आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | 1956-04-19 |
| Martyr |
मेजर रतनेश कुमार चतुर्वेदी, वीर चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 19 अप्रैल 1956 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था। 11 जून 1977 को वे आईएमए, देहरादून से पास आउट हुए और उन्हें 5 राजपुताना राइफल्स में नियुक्त किया गया। अगस्त 1987 में उनकी यूनिट श्रीलंका में आईपीकेएफ के हिस्से के रूप शामिल हुई। 18 अक्टूबर 1987 को 5 राजपुताना राइफल्स को जाफना किले में 1 मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ एक ओप्रशन में शामिल होने का काम सौंपा गया और इस ऑपरेशन का नेतृत्व मेजर रतनेश ने किया। जब ऑपरेशन अंतिम चरण में था तो उग्रवादियों ने भारी मशीनगनों से मेजर रतनेश और उनके सैनिकों पर भारी गोलीबारी कर दी। दोनों ओर से भीषण गोलीबारी हुई जिसमें मेजर रतनेश और उनके सैनिकों ने जवाबी कार्यवाही में छह आतंकवादियों को मार डाला जिसमें से दो को मेजर रतनेश ने अकेले ही मार डाला और बाकि आतंकवादी अपनी चौकी छोड़ कर भाग गए । परन्तु इसी दौरान मेजर रतनेश गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए । मेजर रतनेश कुमार चतुर्वेदी को उनके विशिष्ट साहस, वीरतापूर्ण नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए "वीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Ratnesh Kumar Chaturvedi VrC को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!
| DOB | 1978-09-12 |
| Martyr | Battle Casualty |
लेफ्टिनेंट धीरेंद्र सिंह अत्री, कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 12 सितम्बर 1978 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। 10 दिसंबर 2002 को वे आईएमए से पास आउट हुए और उन्हें सेना सेवा कोर में नियुक्त किया गया। फील्ड अनुभव प्राप्त करने के लिए उन्हें 3 राजपूत रेजिमेंट में नियुक्त किया गया । 2002 के दौरान उनकी यूनिट उग्रवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर में तैनात थी। 18 अक्टूबर 2003 को लेफ्टिनेंट धीरेंद्र सिंह अत्री के नेतृत्व में उग्रवादियों के खिलाफ एक घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया गया । इसी दौरान घात लगाकर बैठे आतंकवादियों ने उनकी टीम पर हमला कर दिया । दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुए जिसमें लेफ्टिनेंट धीरेंद्र सिंह अत्री और उनकी टीम ने 8 आतंकवादियों को मार गिराया। परन्तु लेफ्टिनेंट धीरेंद्र सिंह अत्री कई गोलियां लगने के कारण गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। लेफ्टिनेंट धीरेंद्र सिंह अत्री को उनकी वीरता, युद्ध भावना और सर्वोच्च बलिदान के विशिष्ट कार्य के लिए देश के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lt Dheerendra Singh Atri KC को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!
| DOB | 1970-08-15 |
| Martyr | Battle Casualty |
नायक रामबीर सिंह तोमर, "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 15 अगस्त 1970 को मध्य प्रदेश के प्रेमपुरा, मुरैना में हुआ था। 28 जुलाई 1989 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 15 कुमाऊँ रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। कुछ वर्षों बाद उन्हें 26 राष्ट्रीय राइफल्स में नियुक्त किया गया जो आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर में तैनात थी। 18 अक्टूबर 2001 को नायक रामबीर सिंह की यूनिट को डोडा जिले के एक गांव में आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में सूचना मिली और उनकी टीम ने आतंकवादियों के खिलाफ खोज एवं विनाशकारी अभियान शुरू किया। इसी दौरान आतंकवादियों ने घिरने के बाद जवानों पर गोलीबारी शुरू कर दी लेकिन नायक रामबीर ने ग्रेनेड फेंककर और गोलीबारी से चार आतंकवादियों को मार गिराया। लेकिन इसी दौरान उनकी आंख में गोली लगी और वे गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गये। नायक रामबीर सिंह को विशिष्ट बहादुरी, प्रेरक नेतृत्व और अडिग लड़ाई की भावना के लिए देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Naik Rambeer singh Tomar AC को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!
| DOB | 1982-10-18 |
| Martyr | Battle Casualty |
विंग कमांडर साहिल गांधी का जन्म हरियाणा के हिसार में हुआ था । वर्ष 2004 में वे वायु सेना में शामिल हुए और उन्हें एक लड़ाकू विमान पायलट के रूप में नियुक्त किया गया। । 2019 के दौरान विंग कमांडर साहिल को उस टीम का हिस्सा बनने के लिए चुना गया था जिसे फरवरी 2019 में बैंगलोर में होने वाले प्रतिष्ठित एयर शो में भाग लेने का काम सौंपा गया था। 19 फरवरी 2019 को विंग कमांडर साहिल अपनी टीम के साथियों के साथ कठिन स्पिन युद्धाभ्यास कर रहे थे । जब स्पिन युद्धाभ्यास चल रहा था उसी समय दो हॉक जेट हवा के बीच में नियंत्रण से बाहर हो गए जिससे दोनों विमानों में टक्कर हो गई। दोनों विमानों में तीन एयर क्रू थे जो मानक संचालन प्रक्रिया के कारण विमान से बाहर निकल गए। परन्तु विंग कमांडर साहिल को गंभीर चोटें आईं और वे शहीद हो गए। विंग कमांडर साहिल गांधी एक समर्पित सैनिक और सक्षम वायु योद्धा थे जिन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Wg Cdr Sahil Gandhi को उनकी जयंती पर नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







