शहीद स्मारक एवं उपवन क्लब - स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविदयालय परिसर

 

आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।

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Death Anniversary Test

Lt Navdeep Singh AC
DOB 1985-06-08
Martyr

लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह, "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) पंजाब के गुरदासपुर जिले के रहने वाले थे और उनका जन्म 08 जून 1985 को हुआ था। 2010 में उन्हें सेना आयुध कोर में नियुक्त किया गया और अटैचमेंट के लिए 15 मराठा लाइट इन्फैंट्री में उनकी नियुक्ति हुई।उनकी यूनिट आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू और कश्मीर में तैनात थी। 19 अगस्त 2011 को लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह की यूनिट को सूचना मिली कि 17 कट्टर आतंकवादियों के एक समूह ने गुरेज़ सेक्टर में भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की है। लेफ्टिनेंट नवदीप ने संभावित घुसपैठ मार्ग का अनुमान लगाया और सैनिकों को सामरिक रूप से तैनात किया। ऑपरेशन के दौरान उनकी टीम ने 12 आतंकवादियों को मार गिराया गया और घुसपैठ की कोशिश को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया गया। लेकिन वे ऑपरेशन के दौरान घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हो गए। लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह को उनके असाधारण साहस, अदम्य भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lt Navdeep Singh AC को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!

Birth Anniversary


Rifleman Jaswant Singh Rawat MVC
DOB 1941-08-19
Martyr Battle Casualty

राइफलमैन जसवन्त सिंह रावत, "महावीर चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 19 अगस्त 1941 को उत्तराखंड के पौडी गढ़वाल जिले के बरयूं गांव में हुआ था। 19 अगस्त 1960 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 4 गढ़वाल राइफल्स में तैनात किया गया। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान उनकी यूनिट नेफा क्षेत्र में तैनात थी। जब उनकी यूनिट को नूरानांग की लड़ाई से वापस लौटने का आदेश दिया गया तो राइफलमैन जसवन्त सिंह रावत ने युद्ध का मैदान छोड़ने से इनकार कर दिया और आखिरी दम तक साहसपूर्वक लड़ते रहे और 17 नवम्बर 1962 को वीरगति को प्राप्त हो गए| उनकी साहसिक कार्रवाई ने लड़ाई का रुख बदल दिया और चीनी पीछे हट गए। इसी के साथ चीन को अपने 300 सैनिकों की हानि उठानी पड़ी। राइफलमैन जसवंत सिंह को उनकी असाधारण बहादुरी, अडिग लड़ाई की भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए "महावीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। इनकी बहादुरी का उल्लेख स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्विधालय के शहीद स्मारक में नूरानांग की लड़ाई नामक बोर्ड में किया गया है। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Rifleman Jaswant Singh Rawat MVC को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!

Major Narain Singh VrC
DOB 1936-08-19
Martyr

मेजर नारायण सिंह, "वीर चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 19 अगस्त 1936 को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के क्रिमाची-मानसर गांव में हुआ था। 30 जून 1963 में वे सेना में भर्ती हुए और उन्हें जाट रेजिमेंट की 4 जाट बटालियन में नियुक्त किया गया था। 1971 के दौरान मेजर नारायण सिंह की यूनिट पंजाब में पश्चिमी सीमा पर तैनात थी। जैसे ही 03 दिसम्बर 1971 को पाकिस्तान के साथ युद्ध छिड़ा पाकिस्तानी सेना सुलेमानकी सीमा के माध्यम से भारतीय क्षेत्र में लगभग 7 किलोमीटर अंदर घुस आई। इसी दौरान 4 जाट के कंपनी कमांडर मेजर नारायण सिंह को जवाबी हमला शुरू करने और मुख्य पुल पर कब्ज़ा करने के लिए चुना गया। जब जवाबी हमले शुरू हुए तो दुश्मन ने तीव्र तोपखाने और छोटे हथियारों से गोलीबारी की जिससे हमारे सैनिकों को भारी नुकसान हुआ। इस प्रक्रिया के दौरान उनकी पाकिस्तानी सेना के मेजर शब्बीर शरीफ़ से गुत्थमगुथे की लड़ाई हुई जिसके चलते दोनों को गंभीर चोटें आयीं और 05 दिसम्बर 1971 को मेजर नारायण सिंह वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर नारायण सिंह को उनके उत्कृष्ट साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "वीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्विधालय में शहीद स्मारक में इनकी बहादुरी का उल्लेख “4 जाट फाज़िलका के रक्षक” के बोर्ड में किया गया है। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Narain Singh VrC को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!

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Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.

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Gallery - Glimpses of remembering the Bravehearts!

Lets salute the martyrs for the sacrifices they made and thank them for saving our freedom.

Pricing -Membership Plans

General (सामान्य सदस्यता)

  • सदस्यों को यह अधिकार होगा कि वह शहीद उपवन में निःशुल्क प्रवेश कर सकें एवं भ्रमण कर सकें।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की कैन्टीन में 10 प्रतिशत छूट के साथ भोज्य पदार्थ उपलब्ध होंगे।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की दुकान पर उपलब्ध सामग्री 10 प्रतिशत छूट के साथ उपलब्ध होगी।
  • सदस्यों को मार्स रिसोर्ट्स हाॅटल तस्मय भोजनालय में 10 प्रतिशत छूट की दर से भोज्य उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • सभी सदस्यों को शहीदों एवं महापुरूषों की जयन्ती, पुण्यतिथि एवं विशिष्ट तिथियों को स्मरण कराने हेतु सूचनाएँ भेजी जाएंगी ताकि उन सूचनाओं से अपने परिवार के युवाओं, बच्चों को संस्कारित कर सकें एवं अपने मित्रों को भी सूचना दे सकें।
Rs.1,000 (Annually)
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Amazing place

Amazing place. Gives a sense of patriotism in yourself once you visit the Subharti Shaheed Smarak & Upwan.

Mukul Aggarwal

Visitor

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Magnificent Place

This magnificent place is situated at Subharti University Campus and it is especially filled with the spirit of national pride.

Sara Khan

Visitor

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Feel of Patriotism

There are many more stories regarding the patriotism of Indian people & many more monuments to glorify that too. Standing at this place all those stories made me remember how privileged & honored the Indians feel when it comes to talk about their patriotism.

Sagar Kumar

Visitor

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