आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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राइफलमैन सुनील जंग महत का जन्म 13 नवंबर 1978 पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में हुआ था। उन्हें 11 गोरखा राइफल्स की 1/11 जीआर बटालियन में नियुक्त किया गया था। 10 मई 1999 को तड़के राइफलमैन सुनील जंग लेफ्टिनेंट आरएस रावत की कमान के तहत प्लाटून के सिग्नल ऑपरेटर के रूप में कार्य कर रहे थे। 15 मई 1999 को 1/11 जीआर द्वारा अपने सामरिक लाभ के लिए उपलब्ध पत्थरों का उपयोग करके एक हमला शुरू किया गया था। हमले के दौरान राइफलमैन सुनील जंग महत रेडियो कवर साबित करने के साथ-साथ दुश्मन पर गोलीबारी करने के दोहरे काम में लगे हुए थे। भारी गोलीबारी के दौरान राइफलमैन सुनील जंग को गोली लग गई और वे वीरगति को प्राप्त हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय द्वारा राइफलमैन सुनील जंग महत को उनकी जयंती पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
कैपà¥à¤Ÿà¤¨ सौरठकालिया का जनà¥à¤® 29 जून 1976 को अमृतसर में हà¥à¤† था। 12 दिसंबर 1998 को वे à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ थलसेना में कमीशन अधिकारी के रूप में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ हà¥à¤ और उनको 4 जाट रेजिमेंट, जो कारगिल के काकà¥à¤¸à¤° सब सेकà¥à¤Ÿà¤° में तैनात थी उसमें नियà¥à¤•à¥à¤¤ किया गया। 15 मई 1999 को à¤à¤• इनपà¥à¤Ÿ के आधार पर वे अपने पांच अनà¥à¤¯ सैनिकों के साथ à¤à¤• पेटà¥à¤°à¥‹à¤²à¤¿à¤‚ग पर गठ। वहां उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ की मौजूदगी दिखाई दी और उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ पर हमला कर दिया। हमले के दौरान कैपà¥à¤Ÿà¤¨ सौरठकालिया à¤à¤µà¤‚ उनकी टीम के पास गोला बारूद खतà¥à¤® होने और दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ की संखà¥à¤¯à¤¾ अपेकà¥à¤·à¤¾ से कहीं अधिक होने के कारण उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ ने बंदी बना लिया। इस दौरान उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बहà¥à¤¤ यातनाà¤à¤‚ दी गयी जिनà¥à¤¹à¥‡ वे à¤à¥‡à¤²à¤¤à¥‡ रहे और बाद में वीरगति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤à¥¤ स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Battle Casualty
कैप्टन निर्भय कुमार सिंह का जन्म 15 मई 1966 को हुआ था। उन्हें 11 जून 1988 को राजपूताना राइफल्स की 16 राजपूताना राइफल्स में नियुक्त किया गया था। 1989 में उनकी यूनिट को ऑपरेशन पवन के पूर्वोत्तर क्षेत्र में तैनात किया गया था जो नियमित आधार पर लिट्टे कैडरों के खिलाफ ऑपरेशन में लगा हुआ था। कैप्टन निर्भय कुमार सिंह 15 मई 1989 को लिट्टे के खिलाफ एक ऑपरेशन में वीरगति को प्राप्त हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय द्वारा कैप्टन निर्भय कुमार सिंह को उनकी जयंती पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला, महावीर चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 15 मई 1926 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ था। जनवरी 1946 में वे एक कैडेट के रूप में रॉयल इंडियन नेवी में शामिल हुए और 01 मई 1948 को रॉयल इंडियन नेवी में नियुक्त हुए। फरवरी 1971 में उन्होंने आईएनएस खुकरी के कप्तान का पदभार संभाला। 09 दिसम्बर 1971 को भारत - पाकिस्तान युद्ध के दौरान आईएनएस खुकरी पर पाकिस्तानी पनडुब्बी पीएनएस हंगूर ने हमला कर दिया । कैप्टन मुल्ला ने कुछ ही मिनटों में स्थिति का मूल्यांकन किया और इसे छोड़ने का आदेश जारी कर दिया। उन्होंने अनुकरणीय बहादुरी का प्रदर्शन करते हुए अपने 67 लोगों को बचा लिया जिनमें 05 अधिकारी, 01 मिडशिपमैन और 61 अन्य क्रू सदस्य शामिल थे। परन्तु कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला का जहाज़ आईएनएस खुकरी डूब गया जिसके कारण वे अपने जहाज के साथ नीचे चले गए और शहीद हो गए। कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला को उनके उत्कृष्ट साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए भारतीय नौसेना के पहले और देश के दूसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार "महावीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय कि ओर से कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला, महावीर चक्र (मरणोपरांत) को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
कैप्टन निर्भय कुमार सिंह का जन्म 15 मई 1966 को हुआ था। उन्हें 11 जून 1988 को राजपूताना राइफल्स की 16 राजपूताना राइफल्स में नियुक्त किया गया था। 1989 में उनकी यूनिट को ऑपरेशन पवन के पूर्वोत्तर क्षेत्र में तैनात किया गया था जो नियमित आधार पर लिट्टे कैडरों के खिलाफ ऑपरेशन में लगा हुआ था। कैप्टन निर्भय कुमार सिंह 15 मई 1989 को लिट्टे के खिलाफ एक ऑपरेशन में वीरगति को प्राप्त हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय द्वारा कैप्टन निर्भय कुमार सिंह को उनकी जयंती पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







