आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | |
| Martyr | Battle Casualty |
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से HAV BHUPINDER SINGH को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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| Martyr | Battle Casualty |
मेजर गुरफेज सिंह चीमा का जन्म वर्ष 1981 में पंजाब के कपूरथला जिले में हुआ था। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 6 लांसर्स में नियुक्त किया गया । कुछ वर्षों बाद उन्हें 13 महार रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 2011 के दौरान मेजर गुरफेज सिंह चीमा "ऑपरेशन मेघदूत" के हिस्से के रूप में सियाचिन ग्लेशियर में अपनी यूनिट के साथ तैनात थे। 21 जुलाई 2011 को मेजर गुरफेज 19000 फीट पर स्थित अशोक पोस्ट पर तैनात थे और एक फाइबर ग्लास हट में रह रहे थे। रात में दुर्घटनावश मेजर गुरफेज की फाइबर ग्लास हट में आग लग गई और वे शहीद हो गए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Gurphej Singh Cheema को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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| Martyr | Battle Casualty |
लेफ्टिनेंट अर्चित वर्डिया का जन्म राजस्थान के उदयपुर में हुआ था । वे सेना में शामिल हुए और उन्हें भारतीय सेना के 175 मीडियम रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 2011 के दौरान लेफ्टिनेंट अर्चित वर्डिया "ऑपरेशन मेघदूत" के हिस्से के रूप में सियाचिन ग्लेशियर में अपनी यूनिट के साथ तैनात थे। 21 जुलाई 2011 को लेफ्टिनेंट अर्चित वर्डिया 19000 फीट पर स्थित अशोक पोस्ट पर तैनात थे और एक फाइबर ग्लास हट में रह रहे थे। रात में दुर्घटनावश लेफ्टिनेंट अर्चित वर्डिया की फाइबर ग्लास हट में आग लग गई और वे शहीद हो गए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lt. Archit Verdia को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1968-07-21 |
| Martyr | Battle Casualty |
कैप्टन विनायक गोरे का जन्म 21 जुलाई 1968 को मुंबई के उपनगर विले पार्ले में हुआ था। 12 जून 1991 को वे भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से पास आउट हुए और उन्हें 31 मीडियम रेजिमेंट में नियुक्त किया गया । 1995 के दौरान उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा सेक्टर में तैनात थी जो एक आतंकवादी प्रभावित क्षेत्र था। 26 सितम्बर 1995 को कैप्टन विनायक सीमा पर एक चौकी की निगरानी कर रहे थे जिसे पाकिस्तानी सेना नियमित आधार पर निशाना बनाती थी। इसी दौरान दुश्मन सेना ने सीमा चौकियों पर अकारण गोलीबारी की जिसका कैप्टन विनायक गोरे और उनके सैनिको ने मुंहतोड़ जवाब दिया परन्तु वे गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







