आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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लांस नायक वसंतराव गराड, सेना मेडल (मरणोपरांत) सेना में शामिल हुए और उन्हें 169 फील्ड रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। वर्ष 1999 के दौरान वे 7 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) में नियुक्त थे और उनकी यूनिट जम्मू - कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में लगी हुई थी। 15 मार्च 1999 को वे एक आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। लांस नायक वसंतराव गराड एक प्रतिबद्ध सैनिक थे जिन्होंने देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए । लांस नायक वसंतराव गराड को उनके असाधारण साहस, अदम्य भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरुस्कार "सेना मेडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Battle Casualty
लांस नायक सुभाष कदम सेना में शामिल हुए और उन्हें 9 मराठा लाइट इन्फेंट्री में नियुक्त किया गया। वर्ष 2010 के दौरान वे पोखरण में तैनात थे। 15 मार्च 2010 को एक ऑपरेशन के दौरान वे गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए । लांस नायक सुभाष कदम एक प्रतिबद्ध सैनिक थे जिन्होंने देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए । लांस नायक सुभाष कदम को उनके असाधारण साहस, अदम्य भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए सम्पूर्ण भारतवर्ष हमेशा याद करेगा। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, अशोक चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 15 मार्च 1977 को केरल के कोझिकोड में हुआ था। 12 जुलाई 1999 को वे भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट हुए और उन्हें 7 बिहार रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। नवम्बर 2008 के दौरान मेजर उन्नीकृष्णन 51 एसएजी के साथ कार्यरत थे जो एनएसजी की एक विशेष प्रतिक्रिया यूनिट है । 26 नवम्बर 2008 को मुम्बई की कई प्रतिष्ठित इमारतों पर आतंकवादियों ने हमला किया दिया और कुछ नागरिकों को बंधक बना लिया। उनमें से एक ताज महल पैलेस होटल भी था। मेजर उन्नीकृष्णन बंधकों को छुड़ाने के लिए इस ऑपरेशन में तैनात 51 स्पेशल एक्शन ग्रुप के टीम कमांडर थे। वे 10 कमांडो के ग्रुप के साथ होटल में दाखिल हुए और ऑपरेशन शुरू किया। उनके असाधारण साहस और नेतृत्व के कारण सभी आतंकवादियों को मार गिराया गया और सौंपे गए मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। परन्तु मुठभेड़ के दौरान उनको कई गोलियां लगीं जिसके कारण 28 नवम्बर 2008 को वे शहीद हो गए। मेजर संदीप उन्नीकृष्णन को उनके उत्कृष्ट साहस, अदम्य लड़ाई की भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Paratrooper Dharmendra Kumar स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







