आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
Read More
| DOB | |
| Martyr | Battle Casualty |
नायक राजेश्वर सिंह, "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में हुआ था। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें पंजाब 16 पंजाब रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 2012 के दौरान नायक राजेश्वर सिंह की यूनिट जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में तैनात थी जहाँ सीमा पार से घुसपैठ का खतरा हमेशा बना रहता था। 04 सितम्बर 2012 को नायक राजेश्वर सिंह नियंत्रण रेखा पर अब्दुल हट पोस्ट पर तैनात थे। इसी दौरान दुश्मन की गोलीबारी से उनका एक सिपाही घायल हो गया और वे अदम्य साहस दिखाते हुए उसकी सहायता के लिए दौड़ पड़े। इसी दौरान उन्होंने एक आतंकवादी को मार गिराया और दूसरे आतंकवादी को घायल कर दिया। परन्तु गोलीबारी में खुद गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गये। नायक राजेश्वर सिंह को उनके कर्तव्य से परे अदम्य साहस और असाधारण बहादुरी के लिए वीरता पुरस्कार "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Naik Rajeshver Singh SC को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







