आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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कैप्टन आर हर्षन का जन्म 15 अप्रैल 1980 को केरल के तिरुवनंतपुरम के मनाकौड में हुआ था। एनडीए और आईएमए में प्रशिक्षण के बाद, उन्होंने पैराट्रूपर बनने का अपना सपना पूरा किया। कैप्टन आर हर्षन को 2006 में कश्मीर में तैनात किया गया थ। 19 मार्च 2007 को कैप्टन हर्षन की यूनिट को खुफिया सूत्रों से बारामूला जिले के एक गांव में आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में जानकारी मिली। कैप्टन हर्षन ने एक तेज और साहसी कदम में आतंकवादी समूह के नेता को मार गिराया इसी दौरान उनकी गर्दन में गोली लगी और शहीद हो गए। कैप्टन हर्षन को उनके असाधारण साहस, लड़ाई की भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
वायु सेना के एयर मार्शल अर्जन सिंह का जन्म 15 अप्रैल 1919 को लायलपुर में हुआ था। 1938 में जब वे कॉलेज में थे तब उन्हें आरएएफ क्रैनवेल में एम्पायर पायलट प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के लिए चुना गया था। 01 अगस्त 1964 को अर्जन सिंह ने एयर चीफ मार्शल के पद पर वायु सेना प्रमुख का पदभार संभाला। अर्जन सिंह पहले वायु सेना प्रमुख थे जिन्होंने अपनी उड़ान श्रेणी को अपने चीफ ऑफ़ एयर स्टाफ के पद तक रखा। उनकी सेवाओं के सम्मान में, भारत सरकार ने जनवरी 2002 में अर्जन सिंह को वायु सेना के मार्शल के पद से सम्मानित किया, जिससे वह भारतीय वायु सेना के पहले और एकमात्र फाइव स्टार रैंक अधिकारी बन गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
सिपाही विक्रम सिंह का जन्म 15 मार्च 1983 को हरियाणा के रेवाड़ी में हुआ था। वे राजपूत रेजिमेंट की 17वीं बटालियन में भर्ती किया गया था जो सिपाही विक्रम को 25 अप्रैल 2014 को जम्मू और कश्मीर के शोपियां जिले के एक गांव में आतंकवाद विरोधी खोज अभियान के दौरान अंधाधुंध गोलीबारी में वीरगति को प्राप्त हो गए। ऑपरेशन के दौरान अपने कर्तव्य से परे वीरता प्रदर्शित करने के लिए उन्हें भारत के तीसरे सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया था। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
मेजर आकाश सिंह, शौर्य चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 15 अप्रैल 1975 को जम्मू में हुआ था। 04 सितम्बर 1999 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 5 मराठा लाइट इन्फेंट्री में नियुक्त किया गया । 2009 के दौरान उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर में तैनात थी और आतंकवाद विरोधी अभियानों में लगी हुई थी । 09 सितम्बर 2009 को मेंढर सेक्टर में गश्त के दौरान मेजर आकाश और उनके सैनिकों द्वारा नियंत्रण रेखा के पास कुछ सशस्त्र आतंकवादियों के एक समूह की गतिविधि देखी गयीं और वे कार्रवाई में जुट गए। आतंकवादियों को चुनौती दिए जाने पर उन्होंने सैनिकों पर गोलीबारी शुरू कर दी । इसी दौरान भारी गोलीबारी हुई जिसमें मेजर आकाश और उनके सैनिकों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया। परन्तु इसी दौरान मेजर आकाश सिंह गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। मेजर आकाश सिंह को उनके अदम्य साहस, नेतृत्व, सौहार्द और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
कैप्टन प्रदीप कुमार गौड़, महावीर चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 15 अप्रैल 1945 को हिमाचल प्रदेश के शिमला में हुआ था। वर्ष 1964 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 85 लाइट रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। बाद में वे एक हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में नियुक्त हुए । 1971 में भारत-पाक युद्ध के समय कैप्टन गौर को शकरगढ़ सेक्टर में सक्रिय 36 आर्टिलरी ब्रिगेड में तैनात किया गया । एक हेलिकॉप्टर पायलट के रूप में उन्हें दुश्मन के ठिकानों पर तोपखाने फायर का पता लगाने और निर्देशित करने का काम सौंपा गया । इस दौरान उन्होंने तोपखाने के फायर को पूरी तरह से दुश्मन के टैंकों पर निर्देशित किया जिसके परिणामस्वरूप दुश्मन के आठ टैंक नष्ट हो गए और दो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। 14 दिसम्बर 1971 को वे एक ऐसे ही मिशन पर थे। इसी दौरान दुश्मन के तीन जेट उनके करीब आ गए और उनका हेलिकॉप्टर मार गिराया और वे शहीद हो गए। कैप्टन प्रदीप कुमार गौड़ को उनकी वीरता और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के दूसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार "महावीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







