आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
Read More
| DOB | |
| Martyr | Battle Casualty |
लेफ्टिनेंट रविंदर चिकारा कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) का जन्म हरियाणा के खीरी आसरा गांव में हुआ था। 12 दिसंबर 1998 को वे भारतीय सेना में शामिल हुए और उन्हें 6 ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। वर्ष 2000 के दौरान उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर में तैनात थी। 19 जुलाई 2000 को लेफ्टिनेंट चिकारा को एक संयुक्त तलाशी अभियान शुरू करने की जिम्मेदारी दे गयी । इसी दौरान उनकी आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ हो गयी । लेफ्टिनेंट रविंदर चिकारा और उनकी टीम ने छह विदेशी भाड़े के उग्रवादियों को मार गिराया और भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया । परन्तु इसी बीच वे मुठभेड़ में घायल हुए और शहीद हो गए। लेफ्टिनेंट रविंदर चिकारा को उनकी बहादुरी के लिए कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय की ओर से लेफ्टिनेंट रविंदर चिकारा कीर्ति चक्र मरणोपरांत को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1966-11-12 |
| Martyr | Battle Casualty |
सेकेंड लेफ्टिनेंट राजीव संधू, महावीर चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 12 नवंबर 1966 को चंडीगढ़ में हुआ था। 05 मार्च 1988 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 7 असम रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 1988 के दौरान वे श्रीलंका में ऑपरेशन पवन में तैनात थे और 19 मद्रास की एक कंपनी के साथ कार्यरत थे। 19 जुलाई 1988 को सेकंड लेफ्टिनेंट राजीव संधू कुछ छोटी गाड़ियों के काफिले का नेतृत्व कर रहे थे। जैसे ही काफिला जंगल से गुजरा आतंकवादियों ने उनपर हमला कर दिया। इसी दौरान वे घायल को गए लेकिन इसी अवस्था में उन्होंने आतंकवादियों के एक सेक्टर कमांडर को मार गिराया और बाकि आतंकवादियों को मारे गए उग्रवादियों के शव और अपने हथियार और गोला-बारूद छोड़कर भागने के लिए मजबूर कर दिया। लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के कारण वे शहीद हो गए । 26 मार्च 1990 को उन्हें महावीर चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय की ओर से सेकेंड लेफ्टिनेंट राजीव संधू, महावीर चक्र (मरणोपरांत) को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1956-07-31 |
| Martyr | Battle Casualty |
स्क्वाड्रन लीडर भानु प्रताप पचौरी का जन्म 31 जुलाई 1956 को उत्तर प्रदेश में हुआ था। 1980 में वे भारतीय वायु सेना में एक लड़ाकू पायलट के रूप में नियुक्त हुए और उन्हें हाशिमारा के वायु सेना बेस पर तैनात किया गया। 1994 के दौरान स्क्वाड्रन लीडर पचौरी पंजाब में वायु सेना बेस पठानकोट में स्थित 26 स्क्वाड्रन में कार्यरत थे। 19 जुलाई 1994 को योजना के अनुसार उन्होंने मिग-21 ट्रेनर में उड़ान भरी। कुछ समय बाद उनका संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल से टूट गया और उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और वे शहीद हो गए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय की ओर से स्क्वाड्रन लीडर भानु प्रताप पचौरी को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







