आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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Lt Col Robert TA स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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फ्लाइट लेफ्टिनेंट जगन नाथ विजयराघवन ,कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 18 जुलाई 1933 को हुआ था। उन्हें 01 अप्रैल 1953 को भारतीय वायु सेना की उड़ान शाखा में कमीशन मिलाऔर एक लड़ाकू पायलट के रूप में अपनी पहचान बनाई। 14 मई 1962 को अभ्यास के दौरान उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और वे वीरगति को प्राप्त हो गए । फ्लाइट लेफ्टिनेंट जगन नाथ विजयराघवन को उनकी बहादुरी, पेशेवर क्षमता, सौहार्द और कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए देश का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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SAPPER SAPALA SHANMUKA RAO स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
मेजर लैशराम ज्योतिन सिंह, अशोक चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 14 मई 1972 को मणिपुर में हुआ था। उन्हें सेना की एएमसी कोर में शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था और बाद में 26 अप्रैल 2007 को स्थायी कमीशन दिया गया। 13 फरवरी 2010 को मेजर लैशराम ज्योतिन सिंह अफगानिस्तान के काबुल में भारतीय चिकित्सा मिशन में प्रतिनियुक्ति पर गए। 26 फरवरी 2010 को सुबह 6.30 बजे काबुल के नूर गेस्टहाउस जहां वे ठहरे थे उस पर हमलावरों ने आत्मघाती हमला किया। जिसमे मेजर लैशराम ज्योतिन सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर लैशराम ज्योतिन सिंह को उनके निडर कार्य, लड़ाई की भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







