आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | 1983-07-27 |
| Martyr | Battle Casualty |
लांस नायक गोपाल सिंह भदोरिया, शौर्य चक्र, विशिष्ट सेवा मैडल का जन्म 27 जुलाई 1983 को गुजरात के अहमदाबाद के गोकुलचंद चाली चमनपुरा गांव में हुआ था। वर्ष 2003 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें सिग्नल कोर में नियुक्त किया गया। वर्ष 2008 के 26 /11 आतंकवादी हमलों के दौरान वे एन एस जी कमांडो समूह का हिस्सा थे और उन्होंने एक घायल सूबेदार मेजर को होटल से बाहर निकाला और एम्बुलेंस तक पहुंचाया। इस बहादुरी के कार्य के लिए उन्हें "विशिष्ट सेवा मैडल" से सम्मानित किया गया। वर्ष 2017 में उन्हें आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर में तैनात 1 राष्ट्रीय राइफल्स में नियुक्त किया गया। 12 फरवरी 2017 को खुफिया जानकारी के आधार पर श्रीनगर के दक्षिण में फ्रिसल के नागबल गांव के आसपास उनकी यूनिट ने एक ऑपरेशन शुरू किया जिसका वे हिस्सा थे। इसी दौरान दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई जिसमें लांस नायक गोपाल सिंह भदोरिया गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। लांस नायक गोपाल सिंह भदोरिया को उनके उत्कृष्ट साहस, अदम्य भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lance Naik Gopal Singh Bhadoriya VSM ,SC को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
| DOB | 1985-07-27 |
| Martyr | Battle Casualty |
मेजर डेविड मैनलुन, कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 27 जुलाई 1985 को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में हुआ था। मार्च 2010 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें नागा रेजिमेंट की पहली बटालियन में नियुक्त किया गया। 2014 में उन्हें 164 इन्फेंट्री बटालियन (टीए) के साथ नागालैंड में तैनात किया गया। 23 जून 2017 को म्यांमार सीमा पर आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में खुफिया जानकारी के आधार पर पैरा कमांडो और 164 इन्फेंट्री बटालियन (टी ए) की एक संयुक्त टीम ने एक खोज और विनाश मिशन शुरू किया। तभी आतंकवादियों ने उन पर हमला कर दिया। मेजर डेविड के नेतृत्व में उनके सैनिकों ने आतंकवादियों पर जवाबी कार्यवाही की। इसी में आतंकवादियों से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद हुआ। लेकिन इसी दौरान मेजर डेविड घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर डेविड मैनलुन को उनके उत्कृष्ट धैर्य, दृढ़ संकल्प, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Maj DAVID MANLUM को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







