आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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मेजर सतीश दहिया, शौर्य चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 22 सितंबर 1985 को हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के बनिहारी गांव में हुआ था । 12 दिसम्बर 2009 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें आर्मी सर्विस कोर में नियुक्त किया गया । कुछ वर्षों तक अपनी कोर के साथ सेवा करने के बाद उन्हें आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर में तैनात 30 राष्ट्रीय राइफल्स में नियुक्त किया गया । 14 फरवरी 2017 को उनकी यूनिट द्वारा आतंकवादियों को पकड़ने के लिए एक अभियान शुरू किया गया जिसका नेतृत्व मेजर सतीश दहिया को सौंपा गया। ऑपरेशन के दौरान मेजर दहिया ने आतंकवादियों के भागने के सभी रास्ते बंद करने के लिए अपने सैनिकों को तैनात किया । इसी दौरान आतंकवादियों ने सैनिकों पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। दोनों ओर से भीषण गोलीबारी हुई जिसमें तीन आतंकवादी मारे गए परन्तु मेजर दहिया गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। मेजर सतीश दहिया को उनके अदम्य साहस, नेतृत्व, लड़ाई की भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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Rifleman Ravi Kumar SM स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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Paratrooper Dharmendra Kumar स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
मेजर सुनील गणपति, सेना मैडल (मरणोपरांत) का जन्म 14 फरवरी 1976 को कर्नाटक के कोडागु जिले के चेम्बेबेल्लूर गांव में हुआ था। दिसंबर 1998 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। कुछ वर्षों बाद उन्हें आर्मी एविएशन कोर के लिए चुना गया और हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में नियुक्त किया गया। 15 अगस्त 2008 को उन्होंने चीता हेलीकॉप्टर की उड़ान भरी। इसी दौरान उनके हेलीकॉपर में तकनीकी खराबी आ गयी और उनका हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया और वे शहीद हो गए। 26 जनवरी 2009 को उनके सराहनीय कर्तव्य समर्पण, साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें "सेना मैडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से मेजर सुनील गणपति, सेना मैडल (मरणोपरांत) को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







