शहीद स्मारक एवं उपवन क्लब - स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविदयालय परिसर

 

आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।

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Death Anniversary

Battle Casualty

हवलदार लश्कर सिंह, कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) सेना में शामिल हुए और उन्हें 16 सिख रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। वर्ष 2001 के दौरान उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन रक्षक के तहत तैनात थी और आतंकवाद विरोधी अभियानों में लगी हुई थी । 09 मार्च 2001 को उनकी यूनिट ने आतंकवादियों के खिलाफ एक ऑपरेशन शुरू किया जिसका हवलदार लश्कर सिंह हिस्सा थे। जैसे ही उनकी टीम संदिग्ध क्षेत्र में पहुंची आतंकवादियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी। इसी दौरान दोनों ओर से भीषण गोलीबारी हुई जिसमें हवलदार लश्कर सिंह गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। । हवलदार लश्कर सिंह को उनके सराहनीय साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!

Battle Casualty

मेजर एल रेम्बो सिंह का जन्म मणिपुर के इम्फाल में हुआ था। वर्ष 2009 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें सेना सेवा कोर में नियुक्त किया गया । 2017 के दौरान वे 503 एएससी बटालियन के साथ जम्मू कश्मीर में तैनात थे। 09 मार्च 2017 को वे पूर्वी लद्दाख की बेहद कठोर जलवायु और उबड़-खाबड़ अत्यंत दुर्गम इलाके में तांगत्से से कारु तक परिचालन भंडार ले जाने वाले वाहनों के एक काफिले का नेतृत्व कर रहे थे। इसी दौरान उनका वाहन सड़क से फिसल कर एक गहरी खाई में गिर गया। जिसमें मेजर एल रेम्बो सिंह गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!

Battle Casualty

सिपाही दीपक जगन्नाथ घाडगे का जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले के बोरगांव गांव में हुआ था । वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 15 मराठा लाइट इन्फैंट्री में नियुक्त किया गया। वर्ष 2017 में उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में तैनात थी। 09 मार्च 2017 को सिपाही दीपक एलओसी पर अपनी यूनिट की एक अग्रिम चौकी पर तैनात थे। उस दिन जब पाकिस्तानी सैनिकों ने पुंछ सेक्टर में सीमा पार से भारतीय चौकियों पर अकारण गोलीबारी शुरू की तो एलओसी की रखवाली कर रहे भारतीय सैनिकों ने उन्हें जोरदार ढंग से जवाब दिया । इस भीषण गोलीबारी के दौरान सिपाही दीपक जगन्नाथ घाडगे गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। सिपाही दीपक जगन्नाथ घाडगे एक समर्पित सैनिक थे जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!

Battle Casualty

सूबेदार जागीर सिंह सेना में शामिल हुए और उन्हें 20 सिख रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। वर्ष 2001 के दौरान उनकी यूनिट जम्मू - कश्मीर में ऑपरेशन रक्षक के तहत तैनात थी और आतंकवाद विरोधी अभियानों में लगी हुई थी। 09 मार्च 2001 को उनकी यूनिट ने आतंकवादियों के खिलाफ एक ऑपरेशन शुरू किया जिसका सूबेदार जागीर सिंह हिस्सा थे। जैसे ही उनकी टीम संदिग्ध क्षेत्र में पहुंची आतंकवादियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी। इसी दौरान दोनों ओर से भीषण गोलीबारी हुई जिसमें सूबेदार जागीर सिंह गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। सूबेदार जागीर सिंह एक प्रतिबद्ध सैनिक थे जिन्होंने देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!

Birth Anniversary


सूबेदार राज कुमार का जन्म 09 मार्च 1970 को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नूरपुर क्षेत्र के खानी गांव में हुआ था। 1999 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 24 पंजाब रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 2017 में उन्हें 53 राष्ट्रीय राइफल्स में नियुक्त किया गया जो आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू एंड कश्मीर के बडगाम जिले के बीरवाह के द्रंग इलाके में तैनात थी। यूनिट का ऑपरेशन एरिया आतंकवादियों से भरा हुआ था और सैनिकों को हर समय हाई अलर्ट पर रहना पड़ता था। 09 अक्टूबर 2017 को सूबेदार राज कुमार एक गश्ती दल का नेतृत्व कर रहे थे। जब गश्ती दल वापस बेस कैंप में वापस लौट रहा था तो पूर्व-नियोजित तरीके से आतंकवादियों के एक समूह ने गश्ती दल पर हमला कर दिया। सूबेदार राज कुमार और उनके सैनिकों ने पूरी ताकत के साथ जवाबी कार्रवाई की। परन्तु भारी गोलीबारी में सूबेदार राज कुमार गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। सूबेदार राज कुमार एक बहादुर सैनिक थे जिन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से सूबेदार राज कुमार को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !

कैप्टन दीपक गुलेरिया का जन्म 9 मार्च 1968 को राजस्थान के अजमेर में हुआ था। 1999 के दौरान, कैप्टन गुलेरिया जम्मू-कश्मीर में तैनात 3 आरआर बटालियन में कार्यरत थे। 18 जून 1999 को, आतंकवादियों ने श्रीनगर-कारगिल राजमार्ग पर एक आईईडी विस्फोट किया, जिसमें कई सैनिक और नागरिक घायल हो गए। कैप्टन गुलेरिया ने एक बचाव दल का गठन किया और घायल नागरिकों और सैनिकों को निकालने की निगरानी की। उन्हें हवाई मार्ग से अस्पताल ले जाने के लिए पास के हेलीपैड पर ले जाया गया। तभी दूसरा आईईडी विस्फोट हुआ, जिसमें कैप्टन गुलेरिया गंभीर रूप से घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हो गए। कैप्टन दीपक गुलेरिया को सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार, "सेना मेडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय एवं समस्त सुभारती परिवार द्वारा कैप्टन दीपक गुलेरिया को उनकी जयंती पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !

सैपर योगेश धामने का जन्म 09 मार्च को हुआ था। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 121 इंजीनियर रेजिमेंट में नियुक्त किया गया । 30 नवम्बर 2016 को पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के सुकना में वे एक चीता हेलीकॉप्टर के द्वारा ड्यूटी पर जा रहे थे। इसी दौरान उनका चीता हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें सैपर योगेश धामने गंभीर रूप से घायल हुए और 12 दिसम्बर 2016 को शहीद हो गए । सैपर योगेश धामने एक प्रतिबद्ध सैनिक थे जिन्होंने देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !

कैप्टन दीपक गुलेरिया, सेना मेडल (मरणोपरांत) का जन्म 9 मार्च 1968 को राजस्थान के अजमेर में हुआ था। 1992 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें सेना सेवा कोर में नियुक्त किया गया। 1999 के दौरान कैप्टन गुलेरिया जम्मू-कश्मीर में तैनात 3 आरआर बटालियन में कार्यरत थे। 18 जून 1999 को आतंकवादियों ने श्रीनगर-कारगिल राजमार्ग पर एक आईईडी विस्फोट किया जिसमें कई सैनिक और नागरिक घायल हो गए। कैप्टन गुलेरिया ने मौके पर पहुंचकर तुरंत बचाव दल का गठन किया और घायल नागरिकों और सैनिकों को निकालने की निगरानी की।लेकिन तभी दूसरा आईईडी विस्फोट हुआ जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हो गए। कैप्टन दीपक गुलेरिया को उनके सराहनीय साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार, "सेना मेडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !

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Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.

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Gallery - Glimpses of remembering the Bravehearts!

Lets salute the martyrs for the sacrifices they made and thank them for saving our freedom.

Pricing -Membership Plans

General (सामान्य सदस्यता)

  • सदस्यों को यह अधिकार होगा कि वह शहीद उपवन में निःशुल्क प्रवेश कर सकें एवं भ्रमण कर सकें।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की कैन्टीन में 10 प्रतिशत छूट के साथ भोज्य पदार्थ उपलब्ध होंगे।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की दुकान पर उपलब्ध सामग्री 10 प्रतिशत छूट के साथ उपलब्ध होगी।
  • सदस्यों को मार्स रिसोर्ट्स हाॅटल तस्मय भोजनालय में 10 प्रतिशत छूट की दर से भोज्य उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • सभी सदस्यों को शहीदों एवं महापुरूषों की जयन्ती, पुण्यतिथि एवं विशिष्ट तिथियों को स्मरण कराने हेतु सूचनाएँ भेजी जाएंगी ताकि उन सूचनाओं से अपने परिवार के युवाओं, बच्चों को संस्कारित कर सकें एवं अपने मित्रों को भी सूचना दे सकें।
Rs.1,000 (Annually)
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Amazing place

Amazing place. Gives a sense of patriotism in yourself once you visit the Subharti Shaheed Smarak & Upwan.

Mukul Aggarwal

Visitor

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Magnificent Place

This magnificent place is situated at Subharti University Campus and it is especially filled with the spirit of national pride.

Sara Khan

Visitor

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Feel of Patriotism

There are many more stories regarding the patriotism of Indian people & many more monuments to glorify that too. Standing at this place all those stories made me remember how privileged & honored the Indians feel when it comes to talk about their patriotism.

Sagar Kumar

Visitor

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