आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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राइफलमैन सतीश भगत जम्मू जिले के गुरुसिंघु गांव के रहने वाले थे। 2015 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 3 जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स में नियुक्त किया गया। 2017 के दौरान उनकी यूनिट कश्मीर घाटी के कुपवाड़ा जिले में तैनात थी जो सीमा पर अग्रिम चौकियों की निगरानी कर रही थी। 12 जुलाई 2017 को पाकिस्तानी सेना ने सीमा पार से भारतीय चौकियों पर अकारण गोलीबारी शुरू कर दी। इसी दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तानी आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब दिया लेकिन भारी गोलीबारी में राइफलमैन सतीश भगत गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में शहीद हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय की ओर से राइफलमैन सतीश भगत को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Battle Casualty
लांस नायक रणजीत सिंह जम्मू-कश्मीर के जम्मू जिले के भलवाल गांव के रहने वाले थे। पढाई के बाद वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 3 जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स में नियुक्त किया गए। 2017 के दौरान लांस नायक रणजीत सिंह की यूनिट कश्मीर घाटी के कुपवाड़ा जिले में अग्रिम चौकियों की निगरानी कर रही थी। 12 जुलाई 2017 को पाकिस्तानी सेना ने कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर में भारतीय चौकियों पर अकारण गोलीबारी शुरू कर दी। भारतीय सेना ने पाकिस्तानी आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब दिया लेकिन इसी दौरान लांस नायक रणजीत सिंह गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में शहीद हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय की ओर से लांस नायक रणजीत सिंह को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
सिपाही कालू राम जाखड़ का जनà¥à¤® 12 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 1974 को राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के जोधपà¥à¤° जिले के खेड़ी चारना गांव में हà¥à¤† था । 28 अपà¥à¤°à¥ˆà¤² 1994 को उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सेना की 17 जाट में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ किया गया। 04 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 1999 को 17 जाट को पà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤‚ट 4875 पर कबà¥à¤œà¤¾ करने का काम सौंपा गया जिसका सिपाही कालू राम हिसà¥à¤¸à¤¾ थे। à¤à¥€à¤·à¤£ यà¥à¤¦à¥à¤§ में सिपाही कालू राम और उनके साथियों ने दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ के दो बंकरों पर कबà¥à¤œà¤¼à¤¾ कर लिया लेकिन तीसरे बंकर की लड़ाई के दौरान वे गंà¤à¥€à¤° रूप से घायल हà¥à¤ और वीरगति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो गà¤à¥¤ स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







