शहीद स्मारक एवं उपवन क्लब - स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविदयालय परिसर

 

आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।

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Death Anniversary Test

RFN PURBA TAMANG
DOB 1973-01-05
Martyr Battle Casualty

राइफलमैन फुरबा तमांग पश्चिम बंगाल के कलिम्पोंग जिले के पेदोंग कस्बे के निवासी थे और उनका जन्म 5 जनवरी 1973 को हुआ था। वे 26 अक्टूबर 1993 को 20 वर्ष की आयु में सेना में शामिल हुए। जुलाई-अगस्त 1999 के दौरान, राइफलमैन फुरबा तमांग की यूनिट 4/3 जीआर लद्दाख के बटालिक सेक्टर में तैनात थी और "ऑपरेशन विजय" का हिस्सा थी। हालांकि कारगिल युद्ध 26 जुलाई 1999 को समाप्त हो गया था, लेकिन अगस्त 1999 में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर स्थिति तनावपूर्ण थी और सैनिक किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए सतर्क थे। 23 अगस्त 1999 को, खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर, 4/3 जीआर बटालियन ने अपने कार्यक्षेत्र (एरिया ऑफ रिस्पॉन्सिबिलिटी) में घुसपैठियों के खिलाफ एक अभियान शुरू करने का फैसला किया। राइफलमैन फुरबा तमांग और उनके साथी जब संदिग्ध क्षेत्र में पहुँचे, तो उन पर दुश्मन की भारी गोलीबारी शुरू हो गई। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए, राइफलमैन फुरबा तमांग ने तुरंत कार्रवाई की और अपने साथियों को कवर फायर प्रदान किया। इलाका पथरीला और फिसलन भरा था, जिससे आगे बढ़ने में गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न हुईं। राइफलमैन फुरबा तमांग पैंतरेबाजी करते हुए फिसल गए और चट्टान से नीचे गिर गए। जिस कारण वह गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गये। राइफलमैन फुरबा तमांग एक दृढ़ निश्चयी और साहसी सैनिक थे, जिन्होंने 26 वर्ष की आयु में अपने कर्तव्य का पालन करते हुए प्राणों की आहुति दे दी। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से RFN PURBA TAMANG को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!

Naik Rajib Thapa
DOB
Martyr Battle Casualty

नायक राजीब थापा का जन्म पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में हुआ था। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 3/5 गोरखा रेजिमेंट में तैनात किया गया। 2019 के दौरान उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में तैनात थी। 23 अगस्त 2019 को पाकिस्तानी सैनिकों ने नियंत्रण रेखा के पास नौशेरा सेक्टर में अकारण गोलीबारी कर दी उस दिन नायक राजीब थापा नौशेरा सेक्टर की अग्रिम चौकियों में से एक पर तैनात थे। नायक राजीब थापा और उनकी टीम ने पाकिस्तानी आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब दिया। लेकिन गोलीबारी के दौरान नायक राजीब थापा गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Naik Rajib Thapa को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!

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23 अगस्त 1997 को 24 पंजाब रेजिमेंट के मेजर दीपेंद्र भूचर, "वीर चक्र" (मरणोपरांत) व लांस नायक शमशेर सिंह, "वीर चक्र" (मरणोपरांत) एक सफल ऑपरेशन में वीरगति को प्राप्त हो गये। दोनों ने मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय की ओर से मेजर दीपेंद्र भूचर, "वीर चक्र" (मरणोपरांत) व लांस नायक शमशेर सिंह, "वीर चक्र" (मरणोपरांत) को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन ! पर बारंबार नमन !

Birth Anniversary


Captain Haneef Uddin VrC
DOB 1974-08-23
Martyr Battle Casualty

कैप्टन हनीफ उद्दीन, "वीर चक्र" (मरणोपरांत) दिल्ली के रहने वाले थे और उनका जन्म 23 अगस्त 1974 को हुआ था। 1996 में स्नातक होने के बाद भारतीय सैन्य अकादमी में भर्ती हुए और 7 जून, 1997 को उन्हें भारतीय सेना की लॉजिस्टिक शाखा, आर्मी सर्विस कोर में नियुक्त किया गया। बाद में उन्हें 11 राज रिफ़ बटालियन में तैनात किया गया जो कारगिल में तैनात थी। 06 जून 1999 को अपनी वांछित स्थिति पर कब्ज़ा करने के लिए आगे बढ़े, उन्हें दुश्मन ने देख लिया और उन पर गोलीबारी कर दी। भीषण गोलीबारी में वे घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। कैप्टन हनीफ उद्दीन को उत्कृष्ट साहस, नेतृत्व और उच्च कोटि के सौहार्द का प्रदर्शन करने के लिए वीरता पुरस्कार, "वीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Captain Haneef Uddin VrC को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!

Lt Gautam Gurung SM
DOB 1973-08-23
Martyr Battle Casualty

लेफ्टिनेंट गौतम गुरुंग, “सेना मेडल” (मरणोपरांत) का जन्म 23 अगस्त 1973 को उत्तराखंड के देहरादून जिले में हुआ था। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने सेना में कमीशन लिया। प्रशिक्ष्ण पूरा होने के बाद उन्हें गोरखा रेजिमेंट की 3/4 गोरखा राइफल्स बटालियन में नियुक्त किया गया। उनकी यूनिट को कश्मीर में तंगधार घाटी में तैनात किया गया था। 04 अगस्त 1999 को पाकिस्तानी घुसपैठियों का गोलीबारी द्वारा 3/4 गोरखा राइफल्स के बंकरो में से एक बंकर पर सीधा हमला हुआ जिससे कुछ सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गए। गोलीबारी के बीच सैनिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना अत्यधिक जोखिम भरा था। फिर भी अपनी जान की परवाह किए बिना, लेफ्टिनेंट गौतम गुरुंग ने अपने साथियों की जान बचाने के लिए बचाव अभियान जारी रखा। हालाँकि, ऐसा करते समय उन्हें गोले का छर्रा लगा और वे गंभीर रूप से घायल हुए और 5 अगस्त 1999 को वे वीरगति को प्राप्त हो गए लेफ्टिनेंट गौतम गुरुंग को उनके अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार, “सेना मेडल” (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lt Gautam Gurung SM को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!

Become a Member! Join us and become a member of Subharti Shaheed Smarak & Upwan Club.

Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.

Leaf Png
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Gallery - Glimpses of remembering the Bravehearts!

Lets salute the martyrs for the sacrifices they made and thank them for saving our freedom.

Pricing -Membership Plans

General (सामान्य सदस्यता)

  • सदस्यों को यह अधिकार होगा कि वह शहीद उपवन में निःशुल्क प्रवेश कर सकें एवं भ्रमण कर सकें।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की कैन्टीन में 10 प्रतिशत छूट के साथ भोज्य पदार्थ उपलब्ध होंगे।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की दुकान पर उपलब्ध सामग्री 10 प्रतिशत छूट के साथ उपलब्ध होगी।
  • सदस्यों को मार्स रिसोर्ट्स हाॅटल तस्मय भोजनालय में 10 प्रतिशत छूट की दर से भोज्य उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • सभी सदस्यों को शहीदों एवं महापुरूषों की जयन्ती, पुण्यतिथि एवं विशिष्ट तिथियों को स्मरण कराने हेतु सूचनाएँ भेजी जाएंगी ताकि उन सूचनाओं से अपने परिवार के युवाओं, बच्चों को संस्कारित कर सकें एवं अपने मित्रों को भी सूचना दे सकें।
Rs.1,000 (Annually)
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Amazing place

Amazing place. Gives a sense of patriotism in yourself once you visit the Subharti Shaheed Smarak & Upwan.

Mukul Aggarwal

Visitor

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Magnificent Place

This magnificent place is situated at Subharti University Campus and it is especially filled with the spirit of national pride.

Sara Khan

Visitor

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Feel of Patriotism

There are many more stories regarding the patriotism of Indian people & many more monuments to glorify that too. Standing at this place all those stories made me remember how privileged & honored the Indians feel when it comes to talk about their patriotism.

Sagar Kumar

Visitor

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