राइफलमैन राजेश खत्री का जन्म नेपाल के दैलेख जिले के तोरयान गांव में हुआ था। वे भारतीय सेना में शामिल हुए और उन्हें 5/9 गोरखा राइफल्स में नियुक्त किया गया जो एक पैदल सेना रेजिमेंट है जो अपने बहादुर सैनिकों और विभिन्न युद्ध सम्मानों के लिए प्रसिद्ध है।
सितम्बर 2017 के दौरान राइफलमैन खत्री की यूनिट 5/9 गोरखा राइफल्स को एलओसी के साथ जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में तैनात किया गया था। यूनिट का जिम्मेदारी का क्षेत्र एलओसी के उस हिस्से में पड़ता था जो लगातार सीमा पार उल्लंघनों के साथ बहुत अस्थिर था। इस क्षेत्र में आतंकवादियों द्वारा घुसपैठ की आशंका थी और घुसपैठ के प्रयासों में मदद के लिए पाकिस्तानी सेना अक्सर सीमा पार से गोलीबारी करती थी। 5/9 गोरखा राइफल्स को घुसपैठ के प्रयासों को रोकने के लिए नियमित सशस्त्र गश्त शुरू करनी पड़ी। राइफलमैन राजेश खत्री 20 सितम्बर 2017 को कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर में ऐसी ही एक गश्त का हिस्सा थे। उस दिन सुबह करीब साढ़े नौ बजे पाकिस्तानी सैनिकों ने इलाके में भारी गोलाबारी शुरू कर दी और 5/9 गोरखा राइफल्स का गश्ती दल को भी निशाना बनाया। भारतीय बलों ने भी तोपखाने की आग का उपयोग करके जवाबी हमले शुरू किए और कई घंटों तक गोलीबारी जारी रही। इस दौरान सीमा पार से हुई गोलीबारी में सिपाही राजेश खत्री समेत भारतीय सेना के चार जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। राइफलमैन राजेश खत्री को तुरंत चिकित्सा उपचार के लिए श्रीनगर के बादामी बाग छावनी के 92 बेस अस्पताल में ले जाया गया जहाँ वे शहीद हो गए।
राइफलमैन राजेश खत्री एक बहादुर सैनिक थे जिन्होंने 27 साल की उम्र में देश की सेवा में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनके परिवार में उनकी पत्नी श्रीमती दीपा खत्री हैं।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से राइफलमैन राजेश खत्री को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन !




