आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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Rifleman Rabin Sharma SM स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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Havaldar Damar Bahadur Pun SM स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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Havaldar Giris Gurung KC स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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सेकेंड लेफ्टिनेंट ऋषि अशोक मल्होत्रा, कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 13 दिसम्बर 1971 को राजस्थान के भरतपुर जिले में हुआ था । 11 दिसम्बर 1993 को वे भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से पास आउट हुए और उन्हें 8 मराठा लाइट इन्फैंट्री में नियुक्त किया गया। मई 1994 के दौरान उनकी यूनिट कश्मीर घाटी में तैनात थी । यूनिट की जिम्मेदारी का क्षेत्र आतंकवाद से पीड़ित था इसलिए यूनिट के सैनिकों को नियमित आधार पर उग्रवाद विरोधी अभियान चलाने पड़ते थे। 18 मई 1994 को उनकी यूनिट की जिम्मेदारी के क्षेत्र में कुछ आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में खुफिया स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर सेकेंड लेफ्टिनेंट ऋषि अशोक मल्होत्रा के नेतृत्व में एक खोज और विनाश अभियान शुरू किया गया । सेकेंड लेफ्टिनेंट ऋषि अपने साथियों के साथ संदिग्ध क्षेत्र में पहुंचे और 20 मई 1994 की सुबह एक खोज और घेराबंदी अभियान शुरू किया। इसी दौरान दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई जिसमें सेकेंड लेफ्टिनेंट ऋषि और उनके साथियों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया परन्तु सेकेंड लेफ्टिनेंट ऋषि गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। सेकेंड लेफ्टिनेंट ऋषि अशोक मल्होत्रा को उनके साहस, अदम्य लड़ाई की भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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नायक दीपक नैनवाल उत्तराखंड के चमोली जिले के कांचुला गांव के रहने वाले थे। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद भारतीय सेना के प्रसिद्ध महार रेजिमेंट की 1 महार रेजिमेंट में नियुक्त हुए। कुछ समय पश्चात् उन्हें जम्मू-कश्मीर में तैनात 1 आरआर बटालियन में नियुक्त किया गया। 10 अप्रैल 2018 को एक खुफिया सूत्र के आधार पर सुरक्षा बलों की ओर से आतंकियों को खदेड़ने के लिए 1 आरआर बटालियन, जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम द्वारा रात करीब 11:30 बजे अभियान शुरू किया गया। 11 अप्रैल 2018 की सुबह तक 12 घंटे से अधिक समय तक गोलीबारी जारी रही। भारी गोलीबारी के दौरान नायक दीपक नैनवाल को रीढ़ की हड्डी में गोली लग गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गए और 20 मई 2018 को वीरगति को प्राप्त हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह शेखावत, परमवीर चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 20 मई 1918 को राजस्थान के चुरू जिले के रामपुरा बेरी गांव में हुआ था। 18 वर्ष की आयु में वे सेना में शामिल हुए। प्रारंभ में उन्हें पंजाब रेजिमेंट के 51 पंजाब में तैनात किया गया लेकिन 1947 में द्वितीय विश्व युद्ध और भारतीय सेना के पुनर्गठन के बाद सीएचएम पीरू सिंह को राजपूताना राइफल्स के 6 राजपूताना राइफल्स में भेज दिया गया था। 1948 में जम्मू और कश्मीर ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तानी हमलावरों ने कश्मीर की पहाड़ियों में स्थित टिथवाल गांव पर कब्जा कर लिया था। आक्रमण 11 जुलाई को शुरू हुआ और 15 जुलाई तक चला। इसी दौरान सीएचएम पीरू सिंह घायल हो गए लेकिन उन्होंने बहादुरी और निस्वार्थ भाव से अपना मिशन पूरा किया लेकिन वे स्वयं वीरगति को प्राप्त हो गये। अपनी मातृभूमि के प्रति गहन वीरता, अत्यधिक समर्पण और आत्म-बलिदान के लिए सीएचएम पीरू सिंह को देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
लेफ्टिनेंट कर्नल नरेंद्र नाथ खन्ना, महावीर चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 20 मई 1928 को लरकाना (अब पाकिस्तान में है) में हुआ था। 12 सितम्बर 1948 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें सिख रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 1965 में लेफ्टिनेंट कर्नल खन्ना ने 2 सिख रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर का कार्यभार संभाला और 1965 के युद्ध के दौरान उरी सेक्टर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 06 सितम्बर 1965 को उनकी यूनिट को दुश्मन की राजा पिकेट पर हमला करने का काम सौंपा गया। उन्होंने सुबह 0400 बजे पिकेट पर हमला शुरू कर दिया। जैसे ही उन्होंने स्टार्ट लाइन पार की उनकी दो टुकड़ियां विनाशकारी गोलीबारी की चपेट में आ गईं और उन्हें दुश्मन की सेना के कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा । इस बीच ग्रेनेड के स्प्लिंटर से लेफ्टिनेंट कर्नल खन्ना के दाहिने कंधे में चोट लग गई। परन्तु वे अपने जवानों के साथ आगे बढे और खुद हमले का नेतृत्व किया। इसी दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल खन्ना के पेट में गोली लग गई और वे गंभीर रूप से घायल हो गए। परंतु उन्होंने अपने उद्देश्य पर कब्ज़ा कर लिया और घायल होने के कारण शहीद हो गए। लेफ्टिनेंट कर्नल नरेंद्र नाथ खन्ना को उनके उत्कृष्ट साहस, अटूट नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के दूसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार "महावीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
कर्नल विप्लव त्रिपाठी का जन्म 20 मई 1980 को छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हुआ था । वर्ष 2003 में वे भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से पास आउट हुए और उन्हें कुमाऊं रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। नवम्बर 2021 के दौरान कर्नल विप्लव त्रिपाठी 46 असम राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में कार्यरत थे जिन्हें "ऑपरेशन हिफ़ाज़त" के हिस्से के रूप में उग्रवाद विरोधी अभियानों के लिए मणिपुर में तैनात किया गया । 13 नवम्बर 2021 को वे भारत-म्यांमार सीमा के पास बेहियांग क्षेत्र में अपनी यूनिट के फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस के दौरे के बाद त्वरित प्रतिक्रिया दल के जवानों के साथ अपने बटालियन मुख्यालय लौट रहे थे इसी बीच में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और मणिपुर नागा पीपुल्स फ्रंट के उग्रवादियों ने उन पर अचानक हमला कर दिया। जिससे सैनिकों को कोई कार्रवाई करने का समय नहीं मिला और गोलीबारी में कर्नल विप्लव त्रिपाठी गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। कर्नल विप्लव त्रिपाठी एक वीर सैनिक और अच्छे अधिकारी थे जिन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अपने प्राण नयोछावर कर दिए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







