द्रास उप-क्षेत्र में प्वाइंट 5140 तोलोलिंग रिजलाइन का उच्चतम बिंदु है, जो रणनीतिक रूप से अत्यन्त महत्वपूर्ण पर्वत शिखर है। इसे दुर्जेय समझा जाता है। कारगिल युद्ध के समय इस शिखर पर पुनः अधिकार करने का कार्य लेफ्टिनेंट कर्नल योगेश कुमार जोशी की कमान में 13 जम्मू एंड कष्मीर राइफल्स को सौंपा गया था। लेफ्टिनेंट कर्नल योगेश कुमार जोशी ने ब्रावो कम्पनी और डेल्टा कम्पनी के साथ प्वाइंट 5140 पर हमला करने का निर्णय किया। जहां लेफ्टिनेंट संजीव सिंह जामवाल ने ब्रावो कम्पनी का नेतृत्व किया, वहीं डेल्टा कम्पनी का नेतृत्व तत्कालीन लेफ्टिनेंट विक्रम बत्रा ने किया।
20 जून, 1999 की आधी रात के बाद बी और डी दोनों कम्पनियां तोपखाने से गोलीबारी की आड़ में प्वाइंट 5140 के करीब पहुंच गई ं। बी कम्पनी ने बाएं किनारे से अपना हमला किया जबकि विक्रम बत्रा के तहत डी कम्पनी ने दुश्मन को आश्चर्यचकित करने और उनके वापसी मार्ग को काटने के उद्देश्य से पीछे से पहाड़ी पर पहुंचने का निर्णय किया। प्वाइंट 5140 पर अधिकार करने की प्रक्रिया में विक्रम बत्रा गंभीर रूप से घायल हो गए लेकिन वह और उनकी कम्पनी सफलतापूर्वक प्वाइंट 5140 पर अधिकार करने में सफल रहे और उन्होनें अपने प्रसिद्ध शब्दों ‘‘ये दिल मांगे मोर’’ को कहते हुए अपने कमांड पोस्ट को रेडियो संकेत किया।
इससे प्रचुर मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया गया। सौभाग्य से, बी और डी दोनों कम्पनियों को पहाड़ी पर अधिकार करने में कोई हताहत नहीं हुआ। प्वाइंट 5140 पर अधिकार करने के बाद विक्रम बत्रा को कप्तान के पद पर पदोन्नत किया गया था। उल्लेखनीय है कि 07 जुलाई 1999 को दुश्मन की एक और पोजीशन प्वाइंट 4825 पर अधिकार करते समय कप्तान विक्रम बत्रा ने अपनी छाती पर दुश्मन की गोली खाई और शहीद हो गए। लेकिन शहीद होने से पहले उन्होनें अपने अद्वितीय साहस के चलते प्वाइंट 4825 पर अधिकार कर लिया। इस अदम्य साहस के लिए उनको परम वीर चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।
द्रास में प्वाइंट 5140, कारगिल सेक्टर का नाम 30 जुलाई, 2022 को भारतीय सशस्त्र बलों की जीत के उपलक्ष्य में गन हिल के रूप में कर दिया गया और 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन विजय में गनर्स के सर्वोच्च बलिदान को इस प्रकार श्रद्धांजलि दी गई।
भारत माँ के सच्चे सपूत सैनिकों को सुभारती परिवार का नमन। जय हिन्द।




