आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | 1997-10-24 |
| Martyr | Battle Casualty |
राइफलमैन वरुण काटल का जन्म जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले की राजपुरा तहसील के मावा गांव में हुआ था । वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 8 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री में नियुक्त किया गया। नवम्बर 2018 के दौरान उनकी यूनिट लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल के पास सुंदरबनी सेक्टर में तैनात थी। यह क्षेत्र बहुत अशांत और अस्थिर था क्योंकि पाकिस्तानी सेनाएं अक्सर सीमा पार से अकारण गोलीबारी करती रहती थी । 10 नवम्बर 2018 को राइफलमैन वरुण काटल सुंदरबनी सेक्टर की अग्रिम चौकियों में से एक पर तैनात थे। उसी दिन सुंदरबनी सेक्टर के खौर इलाके में पाकिस्तानी सेना द्वारा अकारण संघर्ष विराम का उल्लंघन शुरू किया गया जिसका भारतीय सेना ने मुँह तोड़ जवाब दिया। परन्तु फायरिंग के दौरान राइफलमैन वरुण काटल गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। राइफलमैन वरुण काटल एक बहादुर और समर्पित सैनिक थे जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Rifleman Varun Katal को उनकी जयंती पर नमन!
| DOB | 1973-10-24 |
| Martyr | Battle Casualty |
कैप्टन पीवी विक्रम, सेना मेडल (मरणोपरांत) का जन्म 24 अक्टूबर 1973 को केरल के कोझिकोड जिले के मनारी हाउस पन्नियंकारा, कल्लाई में हुआ था। 8 जून 1996 को उनको 141 फील्ड रेजिमेंट में कमीशन मिला। 02 जून 1999 को वे जाट रेजिमेंट की चौथी बटालियन के प्रत्यक्ष समर्थन का कार्य कर रहे थे। इसी दौरान एक मोर्टार शेल कैप्टन विक्रम के बहुत करीब आकर गिरा। कैप्टन विक्रम गंभीर रूप से घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हो गए । कैप्टन विक्रम को भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं में उनके साहस, अदम्य भावना और बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "सेना मेडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Capt Pannikot Vishwanath Vikram SM को उनकी जयंती पर नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







