आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | 1966-07-15 |
| Martyr | Battle Casualty |
मेजर सुशील ऐमा, कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 15 जुलाई 1966 को श्रीनगर में हुआ था। 1988 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें आर्मी एयर डिफेंस कोर में नियुक्त किया गया। 1997 में उन्हें आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर में तैनात 17 राष्ट्रीय राइफल्स में नियुक्त किया गया। 01 अगस्त 1999 को उनकी यूनिट को खबर मिली कि विदेशी भाड़े के आतंकवादियों का एक बड़ा समूह पास की पहाड़ी पर इकट्ठा हुआ है । मेजर सुशील और उनके सैनिकों ने जल्द ही दुश्मन से संपर्क किया और एक भीषण मुठभेड़ हुई जिसमे मेजर सुशील ने दो आतंकवादियों को मार गिराया। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान उनकी टीम ने कुल पांच आतंकवादियों को मार गिराया लेकिन खुद घायल हुए और शहीद हो गए। उनके असाधारण साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें देश का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Sushil Aima KC को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | |
| Martyr | Battle Casualty |
सिपाही रोहिन कुमार का जन्म वर्ष 1996 में हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के गलोर खास गांव में हुआ था । वर्ष 2016 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 14 पंजाब रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 2020 के दौरान उनकी यूनिट को लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल के साथ जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में तैनात किया गया । 01 अगस्त 2020 को पाकिस्तानी बलों ने संघर्ष विराम का उल्लंघन किया और अकारण गोलीबारी की। इसी दौरान भारतीय सेना ने गोलीबारी का मुंहतोड़ जवाब दिया लेकिन इसी दौरान सिपाही रोहिन कुमार गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Sepoy Rohin Kumar को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1922-08-01 |
| Martyr |
कैप्टन मेहता सिंह, "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 1 अगस्त 1922 को हुआ था और वे पंजाब के रहने वाले थे। उन्होंने 20 वर्ष की आयु में सेना में भर्ती होकर सिख लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट की तीसरी सिख एलआई बटालियन में कमीशन प्राप्त किया । सन् 1956 में कैप्टन मेहता सिंह की यूनिट 3 सिख एलआई नागालैंड के कोहिमा में तैनात थी। जून 1956 के अंत में, सुरक्षा बलों को खुफिया सूत्रों से खोनामा गांव में नागा उग्रवादियों की उपस्थिति की सूचना मिली। आशंका थी कि उग्रवादियों ने गांव के ऊपरी हिस्से पर कब्जा कर लिया है। कैप्टन मेहता सिंह के नेतृत्व में 3 सिख एलआई की 'डी' कंपनी को घिरे हुए गांव में भेजने का निर्णय लिया गया। 28 जुलाई 1956 को, 17 राजपूत रेजिमेंट के सैनिकों की भारी संख्या को देखकर, नागा उग्रवादियों ने आक्रामक रुख अपना लिया। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए, कैप्टन मेहता सिंह ने उग्रवादियों के खिलाफ आक्रमण शुरू करने का फैसला किया। इसके बाद हुई आमने-सामने की लड़ाई में कैप्टन मेहता सिंह आतंकवादियों को पीछे धकेलने में सफल रहे। गोलीबारी के दौरान कैप्टन मेहता सिंह के पेट में एलएमजी की गोली लगी और वे गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। कैप्टन मेहता सिंह को उनके असाधारण साहस, नेतृत्व, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के दूसरे सर्वोच्च शांति काल के वीरता पुरस्कार, "अशोक चक्र" द्वितीय श्रेणी (जिसे अब कीर्ति चक्र के नाम से जाना जाता है) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से CAPT MEHTA SINGH- KC को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
| DOB | 1971-08-01 |
| Martyr | Battle Casualty |
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से GDR RIJAVAN को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







