आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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कैपà¥à¤Ÿà¤¨ जिंटू गोगोई, वीर चकà¥à¤° (मरणोपरांत) का जनà¥à¤® असम के गोलाघाट जिले में हà¥à¤† था । सेना में कमीशन के बाद उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ 17 गà¥à¤µà¤¾à¤² राइफलà¥à¤¸ में नियà¥à¤•à¥à¤¤ किया गया जो 1999 के दौरान कारगिल यà¥à¤¦à¥à¤§ में शामिल थी । 29 जून 1999 की रात को कैपà¥à¤Ÿà¤¨ गोगोई और उनके सैनिकों को जà¥à¤¬à¤¾à¤° हाइटà¥à¤¸ में काला पतà¥à¤¥à¤° से दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ को हटाने का काम सौपा गया । कैपà¥à¤Ÿà¤¨ गोगोई अपने सैनिकों के साथ रिज तक पहà¥à¤‚चे और दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ सैनिकों पर हमला कर दिया । à¤à¥€à¤·à¤£ गोलीबारी में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ के सैनिकों को मार गिराया और अपना मिशन पूरा किया। लेकिन गोलीबारी के दौरान खà¥à¤¦ घायल हो गठऔर 30 जून 1999 को वीरगति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो गà¤à¥¤à¥¤ कैपà¥à¤Ÿà¤¨ जिंटू गोगोई को उनके उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ साहस, नेतृतà¥à¤µ और उचà¥à¤š कोटि के सौहारà¥à¤¦ का पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ करने के लिठ15 अगसà¥à¤¤ 1999 को "वीर चकà¥à¤°" (मरणोपरांत) से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Battle Casualty
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
मेजर दीपक कà¥à¤®à¤¾à¤° पडà¥à¤¡à¤¾ "शौरà¥à¤¯ चकà¥à¤°" (मरणोपरांत) का जनà¥à¤® 30 जून 1976 को पंजाब के होशियारपà¥à¤° जिले में हà¥à¤† था। वे 23 वरà¥à¤· की आयॠमें अपनी शिकà¥à¤·à¤¾ पूरी करने के बाद सेना में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ हो गठ। वरà¥à¤· 2000 में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बखà¥à¤¤à¤°à¤¬à¤‚द कोर के 85 आरà¥à¤®à¤¡ रेजिमेंट में नियà¥à¤•à¥à¤¤ किया गया। 2005 में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ 14 गà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤°à¥à¤¸ में कà¥à¤°à¥‰à¤¸-अटैचमेंट पर à¤à¥‡à¤œà¤¾ गया। 25 मई 2005 को खà¥à¤«à¤¿à¤¯à¤¾ सूतà¥à¤°à¥‹à¤‚ से मिली जानकारी के आधार पर 14 गà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤°à¥à¤¸ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ मेजर दीपक कà¥à¤®à¤¾à¤° पडà¥à¤¡à¤¾ को ऑपरेशन को अंजाम देने का काम सौंपा गया । लंबी खोज के बाद सैनिकों ने आतंकवादियों से संपरà¥à¤• किया लेकन चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ दिठजाने पर आतंकवादियों ने कायरतापूरà¥à¤µà¤• उन पर गोलीबारी कर दी जिसमे मेजर दीपक कà¥à¤®à¤¾à¤° गंà¤à¥€à¤° रूप से घायल हो गà¤à¥¤ उनको चिकितà¥à¤¸à¤¾ के लिठदिलà¥à¤²à¥€ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¾à¤‚तरित कर दिया गया लेकिन 04 जून 2005 को वे वीरगति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो गà¤à¥¤ मेजर दीपक कà¥à¤®à¤¾à¤° पडà¥à¤¡à¤¾ को असाधारण साहस, नेतृतà¥à¤µ और सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š बलिदान के लिठवीरता पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार "शौरà¥à¤¯ चकà¥à¤°" (मरणोपरांत) से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







