूत कर दिया। लड़ाई में भारत के कर्नल संतोष बाबू एवं अन्य 19 सैनिक शहीद हुए जबकि चीन की ओर से 40 अथवा अधिक सैनिक मार गिराए गए। उल्लेखनीय है कि कर्नल संतोष बाबू को उनके अदम्य साहस एवं शौर्य के लिए मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

यदि कर्नल संतोष बाबू एवं भारत के वीर सैनिकों ने अपनी बहादुरी न दिखाई होती तो गलवान घाटी का पेट्रोलिंग पइंट 14 चीन के अधिकार में होता जो भारत के लिऐ एक नया गंभीर खतरा बन गया होता।

गलवान घाटी की लड़ाई में शहीद हुए समस्त भारतीय जवानों को सुभारती परिवार नमन करता है। जय हिंद।

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Amazing place

Amazing place. Gives a sense of patriotism in yourself once you visit the Subharti Shaheed Smarak & Upwan.

Mukul Aggarwal

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This magnificent place is situated at Subharti University Campus and it is especially filled with the spirit of national pride.

Sara Khan

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Feel of Patriotism

There are many more stories regarding the patriotism of Indian people & many more monuments to glorify that too. Standing at this place all those stories made me remember how privileged & honored the Indians feel when it comes to talk about their patriotism.

Sagar Kumar

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