शहीद स्मारक एवं उपवन क्लब - स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविदयालय परिसर

 

आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।

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15 अक्टूबर 2021 को 48 राष्ट्रीय राइफल्स के सूबेदार अजय सिंह रौतेला व नायक हरेंद्र सिंह जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में एक सफल ऑपरेशन के दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए। दोनों ने मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से सूबेदार अजय सिंह रौतेला व नायक हरेंद्र सिंह को उनकी पुण्यतिथि पर नमन! पर नमन !

Birth Anniversary


CAPT ASHUTOSH KUMAR- SC
DOB 1996-10-15
Martyr Battle Casualty

कैप्टन आशुतोष कुमार, शौर्य चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 15 अक्टूबर 1996 को बिहार के मधेपुरा जिले के परमानपुर गांव में हुआ था। जून 2018 में 21 साल की उम्र में आईएमए देहरादून से लेफ्टिनेंट के रूप में पास आउट हुए और उन्हें 18 मद्रास रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। नवम्बर 2020 के दौरान कैप्टन आशुतोष कुमार की यूनिट को नियंत्रण रेखा के करीब जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में तैनात किया गया जो नियमित आधार पर आतंकवाद विरोधी अभियानों में लगी हुई थी। 08 नवम्बर 2020 को बीएसएफ के गश्ती दल द्वारा लगभग 0100 बजे एलओसी से लगभग 3.5 किलोमीटर दूर घुसपैठ विरोधी बाधा प्रणाली के पास घुसपैठ की कोशिश की सूचना मिली। आशुतोष कुमार और उनकी यूनिट ने घुसपैठ कर रहे आतंतवादियो को मार गिराया। लेकिन लगभग 1020 बजे पुनः भीषण मुठभेड़ हुई जिसमे तीन आतंकवादियों को मार गिराया। हलाकि इस दौरान कैप्टन आशुतोष कुमार और दो अन्य सैनिक को गोलियां लगीं और वे गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गये। कैप्टन आशुतोष कुमार को उनकी सराहनीय बहादुरी, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से CAPT ASHUTOSH KUMAR- SC को उनकी जयंती पर नमन!

Capt Suraj Sharma
DOB 1975-10-15
Martyr Battle Casualty

कैप्टन सूरज शर्मा का जन्म 15 अक्टूबर 1975 को पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में हुआ था। जून 1998 में वे भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट हुए और उन्हें 2 पैराशूट रेजिमेंट (एस ऍफ़) में नियुक्त किया गया। जुलाई 2001 के दौरान उनकी यूनिट को "ऑपरेशन रक्षक" के हिस्से के रूप में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर में तैनात किया गया। 08 जुलाई 2001 को उनकी यूनिट ने कुपवाड़ा जिले के राजवार जंगल में एक तलाशी अभियान शुरू किया। कैप्टन सूरज शर्मा को 20 सैनिकों की एक टीम के साथ उस ऑपरेशन का नेतृत्व करने का काम सौंपा गया था। जब सैनिकों द्वारा तलाशी अभियान जारी था तभी छिपे हुए आतंकवादियों ने सैनिकों पर गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई जिसमें कैप्टन सूरज शर्मा को गोलियां लगीं और वे शहीद हो गए। कैप्टन सूरज शर्मा एक प्रतिबद्ध सैनिक और साहसी अधिकारी थे जिन्होंने आगे बढ़कर नेतृत्व किया और अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Capt Suraj Sharma को उनकी जयंती पर नमन!

Lt Cdr Firdaus Darabshah Mogal SC
DOB 1974-10-15
Martyr Battle Casualty

लेफ्टिनेंट कमांडर फिरदौस दराबशाह मोगल, "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 15 अक्टूबर 1974 को गुजरात के अहमदाबाद में हुआ था। 01 जनवरी 1998 को वे नौसेना में शामिल हुए और उन्हें नौसेना की पनडुब्बी शाखा में नियुक्त किया गया। लेफ्टिनेंट कमांडर मोगल ने 26 मई 2010 को नौसेना की पनडुब्बी आईएनएस शंकुश के कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्यभार संभाला। 29 अगस्त 2010 को जब पनडुब्बी तैनाती के रास्ते में थी तो एक खराबी देखी गई। 30 अगस्त 2010 को जब इंजीनियरिंग अधिकारी के नेतृत्व में तीन नाविकों की एक टीम खराबी को ठीक करने के लिए आवरण पर थी तो एक मजबूत लहर उनमें से दो इंजीनियरिंग अधिकारियों को बहा ले गई। इसी दौरान लेफ्टिनेंट कमांडर मोगल इंजीनियरिंग अधिकारी एवं अपने साथियों को बचाने में जुट गए। उन्होंने अपने जहाज के छह साथियों की जान बचा ली लेकिन खुद वीरगति को प्राप्त हो गए। लेफ्टिनेंट कमांडर मोगल को भारतीय नौसेना की सर्वोच्च परंपराओं में कर्तव्य, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान और वीरतापूर्ण कार्य के लिए "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lt Cdr Firdaus Darabshah Mogal SC को उनकी जयंती पर नमन!

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Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.

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Gallery - Glimpses of remembering the Bravehearts!

Lets salute the martyrs for the sacrifices they made and thank them for saving our freedom.

Pricing -Membership Plans

General (सामान्य सदस्यता)

  • सदस्यों को यह अधिकार होगा कि वह शहीद उपवन में निःशुल्क प्रवेश कर सकें एवं भ्रमण कर सकें।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की कैन्टीन में 10 प्रतिशत छूट के साथ भोज्य पदार्थ उपलब्ध होंगे।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की दुकान पर उपलब्ध सामग्री 10 प्रतिशत छूट के साथ उपलब्ध होगी।
  • सदस्यों को मार्स रिसोर्ट्स हाॅटल तस्मय भोजनालय में 10 प्रतिशत छूट की दर से भोज्य उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • सभी सदस्यों को शहीदों एवं महापुरूषों की जयन्ती, पुण्यतिथि एवं विशिष्ट तिथियों को स्मरण कराने हेतु सूचनाएँ भेजी जाएंगी ताकि उन सूचनाओं से अपने परिवार के युवाओं, बच्चों को संस्कारित कर सकें एवं अपने मित्रों को भी सूचना दे सकें।
Rs.1,000 (Annually)
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Amazing place

Amazing place. Gives a sense of patriotism in yourself once you visit the Subharti Shaheed Smarak & Upwan.

Mukul Aggarwal

Visitor

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Magnificent Place

This magnificent place is situated at Subharti University Campus and it is especially filled with the spirit of national pride.

Sara Khan

Visitor

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Feel of Patriotism

There are many more stories regarding the patriotism of Indian people & many more monuments to glorify that too. Standing at this place all those stories made me remember how privileged & honored the Indians feel when it comes to talk about their patriotism.

Sagar Kumar

Visitor

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