आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | 1966-04-07 |
| Martyr | Battle Casualty |
लांस नायक रामधारी अत्री का जन्म 07 अप्रैल 1966 को हरियाणा के रोहतक जिले के भालोट गांव में हुआ था। 12 दिसम्बर 1988 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 2 जाट रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 2000 के दौरान लांस नायक रामधारी अत्री को 34 राष्ट्रीय राइफल्स में नियुक्त किया गया जो जम्मू एंड कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए तैनात थी । 12 सितम्बर 2000 को लगभग 12 आतंकवादियों के एक समूह ने 34 राष्ट्रीय राइफल्स के मुख्यालय पर हमला कर दिया। 34 राष्ट्रीय राइफल्स के सैनिक मौके पर पहुँचे और हमले को विफल करने के लिए तुरंत कार्यवाही की । इसी दौरान भारी गोलीबारी हुई जिसमें लांस नायक रामधारी अत्री गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lance Naik Ramdhari Attri को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!
| DOB | 1978-09-12 |
| Martyr | Battle Casualty |
लेफ्टिनेंट धीरेंद्र सिंह अत्री, कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 12 सितम्बर 1978 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। 10 दिसंबर 2002 को वे आईएमए से पास आउट हुए और उन्हें सेना सेवा कोर में नियुक्त किया गया। फील्ड अनुभव प्राप्त करने के लिए उन्हें 3 राजपूत रेजिमेंट में नियुक्त किया गया । 2002 के दौरान उनकी यूनिट उग्रवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर में तैनात थी। 18 अक्टूबर 2003 को लेफ्टिनेंट धीरेंद्र सिंह अत्री के नेतृत्व में उग्रवादियों के खिलाफ एक घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया गया । इसी दौरान घात लगाकर बैठे आतंकवादियों ने उनकी टीम पर हमला कर दिया । दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुए जिसमें लेफ्टिनेंट धीरेंद्र सिंह अत्री और उनकी टीम ने 8 आतंकवादियों को मार गिराया। परन्तु लेफ्टिनेंट धीरेंद्र सिंह अत्री कई गोलियां लगने के कारण गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। लेफ्टिनेंट धीरेंद्र सिंह अत्री को उनकी वीरता, युद्ध भावना और सर्वोच्च बलिदान के विशिष्ट कार्य के लिए देश के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lt Dheerendra Singh Atri KC को उनकी जयंती पर नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







