आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | 1974-10-29 |
| Martyr |
कैप्टन हेमंत प्रेम कुमार, "सेना मेडल" (मरणोपरांत) का जन्म 29 अक्टूबर 1974 को महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था। 05 सितम्बर 1997 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 15 जाट रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 2000 के दौरान कैप्टन हेमंत प्रेम कुमार की यूनिट मणिपुर के तमेंगलोंग जिले में तैनात थी जहाँ एनएससीएन विद्रोहियों के कई गुट सक्रिय थे। 30 अगस्त 2000 को कैप्टन हेमंत कुमार ने तमेंगलोंग बाजार में एक आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया। सफल ऑपरेशन के बाद कैप्टन हेमंत कुमार और उनके सैनिक यूनिट में वापस लौट रहे थे इसी दौरान विद्रोहियों ने उन पर हमला कर दिया। जिसमें कैप्टन हेमंत कुमार को कई गोलियां लगीं और वे वीरगति को प्राप्त हो गए। कैप्टन हेमंत प्रेम कुमार को उनकी बहादुरी और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "सेना मेडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Capt Hemant Prem Kumar SM को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | |
| Martyr | Battle Casualty |
नायब सूबेदार राजविंदर सिंह का जन्म 1980 में पंजाब के तरनतारन जिले की खडूर साहिब तहसील के गोइंदवाल साहिब गांव में हुआ था। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 1 सिख लाइट इन्फेंट्री में नियुक्त किया गया। अगस्त 2020 के दौरान उनकी यूनिट को जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में तैनात किया गया। 30 अगस्त 2020 को पाकिस्तानी सेना ने राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में सीमा पार से भारतीय चौकियों पर अकारण गोलीबारी शुरू कर दी। उस दौरान नायब सूबेदार राजविंदर सिंह नौशेरा सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर अग्रिम चौकियों की निगरानी कर रहे थे। भारतीय सेना ने पाकिस्तानी आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब दिया लेकिन इस भारी गोलीबारी में नायब सूबेदार राजविंदर सिंह गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। नायब सूबेदार राजविंदर सिंह एक बहादुर सैनिक थे जिन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए राष्ट्र की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए कर दिए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Nb Sub Rajwinder Singh को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1974-10-15 |
| Martyr | Battle Casualty |
लेफ्टिनेंट कमांडर फिरदौस दराबशाह मोगल, "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 15 अक्टूबर 1974 को गुजरात के अहमदाबाद में हुआ था। 01 जनवरी 1998 को वे नौसेना में शामिल हुए और उन्हें नौसेना की पनडुब्बी शाखा में नियुक्त किया गया। लेफ्टिनेंट कमांडर मोगल ने 26 मई 2010 को नौसेना की पनडुब्बी आईएनएस शंकुश के कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्यभार संभाला। 29 अगस्त 2010 को जब पनडुब्बी तैनाती के रास्ते में थी तो एक खराबी देखी गई। 30 अगस्त 2010 को जब इंजीनियरिंग अधिकारी के नेतृत्व में तीन नाविकों की एक टीम खराबी को ठीक करने के लिए आवरण पर थी तो एक मजबूत लहर उनमें से दो इंजीनियरिंग अधिकारियों को बहा ले गई। इसी दौरान लेफ्टिनेंट कमांडर मोगल इंजीनियरिंग अधिकारी एवं अपने साथियों को बचाने में जुट गए। उन्होंने अपने जहाज के छह साथियों की जान बचा ली लेकिन खुद वीरगति को प्राप्त हो गए। लेफ्टिनेंट कमांडर मोगल को भारतीय नौसेना की सर्वोच्च परंपराओं में कर्तव्य, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान और वीरतापूर्ण कार्य के लिए "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lt Cdr Firdaus Darabshah Mogal SC को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1994-10-10 |
| Martyr | Physical Casualty |
मेजर दिक्संत थापा का जन्म 10 अक्टूबर 1994 को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के योल छावनी के सेना अस्पताल में हुआ था। 10 जून 2017 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 6 मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री में नियुक्त किया गया। अगस्त 2020 के दौरान मेजर दिक्संत थापा की यूनिट को पूर्वी लद्दाख में नियंत्रण रेखा के करीब तैनात थी। 30 अगस्त 2020 को मेजर दिक्संत थापा को लद्दाख के एक ऑपरेशनल क्षेत्र में इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स को तेजी से शामिल करने के लिए जिम्मेदारी दी। इसी दौरान उन्होंने एक इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल को खतरनाक स्थिति में देखा और वे घटनास्थल पर पहुंचे और कार्रवाई में जुट गए। इसी दौरान एक सिविल ट्रक उसी जगह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे मेजर दिक्संत थापा गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर दिक्संत थापा एक बहादुर सैनिक और एक अच्छे अधिकारी थे, जिन्होंने आगे बढ़कर नेतृत्व किया और 26 साल की उम्र से पहले ही देश की सेवा में अपने प्राण न्योछवर कर दिए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Dixant Thapa को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







