आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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RFN A P DHYANI- VrC
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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नायक मंगत सिंह à¤à¤‚डारी का जनà¥à¤® 10 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 1968 को उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤–ंड के पौडी गढ़वाल जिले में हà¥à¤† था। 26 मई 1986 को वे सेना में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ हà¥à¤ और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ 18 गढ़वाल राइफलà¥à¤¸ में नियà¥à¤•à¥à¤¤ किया गया। 1999 के दौरान उनकी यूनिट कारगिल यà¥à¤¦à¥à¤§ में शामिल थी। 29 जून 1999 को उनकी टीम ने पà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤‚ट 4700 पर कबà¥à¤œà¤¼à¤¾ करने की योजना बनायी और उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ को हासिल किया । लेकिन à¤à¤¾à¤°à¥€ गोलीबारी के दौरान नायक मंगत सिंह गंà¤à¥€à¤° रूप से घायल हो गये और वीरगति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤ । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
कैपà¥à¤Ÿà¤¨ सौरठकालिया का जनà¥à¤® 29 जून 1976 को अमृतसर में हà¥à¤† था। 12 दिसंबर 1998 को वे à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ थलसेना में कमीशन अधिकारी के रूप में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ हà¥à¤ और उनको 4 जाट रेजिमेंट, जो कारगिल के काकà¥à¤¸à¤° सब सेकà¥à¤Ÿà¤° में तैनात थी उसमें नियà¥à¤•à¥à¤¤ किया गया। 15 मई 1999 को à¤à¤• इनपà¥à¤Ÿ के आधार पर वे अपने पांच अनà¥à¤¯ सैनिकों के साथ à¤à¤• पेटà¥à¤°à¥‹à¤²à¤¿à¤‚ग पर गठ। वहां उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ की मौजूदगी दिखाई दी और उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ पर हमला कर दिया। हमले के दौरान कैपà¥à¤Ÿà¤¨ सौरठकालिया à¤à¤µà¤‚ उनकी टीम के पास गोला बारूद खतà¥à¤® होने और दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ की संखà¥à¤¯à¤¾ अपेकà¥à¤·à¤¾ से कहीं अधिक होने के कारण उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ ने बंदी बना लिया। इस दौरान उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बहà¥à¤¤ यातनाà¤à¤‚ दी गयी जिनà¥à¤¹à¥‡ वे à¤à¥‡à¤²à¤¤à¥‡ रहे और बाद में वीरगति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤à¥¤ स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







