शहीद स्मारक एवं उपवन क्लब - स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविदयालय परिसर

 

आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।

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Death Anniversary Test

Major Greesh Chandra Verma VrC
DOB 1939-08-29
Martyr Battle Casualty

मेजर ग्रीश चंद्र वर्मा, "वीर चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 29 अगस्त 1939 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ था। 18 दिसम्बर 1960 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 3 डोगरा रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 1965 भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर में तैनात थी। मेजर ग्रीश चंद्र वर्मा की यूनिट को राजा और चांद टेकरी पिकेट के प्वाइंट 7702 पर कब्जा करने का काम सौंपा गया। 06 सितम्बर 1965 को सुबह 04:00 बजे स्टार्ट लाइन को पार करना था। मेजर ग्रीश चंद्र वर्मा के नेतृत्व में उनकी कंपनी ने 05:00 बजे प्वाइंट 7702 पर धावा बोल दिया। भीषण गोलीबारी के बाद दुश्मन के कुछ सैनिकों को बंकरों से खदेड़ दिया और 05:45 बजे तक पॉइंट 7702 पोस्ट पर कब्जा कर लिया। लेकिन उद्देश्य के अंतिम छोर में मेजर वर्मा के सिर में दुश्मन की गोली लगी और वे वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर ग्रीश चंद्र वर्मा को उनके अदम्य साहस, असाधारण नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए "वीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Greesh Chandra Verma VrC को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!

Lt Col Narindra Nath Khanna MVC
DOB 1982-05-20
Martyr Battle Casualty

लेफ्टिनेंट कर्नल नरेंद्र नाथ खन्ना, "महावीर चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 20 मई 1928 को लरकाना (अब पाकिस्तान में है) में हुआ था। 12 सितम्बर 1948 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें सिख रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 1965 में लेफ्टिनेंट कर्नल खन्ना ने 2 सिख रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर का कार्यभार संभाला और 1965 के युद्ध के दौरान उरी सेक्टर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 06 सितम्बर 1965 को उनकी यूनिट को दुश्मन की राजा पिकेट पर हमला करने का काम सौंपा गया। उन्होंने सुबह 0400 बजे पिकेट पर हमला शुरू कर दिया। जैसे ही उन्होंने स्टार्ट लाइन पार की उनकी दो टुकड़ियां विनाशकारी गोलीबारी की चपेट में आ गईं और उन्हें दुश्मन की सेना के कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा । इस बीच ग्रेनेड के स्प्लिंटर से लेफ्टिनेंट कर्नल खन्ना के दाहिने कंधे में चोट लग गई। परन्तु वे अपने जवानों के साथ आगे बढे और खुद हमले का नेतृत्व किया। इसी दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल खन्ना के पेट में गोली लग गई और वे गंभीर रूप से घायल हो गए। परंतु उन्होंने अपने उद्देश्य पर कब्ज़ा कर लिया और घायल होने के कारण शहीद हो गए। लेफ्टिनेंट कर्नल नरेंद्र नाथ खन्ना को उनके उत्कृष्ट साहस, अटूट नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के दूसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार "महावीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lt Col Narindra Nath Khanna MVC को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!

Birth Anniversary


Major James Thomas KC
DOB 1976-09-06
Martyr Battle Casualty

मेजर जेम्स थॉमस, "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 06 सितंबर 1976 को हुआ था और वह राजस्थान के बीकानेर के रहने वाले थे। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद वे सेना में शामिल हुए और उन्हें सिख लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट के 10 सिख एलआई में नियुक्त किया गया। 2005 के दौरान उनकी यूनिट को जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में तैनात किया गया जो लगातार आतंकवाद विरोधी अभियानों में लगी हुई थी। 27 जनवरी 2006 को यूनिट को खुफिया सूत्रों से उसके जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में आतंकवादियों द्वारा घुसपैठ के बारे में जानकारी मिली। मेजर जेम्स थॉमस को घुसपैठ के खतरे को बेअसर करने के लिए ऑपरेशन का नेतृत्व करने का काम सौंपा गया था। 28 जनवरी 2006 को 02:30 बजे मेजर जेम्स ने देखा कि आतंकवादियों का एक समूह घात लगाकर दाहिनी ओर घुसपैठ करने का प्रयास कर रहा है। पीछे की ओर अपने सैनिकों के लिए आसन्न खतरे को महसूस करते हुए, मेजर जेम्स घुसपैठ कर रहे आतंकवादियों को रोकने के लिए आगे बढ़े, ग्रेनेड फेंके और उन्हें भीषण गोलाबारी में उलझा दिया। अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए, मेजर जेम्स अकेले ही चार आतंकवादियों को मारने में सफल रहे। हालाँकि इस भारी गोलाबारी के दौरान मेजर जेम्स गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गये। मेजर जेम्स थॉमस को उनके असाधारण साहस, अडिग लड़ाई की भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major James Thomas KC को उनकी जयंती पर नमन!

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Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.

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Gallery - Glimpses of remembering the Bravehearts!

Lets salute the martyrs for the sacrifices they made and thank them for saving our freedom.

Pricing -Membership Plans

General (सामान्य सदस्यता)

  • सदस्यों को यह अधिकार होगा कि वह शहीद उपवन में निःशुल्क प्रवेश कर सकें एवं भ्रमण कर सकें।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की कैन्टीन में 10 प्रतिशत छूट के साथ भोज्य पदार्थ उपलब्ध होंगे।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की दुकान पर उपलब्ध सामग्री 10 प्रतिशत छूट के साथ उपलब्ध होगी।
  • सदस्यों को मार्स रिसोर्ट्स हाॅटल तस्मय भोजनालय में 10 प्रतिशत छूट की दर से भोज्य उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • सभी सदस्यों को शहीदों एवं महापुरूषों की जयन्ती, पुण्यतिथि एवं विशिष्ट तिथियों को स्मरण कराने हेतु सूचनाएँ भेजी जाएंगी ताकि उन सूचनाओं से अपने परिवार के युवाओं, बच्चों को संस्कारित कर सकें एवं अपने मित्रों को भी सूचना दे सकें।
Rs.1,000 (Annually)
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Amazing place

Amazing place. Gives a sense of patriotism in yourself once you visit the Subharti Shaheed Smarak & Upwan.

Mukul Aggarwal

Visitor

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Magnificent Place

This magnificent place is situated at Subharti University Campus and it is especially filled with the spirit of national pride.

Sara Khan

Visitor

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Feel of Patriotism

There are many more stories regarding the patriotism of Indian people & many more monuments to glorify that too. Standing at this place all those stories made me remember how privileged & honored the Indians feel when it comes to talk about their patriotism.

Sagar Kumar

Visitor

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