आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | 1923-08-18 |
| Martyr | Battle Casualty |
लेफ्टिनेंट कर्नल अर्देशिर बुर्जोरजी तारापोर, "परमवीर चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 18 अगस्त 1923 को मुंबई में हुआ था। 01 जनवरी 1942 को वे हैदराबाद राज्य की सेना में शामिल हुए और उन्हें 7वीं हैदराबाद इन्फैंट्री में नियुक्त किया गया। हैदराबाद राज्य के भारत के साथ एकीकृत के बाद उन्हें पदोन्नति के साथ साथ 17 हॉर्स का कमांडिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया। 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध के दौरान 11 सितंबर 1965 को 17 हॉर्स ने पाकिस्तान के फिलोरा पर एक आश्चर्यजनक हमले की योजना बनाई। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच गहन युद्ध हुआ जिसमें दुश्मन के 13 टैंक नष्ट हो गए और पाकिस्तानी सेना चाविंडा क्षेत्र छोड़कर भाग गयी। इसी दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल तारापोर घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए हो गए। लेफ्टिनेंट कर्नल अर्देशिर बुर्जोरजी तारापोर को उनके उत्कृष्ट साहस, नेतृत्व, अदम्य भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार "परमवीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lt Col Ardeshir Burzorji Tarapore PVC को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!
| DOB | 1969-12-05 |
| Martyr |
मेजर राजीव कुमार जून, अशोक चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 05 दिसम्बर 1969 को हरियाणा के रोहतक जिले के गढ़ीखारी गांव में हुआ था। 08 जून 1991 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 22 ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 1994 के दौरान उनकी यूनिट आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू एंड कश्मीर में तैनात थी । 16 सितम्बर 1994 को मेजर राजीव कुमार जून के नेतृत्व में अनंतनाग जिले के एक गांव में घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया गया । ऑपरेशन के दौरान आतंकवादियों को चुनौती दिए जाने पर उन्होंने सैनिकों पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई जिसमें मेजर राजीव कुमार जून ओर उनकी टीम ने दो आतंकवादियों को मार गिराया तथा उनके पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद हुआ। परन्तु मेजर राजीव कुमार जून गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। मेजर राजीव कुमार जून को उनके अदम्य साहस, युद्ध की भावना और सर्वोच्च बलिदान के विशिष्ट कार्य के लिए शांति काल के दौरान देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Rajiv Kumar Joon AC SC को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







