आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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लेफ्टिनेंट उमर फैयाज का जन्म 08 जून 1994 को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के सुदसोना गांव में हुआ था। 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे एनडीए और बाद में प्रशिक्षण के लिए आईएमए देहरादून गए। लेफ्टिनेंट उमर को 10 दिसंबर 2016 को प्रसिद्ध 2 राजपूताना राइफल्स यूनिट में नियुक्त किया गया। 09 मई 2017 को एक दुर्भाग्यपूर्ण और कायरतापूर्ण एवं बर्बरतापूर्ण कृत्य में आतंकवादियों ने लेफ्टिनेंट उमर का छुट्टी के दौरान अपहरण कर लिया और बाद में उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
कर्नल केएल गुप्ता का जन्म 09 मई 1949 को पंजाब के गुरदासपुर जिले की पठानकोट तहसील के बामियाल गांव में हुआ था। वर्ष 1972 में वे आईएमए, देहरादून से पास आउट हुए और उन्हें 2 असम रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 1995 के दौरान कर्नल केएल गुप्ता जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में तैनात 2 असम रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में कार्यरत थे। उनकी यूनिट को नियमित आधार पर उग्रवाद के साथ-साथ घुसपैठ विरोधी अभियानों के प्रति हर समय हाई अलर्ट पर रहना पड़ता था। 23 सितम्बर 1995 को कर्नल केएल गुप्ता एक ऑपरेशनल मिशन का नेतृत्व करते समय उग्रवादियों द्वारा बिछाई गई एक बारूदी सुरंग की चपेट में आ गए और वीरगति को प्राप्त हो गए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







