आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | |
| Martyr | Battle Casualty |
राइफलमैन शिव कुमार "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले की किश्तवार तहसील के करूर गांव के निवासी थे। 2005 में वे सेना में भर्ती हुए हुए और उन्हें लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट की 15 जेएके एलआई में भर्ती किया गया। 2018 के दौरान, राइफलमैन शिव कुमार की यूनिट जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा क्षेत्र में तैनात थी और नियमित रूप से आतंकवादियों के खिलाफ अभियानों में लगी हुई थी। 30 अगस्त 2018 को, सुरक्षा बलों को खुफिया सूत्रों से सूचना मिली कि कुछ आतंकवादी नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार से घुसपैठ कर चुके हैं। 31 आरआर और 27 आरआर के जवानों द्वारा एक व्यापक घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाया गया। आतंकवादियों से मुठभेड़ हुई, जिन्होंने चुनौती दिए जाने पर सैनिकों पर गोलीबारी की। भीषण गोलीबारी में तीन आतंकवादी मारे गए। हालांकि, इस दौरान राइफलमैन शिव कुमार गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। राइफलमैन शिव कुमार को उनके अदम्य साहस, वीरता और सर्वोच्च बलिदान के लिए "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Rifleman Shive Kumar SC को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!
| DOB | 1976-08-31 |
| Martyr | Battle Casualty |
कैप्टन अमित वर्मा का जन्म 31 अगस्त 1976 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। जून 1997 में उन्हें सेना की 9 महार में नियुक्त किया गया। 04 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान उन्हें अपने सैनिकों के साथ एक दुश्मन की पोस्ट पर क़ब्ज़ा करने का काम सौंपा गया। योजना के अनुसार कैप्टन अमित वर्मा और उनके सैनिक दुश्मन के बंकर पर कब्ज़ा करने के लिए आगे बढ़े तो उन पर भारी गोलीबारी हुई जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। कैप्टन अमित वर्मा एक समर्पित सैनिक और उत्कृष्ट अधिकारी थे, जिन्होंने 23 वर्ष की आयु में राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दे दिया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Capt Amit Verma को उनकी जयंती पर नमन!
| DOB | 1949-08-31 |
| Martyr | Battle Casualty |
सेकंड लेफ्टिनेंट करुण कांति मजूमदार का जन्म 31 अगस्त 1949 को राजस्थान के जोधपुर में हुआ था। 08 दिसंबर 1969 को वे भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से पास आउट हुए और उन्हें 10 बिहार रेजिमेंट में नियुक्त किया गया । 1971 भारत-पाक युद्ध के दौरान उनकी यूनिट पूर्वी सेक्टर में तैनात थी। 01 दिसंबर 1971 को उनकी यूनिट ने अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार की और दुश्मन को घेरना शुरू कर दिया। मुख्य हमला 04 दिसंबर 1971 को शुरू किया गया। 10 बिहार रेजिमेंट के सैनिकों जिसमें सेकंड लेफ्टिनेंट करुण कांति मजूमदार शामिल थे। उनकी यूनिट को अखौरा रेल जंक्शन पर कब्ज़ा करना था। हमले के दौरान दोनों और से हुई भीषण गोलीबारी में सेकंड लेफ्टिनेंट मजूमदार गंभीर रूप से घायल हुए और 05 दिसंबर 1971 को वीरगति को प्राप्त हो गये। सेकेंड लेफ्टिनेंट मजूमदार एक वीर सैनिक और साहसी अधिकारी थे जिन्होंने आगे बढ़कर नेतृत्व किया और 22 साल की उम्र में अपने कर्तव्य का पालन करते हुए राष्ट्र की सेवा में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से 2nd Lt KK Majumdar को उनकी जयंती पर नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







