असल उत्तर की लड़ाई 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान लड़ी गई जो सबसे बड़ी टैंक लड़ाईयों में से एक थी। द्वितीय विष्व युद्ध में कुर्स्क की लड़ाई के बाद इस लड़ाई को इतिहास की सबसे बड़ी टैंक लड़ाईयों में एक माना जाता है। यह लड़ाई 8 से 10 सितम्बर 1965 के मध्य लड़ी गई थी, जब पाकिस्तानी सेना ने अपने टैंक और पैदल सेना के बल पर अंतर्राश्ट्रीय सीमा से 5 किलोमीटर अंदर भारतीय षहर खेमकरण पर कब्ज़ा कर लिया था। पाकिस्तान के पास अधिकतर अमेरिकी पैटन टैंक थे और किसी भी देष की सेना का यह सबसे एडवांस आर्मर्ड डिवीजन माना जाता था। वहीं भारत के पास दूसरे विष्व युद्ध के षरमन और सेंचुरियन टैंक ही थे। पाकिस्तानी एयर फोर्स भी पष्चिमी मोर्चे पर अपनी सेना की सहायता में लगी थी।
अगर पाकिस्तान को यहां हराना था तो रणनीति अचूक बनानी थी। स्थिति को ध्यान में रखते हुए, जी.ओ.सी. इंडियन 4 माउंटेन डिवीजन, मेजर जनरल गुरबख्ष सिंह एवं ब्रिगेडियर थॉमस ने असल उत्तर को केन्द्र बिंन्दु बनाकर घोड़े की नाल के आकार की रक्षात्मक स्थिति तैयार की। इस इलाके से होकर एक नाला बहता था जिसके पानी को आस-पास के इलाकों में निकालकर कीचड़ बनाया गया। अगली सुबह, जब पाकिस्तान की सेना ने पुरजोर हमला बोला तो दलदली जमीन ने पाकिस्तानी टैंकों की प्रगति को धीमा कर दिया और उनमें से कई टैंक कीचड़ के कारण आगे नहीं बढ़ सके। धीरे-धीरे पाकिस्तान की सेना घोड़े की नाल के चक्रव्यूह में फंसती चली गई।
पाकिस्तानी सेना के आगे आने पर हवलदार अब्दुल हमीद गन्ने की फसल की आड़ लेते हुए अपनी जीप में उसकी प्रतीक्षा कर रहे थे। दुष्मन का टैंक सामने देखते ही उन्होंने गोला दागकर टैंक नश्ट कर दिया। इस ही तरह अब्दुल हमीद ने उस दिन तीन और पैटन टैंक नश्ट कर दिए। युद्ध के तीसरे दिन पाकिस्तान ने एक बार फिर बड़ा हमला बोला। अब्दुल हमीद ने बहुत समझदारी से तीन और टैंक नश्ट कर दिए। लेकिन दुष्मन की नजर उनपर पड़ चुकी थी। तभी तोप का एक गोला उनकी जीप पर आ गिरा और अब्दुल हमीद षहीद हो गए। परन्तु उन्होंने अपने साथियों को बता दिया था कि बड़े से बड़े टैंक इंसानी हौसले को नहीं कुचल सकते। वो तो षहीद हो गए थे लेकिन उनकी वीरता ने आगे की जीत की पटकथा भी लिख दी थी।
अब तक पाकिस्तानी सेना के पैर उखड़ चुके थे। उन्होंने दाहिने-बायें से भाग निकलने का प्रयत्न किया परन्तु रणनीति के अनुसार वहां पहले से ही भारतीय सेना घात लगाए बैठी थी। पाकिस्तानी सेना के कमांडर मेजर जनरल नासिर अहमद खान कार्यवाही में मारे गए। 100 से अधिक पाकिस्तानी टैंक नश्ट कर दिए गए, 40 से अधिक टैंक पकड़ लिए गए जबकि भारतीयों ने इस जवाबी हमले के दौरान केवल 24 टैंक खोए। तीन दिनों की भीशण लड़ाई के बाद, असल उत्तर के पास पाकिस्तानी सेना को खदेड़ने के साथ लड़ाई समाप्त हो गई।
अब्दुल हमीद को मरणोपरान्त परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
सुभारती परिवार का इस युद्ध में षहीद हुए हवलदार अब्दुल हमीद और भारतीय सेना के अन्य षहीदों को सादर नमन। जय हिन्द।




