आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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मेजर जोजी जोसेफ गुजरात के गांधीनगर जिले के रहने वाले थे और उनका जन्म 21 फरवरी 1976 को हुआ था। 1998 में उन्हें 14 मराठा लाइट इन्फैंट्री बटालियन में लेफ्टिनेंट के रूप में नियुक्त किया गया। जून 2005 के दौरान मेजर जोजी जोसेफ की यूनिट को नियंत्रण रेखा (एलओसी) के करीब जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में तैनात किया गया। 08 जून 2005 को मेजर जोजी जोसेफ ने अपने सैनिकों को आंतकवादियों को घेरने का निर्देश दिया। जब सैनिकों ने आतंकवादियों को चुनौती दी तो आंतकवादियों ने सैनिकों पर गोलीबारी शुरू कर दी। भारी गोलीबारी में एक आतंकवादी को ढेर कर दिया गया। मारे गए आतंकवादी का हथियार नीचे गिर गया जिससे जोरदार फायरिंग हुई जिस से मेजर जोसेफ को गोली लग गयी और वे वीरगति को प्राप्त हो गए।। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
लेफ्टिनेंट उमर फैयाज का जन्म 08 जून 1994 को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के सुदसोना गांव में हुआ था। 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे एनडीए और बाद में प्रशिक्षण के लिए आईएमए देहरादून गए। लेफ्टिनेंट उमर को 10 दिसंबर 2016 को प्रसिद्ध 2 राजपूताना राइफल्स यूनिट में नियुक्त किया गया। 09 मई 2017 को एक दुर्भाग्यपूर्ण और कायरतापूर्ण एवं बर्बरतापूर्ण कृत्य में आतंकवादियों ने लेफ्टिनेंट उमर का छुट्टी के दौरान अपहरण कर लिया और बाद में उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह, अशोक चक्र (मरणोपरांत) पंजाब के गुरदासपुर जिले के रहने वाले थे और उनका जन्म 08 जून 1985 को हुआ था। 2010 में उन्हें सेना आयुध कोर में नियुक्त किया गया और अटैचमेंट के लिए 15 मराठा लाइट इन्फैंट्री में उनकी नियुक्ति हुई।आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू और कश्मीर में तैनात थी। 19 अगस्त 2011 को लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह की यूनिट को सूचना मिली कि 17 कट्टर आतंकवादियों के एक समूह ने गुरेज़ सेक्टर में भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की है। लेफ्टिनेंट नवदीप ने संभावित घुसपैठ मार्ग का अनुमान लगाया और सैनिकों को सामरिक रूप से तैनात किया। घमासान गोलीबारी हुए और ऑपरेशन के दौरान उनकी टीम ने 12 आतंकवादियों को मार गिराया गया और घुसपैठ की कोशिश को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया गया। लेकिन वे ऑपरेशन के दौरान घायल हो गए और शहीद हो गए। लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह को उनके असाधारण साहस, अदम्य भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, "अशोक चक्र" (मरणोपरांत ) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







