मेजर आसा राम त्यागी, महावीर चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 02 जनवरी 1939 को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के फ़तेहपुर गांव में हुआ था। श्री सगुवा सिंह के पुत्र मेजर आसा राम के दो भाई-बहन थे। बड़े भाई श्री परशुराम त्यागी और छोटे भाई श्री श्याम सुंदर त्यागी। मेजर आसा राम त्यागी को 17 दिसंबर 1961 को प्रसिद्ध जाट रेजिमेंट के 3 जाट रेजिमेंट में नियुक्त किया गया था जो अपनी वीरता और राष्ट्र के लिए महान सेवा के लिए जाना जाता है।
21 सितंबर 1965 को 3 जाट रेजिमेंट को पाकिस्तान के डोगराई गांव में दुश्मन के ठिकानों पर कब्ज़ा करने का काम सौंपा गया। मेजर आसा राम त्यागी के नेतृत्व में ए कंपनी 21 सितंबर को डोगराई के पूर्वी किनारे पर कब्जा करने के लिए आगे बढ़ी जिसे दुश्मन की एक कंपनी ने टैंकों, रिकॉइल-लेस बंदूकों और पिलबॉक्स के साथ अच्छी तरह से बचाव किया था। मेजर त्यागी ने दुश्मन की तैनाती और अपने पास उपलब्ध संसाधनों का आकलन करने के बाद अपनी कंपनी की सबसे आगे की पलटन के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया।
दुश्मन के ठिकानों पर हमला करते समय मेजर त्यागी के दाहिने कंधे में दो गोलियां लगीं। लेकिन वे अपने सैनिकों को गोली चलाने का निर्देश देकर आगे बढ़ते रहे । मेजर त्यागी को एहसास हुआ कि दुश्मन के टैंक उनकी प्रगति के लिए सबसे बड़ा खतरा थे और उन्हें बेअसर करने की जरूरत थी। अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा की परवाह किए बिना मेजर त्यागी ने दो टैंकों पर हथगोले से हमला किया और चालक दल के सदस्यों को मार गिराया। नतीजतन दुश्मन के दो टैंक सही सलामत पकड़ लिए गए और एक बड़ा खतरा ख़त्म हो गया। हालाँकि इस दौरान मेजर त्यागी को तीन और गोलियाँ लगीं। वह बिना रुके अपने सैनिकों के साथ तब तक आगे बढ़ते रहे जब तक कि वह बेहोश नहीं हो गए। उनकी वीरता और अनुकरणीय नेतृत्व से प्रेरित होकर उनके सैनिकों ने दोगुनी ताकत से लड़ाई लड़ी और उद्देश्य हासिल करने में सफल रहे।
परन्तु 25 सितम्बर 1965 को मेजर आसा राम त्यागी अपनी चोटों के कारण शहीद हो गए । मेजर आसा राम त्यागी को उनके अदम्य साहस, अदम्य लड़ाई की भावना, उत्कृष्ट नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के सबसे बड़े दूसरे वीरता पुरस्कार "महावीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से मेजर आसा राम त्यागी, महावीर चक्र (मरणोपरांत) को उनकी जयंती पर बारंबार नमन !




