आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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Maj Krishnan Manoj Kumar SM स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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नायक महावीर सिंह, वीर चक्र (मरणोपरांत) सातवीं बटालियन राजपुताना राइफल्स में नियुक्त थे। उनकी यूनिट को 1989 में श्रीलंका में भेजा गया। 31 मई 1989 को नायक महावीर सिंह एवं उनके पांच अन्य साथियों के साथ लिट्टे उग्रवादियों की भिड़ंत हो गई। उग्रवादियों ने नायक महावीर सिंह एवं इनकी टीम पर फायरिंग करी और भागने की कोशिश की। इसी दौरान भीषण गोलाबारी हुई जिसमें नायक महावीर सिंह ने दो उग्रवादियों को मार गिराया लेकिन गोली लगने के कारण स्वयं शहीद हो गए। नायक महावीर सिंह को उनकी असाधारण वीरता, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "वीर चक्र" (मरणोपरांत)) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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Lt Col Ranjit Singh Panwar SM स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
मेजर उत्तम चंद कटोच का जन्म 31 मई 1944 को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित नगरोटा में हुआ था। वर्ष 1971 में वे सेना में भर्ती हुए और उन्हें आर्मी सर्विस कोर में नियुक्त किया गया। वर्ष 1989 में मेजर उत्तम चंद कटोच सिकंदराबाद में स्थित अपनी यूनिट के साथ सेवारत थे । उनकी यूनिट को भारतीय शांति सेना के हिस्से के रूप में श्रीलंका भेजा गया । 24 मार्च 1989 को श्रीलंका के त्रिंकोमाली इलाके में एक टोही मिशन का नेतृत्व करते समय मेजर कटोच और उनकी टीम पर अचानक हमला हुआ। एक पेड़ के सहारे खड़ी एक लावारिस साइकिल के भीतर छुपाई गई एक आईईडी गश्ती दल के पास पहुँचते ही फट गई। विस्फोट के बाद एलटीटीई आतंकवादियों की ओर से भारी गोलीबारी हुई। इसी दौरान मेजर उत्तम चंद कटोच गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







