आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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Flight Lieutenant S Achudev स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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SQD. LDR. D PANKAJ स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
सिपाही संजू सुरेश खंडारे का जन्म 23 मई 1990 को महाराष्ट्र के अकोला जिले के मूर्तिजातुर तहसील के माना गांव में हुआ था। अपनी स्कूली शिक्षा अपने पैतृक स्थान से पूरी करने के बाद भारतीय सेना में भर्ती हो गए। उन्हें महार रेजिमेंट की 15 महार बटालियन में भर्ती किया गया । अपनी मूल इकाई के साथ कुछ वर्षों तक सेवा करने के बाद, उन्हें आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू और कश्मीर में तैनात 51 आरआर इकाई के साथ सेवा करने के लिए नियुक्त किया गया। जनवरी 2017 के दौरान, सिपाही संजू सुरेश खंडारे की इकाई को नियंत्रण रेखा के साथ उत्तरी कश्मीर के गुरेज सेक्टर में तैनात किया गया था। 25 जनवरी 2017 को, 51 आरआर बटालियन के सेना शिविर में एक भयानक हिमस्खलन हुआ, जिसमें उत्तरी कश्मीर के गुरेज शहर से 25 किमी दूर तुलैल क्षेत्र में स्थित नीरू गांव की चौकी आई। हिमस्खलन की भयावहता और अचानकता ने सैनिकों को कोई भी रक्षात्मक उपाय करने का समय नहीं दिया। नतीजतन, सैनिक टनों बर्फ के नीचे दब गए ।उन्हें बचाने के लिए सेना द्वारा कई घंटों तक बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया गया। लेकिन सिपाही संजू सुरेश खंडारे की जान नहीं बचा सके। सिपाही संजू सुरेश खंडारे एक बहादुर सैनिक थे जिन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







