आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | 1979-05-11 |
| Martyr | Battle Casualty |
मेजर प्रतीक मिश्रा का जन्म 11 मई 1979 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ था। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 7 डोगरा रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। वर्ष 2005 के दौरान उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में तैनात थी। 08 अक्टूबर 2005 को मेजर प्रतीक मिश्रा और उनके सैनिक उरी सेक्टर में यूनिट के एक फॉरवर्ड एरिया में तैनात थे । उसी दिन जम्मू & कश्मीर के कुछ हिस्सों में विनाशकारी भूकंप आया और काफी लोगों की जान चली गई। भूकंप में उस बंकर का एक हिस्सा नष्ट हो गया जहां मेजर प्रतीक और उनके लोग तैनात थे। शुरू में वे बंकर के अंदर सुरक्षित थे परन्तु अपने सैनिकों को बचाते समय उनके बंकर का बचा हुआ हिस्सा ढह गया जिससे मेजर प्रतीक मिश्रा मलबे में दब गए और शहीद हो गए। मेजर प्रतीक मिश्रा एक बहादुर सैनिक और सर्वोत्कृष्ट अधिकारी थे जिन्होंने आगे बढ़कर भारतीय सेना की उच्चतम परंपराओं का पालन करते हुए देश की सेवा में अपना जीवन लगा दिया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Prateek Mishra को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!
| DOB | 1987-10-08 |
| Martyr | Battle Casualty |
सिपाही पुष्पेंद्र सिंह का जन्म 1987 में उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के खुटिया गांव में हुआ था। 2011 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 20 जाट रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 2018 के दौरान सिपाही पुष्पेंद्र सिंह की यूनिट को एलओसी के साथ कुपवाड़ा जिले में उत्तरी कश्मीर के तंगधार सेक्टर में तैनात थी। 13 अगस्त 2018 को पाकिस्तानी सैनिकों ने युद्ध विराम का उल्लंघन किया और भारतीय सेना की चौकियों पर भारी मोर्टार से गोलाबारी शुरू कर दी। भारतीय सेना ने इस युद्ध विराम उल्लंघन का जोरदार जबाब दिया और इसी दौरान दो पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। परन्तु दोनों और से हुई भीषण गोलीबारी में सिपाही पुष्पेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Sepoy Pushpendra Singh को उनकी जयंती पर नमन!
| DOB | 1983-10-08 |
| Martyr | Battle Casualty |
मेजर रुशिकेश रमानी, सेना मेडल (मरणोपरांत) का जन्म 08 अक्टूबर 1983 को गुजरात में हुआ था । 11 जून 2005 को मेजर रुशिकेश रमानी को 23 पंजाब रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। मार्च 2009 के दौरान उनकी यूनिट को आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू और कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में तैनात किया गया। 07 जून 2009 को मेजर रमानी ने 5 आतंकवादियों के एक समूह को नियंत्रण रेखा से 3 किलोमीटर अंदर गुलाब पोस्ट के पास चोरी-छिपे घूमते देखा जिन्होंने चुनौती दिए जाने पर सैनिकों पर गोलीबारी करके भागने की कोशिश की । इसके बाद भीषण गोलीबारी हुई जिसके दौरान मेजर रमानी के सीने और पेट में 12 गोलियां लगीं और वे घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर रुशिकेश रमानी को उनकी उत्कृष्ट बहादुरी, अडिग नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "सेना मेडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Maj RUSHIKESH RAMANI को उनकी जयंती पर नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







