शहीद स्मारक एवं उपवन क्लब - स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविदयालय परिसर

 

आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।

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Death Anniversary Test

Lance Naik Mohan Nath Goswami AC
DOB
Martyr Battle Casualty

लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी, "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म उत्तराखंड के नैनीताल जिले के लालकुआं गांव में हुआ था। 2002 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 9 पैराशूट रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 2015 के दौरान उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा जिले में आतंकवादियों की तलाश के लिए तैनात थी। 03 सितंबर 2015 को खुफिया सूत्रों के आधार पर घुसपैठियों से निपटने के लिए एक ऑपरेशन चलाया गया जिसका लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी हिस्सा थे। भारतीय सेना के चुनौती दिए जाने पर आतंकवादियों ने उन पर गोलीबारी कर दी। इस गोलीबारी के दौरान लांस नायक गोस्वामी को दो गोलियां लगीं और वे वीरगति को प्राप्त हो गए। लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी को उनकी बहादुरी और अपार साहस के लिए देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lance Naik Mohan Nath Goswami AC को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!

Lt Amit Singh
DOB 1979-06-28
Martyr Battle Casualty

लेफ्टिनेंट अमित सिंह बिहार के समस्तीपुर जिले के हरपुर महमादा गांव के निवासी थे और उनका जन्म 28 जून 1979 को हुआ था। उन्होंने 1996 में खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रवेश लिया और 1999 में उत्तीर्ण हुए। इसके बाद उन्होंने आगे की ट्रेनिंग के लिए आईएमए देहरादून में दाखिला लिया और 3 जून 2000 को 20 वर्ष की आयु में उन्हें 9 गोरखा राइफल्स रेजिमेंट की 'प्रथम बटालियन' में लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन प्राप्त हुआ। वर्ष 2000 में, लेफ्टिनेंट अमित सिंह की यूनिट 1/9 जीआर को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में "ऑपरेशन रक्षक" के अंतर्गत तैनात किया गया था। यह क्षेत्र घुसपैठ के प्रति भी संवेदनशील था, जिसके कारण सीमा पार से किसी भी घुसपैठ को रोकने के लिए नियमित सशस्त्र गश्त आवश्यक थी। खुफिया सूत्रों के आधार पर, 3 सितंबर 2000 को कुपवाड़ा के पंजगाम के घने जंगलों में एक ऑपरेशन की योजना बनाई गई। लेफ्टिनेंट अमित सिंह और उनके साथी योजना के अनुसार संदिग्ध क्षेत्र में पहुंचे और उसे घेर लिया। जल्द ही सैनिकों का आतंकवादियों से सामना हुआ, जिन्होंने चुनौती दिए जाने पर उन पर गोलीबारी की। इसके बाद हुई गोलीबारी में लेफ्टिनेंट अमित सिंह को कई गोलियां लगीं और वे गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। लेफ्टिनेंट अमित सिंह एक वीर सैनिक और साहसी अधिकारी थे, जिन्होंने 21 वर्ष की आयु में देश की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दे दी। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lt Amit Singh को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!

Birth Anniversary


Major Yashen Ramesh Acharya
DOB 1967-09-03
Martyr Battle Casualty

मेजर यशेन रमेश आचार्य, "सेना मेडल" (मरणोपरांत) का जन्म 03 सितम्बर 1967 को महाराष्ट्र के मुंबई में हुआ था। वर्ष 1992 में वे सेना में शामिल में हुए और उन्हें 6 राजपूत रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। वर्ष 2003 के दौरान उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में तैनात थी और नियमित आधार पर आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में लगी हुई थी। 07 फरवरी 2003 को खुफ़िआ जानकारी के आधार पर उनकी यूनिट ने आतंकवादियों के खिलाफ एक ऑपरेशन शुरू किया जिसका नेतृत्व मेजर यशेन को सौंपा गया। मेजर यशेन अपने सैनिकों के साथ तुरंत कार्रवाई में जुट गए और संदिग्ध इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी। सैनिकों द्वारा आतंकवादियों को चुनौती दिए जाने पर आतंकवादियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी। इसी दौरान दोनों ओर से भीषण गोलीबारी हुई जिसमें मेजर यशेन गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर यशेन रमेश आचार्य को उनके अनुकरणीय साहस, अटल नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "सेना मेडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Yashen Ramesh Acharya को उनकी जयंती पर नमन!

NK BHANWAR SINGH
DOB 1977-09-03
Martyr Battle Casualty

नायक भंवर सिंह का जन्म 3 सितंबर 1977 को राजस्थान के नागौर जिले की जयल तहसील के हीरासानी गांव में हुआ था। 10 दिसंबर 1994 को वे सेना में भर्ती हुए वे उन्हें पैराशूट रेजिमेंट की 7वीं पैरा बटालियन में कमीशन प्राप्त हुआ। 1999 में कारगिल ऑपरेशन के दौरान, उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर में तैनात थी तथा "ऑपरेशन विजय" का हिस्सा थी। जून 1999 में योजना के अनुसार, नायक भंवर सिंह और उनके साथियों ने किरदी और केल नालों के बीच प्वाइंट 4700 के दक्षिण से अभियान शुरू किया। हलाकि इसी दौरान दुश्मन सेना के साथ भीषण गोलीबारी में नायक भंवर सिंह गंभीर रूप से घायल और 10 जुलाई 1999 को वीरगति को प्राप्त हो गये। नायक भंवर सिंह एक बहादुर और समर्पित सैनिक थे जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से NK BHANWAR SINGH को उनकी जयंती पर नमन!

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Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.

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Gallery - Glimpses of remembering the Bravehearts!

Lets salute the martyrs for the sacrifices they made and thank them for saving our freedom.

Pricing -Membership Plans

General (सामान्य सदस्यता)

  • सदस्यों को यह अधिकार होगा कि वह शहीद उपवन में निःशुल्क प्रवेश कर सकें एवं भ्रमण कर सकें।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की कैन्टीन में 10 प्रतिशत छूट के साथ भोज्य पदार्थ उपलब्ध होंगे।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की दुकान पर उपलब्ध सामग्री 10 प्रतिशत छूट के साथ उपलब्ध होगी।
  • सदस्यों को मार्स रिसोर्ट्स हाॅटल तस्मय भोजनालय में 10 प्रतिशत छूट की दर से भोज्य उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • सभी सदस्यों को शहीदों एवं महापुरूषों की जयन्ती, पुण्यतिथि एवं विशिष्ट तिथियों को स्मरण कराने हेतु सूचनाएँ भेजी जाएंगी ताकि उन सूचनाओं से अपने परिवार के युवाओं, बच्चों को संस्कारित कर सकें एवं अपने मित्रों को भी सूचना दे सकें।
Rs.1,000 (Annually)
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Amazing place

Amazing place. Gives a sense of patriotism in yourself once you visit the Subharti Shaheed Smarak & Upwan.

Mukul Aggarwal

Visitor

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Magnificent Place

This magnificent place is situated at Subharti University Campus and it is especially filled with the spirit of national pride.

Sara Khan

Visitor

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Feel of Patriotism

There are many more stories regarding the patriotism of Indian people & many more monuments to glorify that too. Standing at this place all those stories made me remember how privileged & honored the Indians feel when it comes to talk about their patriotism.

Sagar Kumar

Visitor

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