आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | 1988-09-05 |
| Martyr | Battle Casualty |
लांस नायक संदीप सिंह, "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म पंजाब के गुरदासपुर जिले के कोटला खुर्द गांव में हुआ था । वर्ष 2007 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 4 पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फाॅर्स) में नियुक्त किया गया। 2018 के दौरान उनकी यूनिट आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में तैनात थी । 22 सितम्बर 2018 को सीमा पार से आतंकवादियों द्वारा कुपवाड़ा सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश की गई । 4 पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फाॅर्स) का गश्ती दल जिसमें लांस नायक संदीप सिंह शामिल थे आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई में जुट गए। इसी दौरान भीषण मुठभेड़ हुई और यह ऑपरेशन 24 सितम्बर 2018 तक चला जिसमें पांच घुसपैठियों को मार गिराया परन्तु लांस नायक संदीप सिंह गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए । लांस नायक संदीप सिंह को उनके सराहनीय साहस, बहादुरी और सर्वोच्च बलिदान के लिए "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lance Naik Sandeep Singh SC को उनकी जयंती पर नमन!
| DOB | 1969-09-05 |
| Martyr | Battle Casualty |
मेजर इंद्रजीत सिंह बब्बर, "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 05 सितम्बर 1969 को जम्मू में हुआ था। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 14 फील्ड रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 2003 के दौरान उनकी यूनिट को असम के दरांग जिले में उग्रवाद विरोधी अभियानों के लिए तैनात किया गया। 17 जून 2003 को खुफिया स्रोतों के आधार पर उनकी यूनिट ने एक ऑपरेशन शुरू किया जिसका नेतृत्व मेजर इंद्रजीत सिंह बब्बर को सौंपा गया। इसी दौरान दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई जिसमें मेजर इंद्रजीत सिंह बब्बर और उनके सैनिकों ने तीन आतंकवादियों को मार गिराया लेकिन मुठभेड़ के दौरान मेजर बब्बर गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर इंद्रजीत सिंह बब्बर को उनके अदम्य साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Maj Inderjeet Singh Babbar को उनकी जयंती पर नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







