आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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सिपाही लुंगमबो अबोनमाई मणिपुर के अरियांग खुनखु नागा गांव के रहने वाले थे। सेना में भर्ती होने के बाद 10 असम रेजिमेंट में उनकी नियुक्ति हुई। 2020 के दौरान उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में तैनात थी। 14 जून 2020 को लुंगमबो अबोनमाई पाकिस्तान द्वारा किए गए संघर्ष विराम उल्लंघन से जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में एलओसी के पास अग्रिम चौकी की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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राइफलमैन औरंगजेब जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के पुंछ के रहने वाले थे। उन्हें 4 जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री में भर्ती किया गया और कुछ समय बाद उन्हें 44 आरआर बटालियन में नियुक्त किया गया जो जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए तैनात थी। 14 जून 2018 को राइफलमैन औरंगजेब के छुट्टी जाते समय आतंकवादियों ने उनका अपहरण कर लिया और बाद में उनका शव पुलवामा जिले के कालम्पोरा में मिला। राइफलमैन औरंगजेब एक वीर और प्रतिबद्ध सैनिक थे जिन्होंने देश की सेवा में अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
ब्रिगेडियर राजिंदर सिंह जामवाल, महावीर चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 14 जून 1899 को सांबा जिले के बागूना गांव में हुआ था। जून 1921 में उन्हें जम्मू-कश्मीर राज्य बल में नियुक्त किया गया और 24 सितंबर 1947 को उनकी नियुक्ति चीफ ऑफ स्टाफ जम्मू-कश्मीर राज्य बल के रूप में की गयी । 1947 के दौरान स्वतंत्रता के पश्चात भारत पाकिस्तान के बीच चले युद्ध में उन्होंने हिस्सा लिया! युद्ध के दौरान उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया परंतु उस दौरान वे वीरगति को प्राप्त हो गये। अभूतपूर्व साहस एवम् त्याग के लिए उनको स्वतंत्र भारत के पहले महावीर चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







