आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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कैप्टन अनुज नैय्यर, महावीर चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 28 अगस्त 1975 को दिल्ली में हुआ था। 07 जून 1997 को सेना में शामिल हुए और उनको 17 जाट में नियुक्त किया गया। 1999 के दौरान कैप्टन अनुज नैय्यर की यूनिट को कारगिल युद्ध के लिए तैनात किया गया । 06 जुलाई 1999 को उन्होंने अपनी रॉकेट लॉन्चर टुकड़ी को तैनात किया और गोलीबारी शुरू कर दी। भीषण गोलीबारी के दौरान उन्होंने दुश्मन के 9 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और तीन मीडियम मशीन गन बंकरों को नष्ट कर दिया। इसी दौरान वे गंभीर रूप से घायल हुए और 07 जुलाई 1999 को शहीद हो गए। कैप्टन अनुज नैय्यर को उनके असाधारण साहस, अदम्य लड़ाई की भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश का दूसरा सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार "महावीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय की ओर से कैप्टन अनुज नैय्यर, महावीर चक्र (मरणोपरांत) को उनकी जयंती पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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कैप्टन जेरी प्रेम राज, वीर चक्र (मरणोपरांत) का जन्म केरल के तिरुवनंतपुरम जिले के वेंगनूर में हुआ था। 05 सितंबर 1997 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 158 मीडियम रेजिमेंट (एसपी) में नियुक्त किया गया । वर्ष 1999 के दौरान उनकी यूनिट कारगिल युद्ध का हिस्सा थी। 06 जुलाई 1999 को द्रास सेक्टर में प्वाइंट 4875 (गन हिल) क्षेत्र में वे फॉरवर्ड ऑब्जर्वेशन पोस्ट ऑफिसर थे। इसी दौरान दुश्मन के ठिकानों पर विनाशकारी तोपखाने को निर्देशित करते हुए घायल हुए और 07 जुलाई 1999 को शहीद हो गए । कैप्टन जेरी प्रेम राज को दुर्गम बाधाओं के सामने साहस और संकल्प के प्रदर्शन के लिए देश के तीसरे सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पुरस्कार "वीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय की ओर से कैप्टन जेरी प्रेम राज, वीर चक्र (मरणोपरांत) को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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कैप्टन विक्रम बत्रा, परम वीर चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 09 सितंबर 1974 को हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में हुआ था। 06 दिसम्बर 1997 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स में नियुक्त किया गया । 1999 के दौरान उनकी यूनिट कारगिल युद्ध में शामिल थी। 20 जून 1999 को पॉइंट 5140 चोटी पर भीषण युद्ध के बाद उन्होंने उसे अपने कब्ज़े में ले लिया। इसके बाद पॉइंट 4875 पर कब्ज़ा करने की जिम्मेदारी कैप्टन विक्रम बत्रा को दी गयी। उन्होंने दुश्मन की भारी गोलीबारी के सम्मुख इस असंभव कार्य को भी पूरा कर प्वॉइंट 4875 पर भी कब्ज़ा कर लिया लेकिन इस युद्ध के दौरान वे गंभीर रूप से घायल हो गये और अपने गंभीर जख्मो के कारण 07 जुलाई 1999 को वीरगति को प्राप्त हुए। कैप्टन विक्रम बत्रा को शत्रु के सम्मुख अत्यन्त उत्कृष्ट व्यक्तिगत वीरता तथा उच्चतम कोटि के नेतृत्व के प्रदर्शन के लिए 15 अगस्त 1999 को देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार "परमवीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से कैप्टन विक्रम बत्रा, परमवीर चक्र (मरणोपरांत) को उनकी जयंती पर बारंबार नमन। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







