आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | 1978-09-20 |
| Martyr | Battle Casualty |
लेफ्टिनेंट पंकज अरोड़ा, "सेना मेडल" (मरणोपरांत) का जन्म 20 सितम्बर 1978 को उत्तर प्रदेश के बरेली में हुआ था। 10 दिसम्बर 2002 को वे भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट हुए और उन्हें 18 मराठा लाइट इन्फैंट्री में नियुक्त किया गया। अगस्त 2003 के दौरान लेफ्टिनेंट पंकज अरोड़ा की यूनिट आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू एंड कश्मीर के पुंछ जिले में तैनात थी। 24 अगस्त 2003 को उनकी यूनिट ने खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकवादियों के खिलाफ एक ऑपरेशन शुरू किया जिसका नेतृत्व लेफ्टिनेंट पंकज अरोड़ा को सौंपा गया। इससे पहले कि सैनिक आतंकवादियों से संपर्क कर पाते आतंकवादियों ने उन पर हमला कर दिया। लेफ्टिनेंट पंकज ने अदम्य साहस और वीरता दिखाते हुए अकेले ने ही दो आतंकवादियों को मार गिराया। परन्तु इसी दौरान वे घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। लेफ्टिनेंट पंकज अरोड़ा को ऑपरेशन के दौरान उनके उत्कृष्ट साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "सेना मेडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lt Pankaj Arora SM को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 19962-01-21 |
| Martyr |
मेजर संजय बदुनी का जन्म 21 जनवरी 1962 को देहरादून में हुआ था। 1985 में वे आईएमए से पास आउट हुए और उन्हें आर्टिलरी रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 1995 के दौरान मेजर संजय बदुनी को 25 राष्ट्रीय राइफल्स में नियुक्त किया गया जो आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर में तैनात थी। 24 अगस्त 1995 को उनकी यूनिट ने मेजर बदुनी के नेतृत्व में आतंकवादियों के खिलाफ एक खोज और विनाश अभियान शुरू किया। इसी दौरान दोनों ओर से भीषण गोलीबारी हुई जिसमें एक आतंकवादी का पीछा करते हुए मेजर बदुनी के पैर और गर्दन में गोलियां लगीं ओर वे वीरगति को प्राप्त हो गए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Sanjay Baduni को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | |
| Martyr | Battle Casualty |
नायक नीरज कुमार सिंह, "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हुआ था। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें राजपुताना राइफल्स में नियुक्त किया गया । 2014 में उन्हें 57 राष्ट्रीय राइफल्स में नियुक्त किया गया। 24 अगस्त 2014 को नायक नीरज कुमार सिंह उस टीम का हिस्सा थे जिसे कुपवाड़ा में एक खोज और विनाश अभियान शुरू करने का काम सौंपा गया। इसी दौरान जब सेना के जवान आतंकियों के करीब पहुंचे तो आतंकियों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। नायक नीरज ने आतंकवादी पर हमला किया,उसका हथियार छीन लिया और आमने-सामने की लड़ाई में उसे मार गिराया। लेकिन हमले में वे गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। नायक नीरज कुमार सिंह को उनकी असाधारण बहादुरी, अदम्य भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Naik Neeraj Kumar Singh AC को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1991-08-24 |
| Martyr | Battle Casualty |
कैप्टन आयुष यादव उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले थे और उनका जन्म 24 अगस्त 1991 को हुआ था। वे 30 दिसंबर 2012 को भारतीय सैन्य अकादमी में 134वें कोर्स में शामिल हुए और उन्हें आर्टिलरी रेजिमेंट में कमीशन प्राप्त हुआ। 2017 के दौरान, कैप्टन आयुष यादव की यूनिट श्रीनगर से लगभग 120 किमी दूर कुपवाड़ा जिले के पंजगाम में स्थित आर्मी गैरीसन में स्थित थी। 27 अप्रैल 2017 को, तीन सशस्त्र आतंकवादी जंगली पहाड़ों से नीचे उतरे और 4.30 बजे पंजगाम में सेना की चौकी की ओर बढ़े। उन्होंने शिविर के पीछे की ओर से दो कंटीले तारों की बाड़ को काटकर हथगोले फेंके और अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। गोलियों की गगनभेदी आवाज सुनकर कैप्टन आयुष यादव जाग गए। कैप्टन आयुष यादव ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए आतंकवादियों पर गोलीबारी की, जो आवासीय क्वार्टरों की ओर बढ़ रहे थे। गोलीबारी के दौरान कैप्टन आयुष को गोलियां लगीं और वह गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गये। कैप्टन आयुष यादव एक बहादुर सैनिक और उत्कृष्ट अधिकारी थे जिन्होंने देश की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दे दी। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Captain Ayush Yadav को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
| DOB | 1990-08-24 |
| Martyr | Battle Casualty |
नायक मनिंदर सिंह का जन्म 24 अगस्त 1990 को पंजाब के गुरदासपुर जिले के फतेहगढ़ चूड़ियां गाँव में हुआ था। 2008 में 18 वर्ष की आयु में सेना में शामिल हो गए और उन्हें पंजाब रेजिमेंट में भर्ती किया गया। नवंबर 2019 के दौरान नायक मनिंदर सिंह की यूनिट को जम्मू एंड कश्मीर के सियाचिन ग्लेशियर के उत्तरी क्षेत्र में तैनात किया गया था। सैनिकों ने निर्दिष्ट चौकियों पर तैनात रहने के अलावा सीमा पर क्षेत्र की निगरानी के लिए नियमित गश्त भी की। एनके मनिंदर सिंह, सिपाही मनीष कुमार, सिपाही वीरपाल सिंह और सिपाही डिंपल कुमार के साथ 18 नवंबर 2019 को ऐसे ही एक गश्त पर थे। जब गश्ती दल बर्फ से ढके इलाके से गुजर रहा था, तो एक भयानक हिमस्खलन हुआ, जिससे उन्हें कोई भी कार्रवाई करने के लिए बहुत कम समय मिला। नायक मनिंदर सिंह व साथी सैनिक टनों बर्फ के नीचे दब गए और वीरगति को प्राप्त हो गये। नायक मनिंदर सिंह एक बहादुर सैनिक थे जिन्होंने 29 साल की उम्र में अपने कर्तव्य का पालन करते हुए देश की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दे दी। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Naik Maninder Singh को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







