आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | 1986-04-04 |
| Martyr |
सिपाही विशाल चौधरी, सेना मैडल (मरणोपरांत) का जन्म 04 अप्रैल 1986 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हुआ था । 2004 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 18 जाट रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 2016 के दौरान उन्हें 61 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) में नियुक्त किया गया जो जम्मू-कश्मीर में तैनात थी और नियमित आधार पर आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में लगी हुई थी। 30 जुलाई 2016 को 61 राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों ने संदिग्ध इलाके में असामान्य हलचल देखी और इलाके को घेर लिया। सिपाही विशाल चौधरी उस टीम का हिस्सा थे जिसे घुसपैठियों से निपटने का काम सौंपा गया । चुनौती दिए जाने पर उग्रवादियों ने सैनिकों पर गोलीबारी शुरू कर दी जिसमे सिपाही विशाल गंभीर रूप से घायल हो गए। लेकिन घायल अवस्था में उन्होंने आतंकवादियों पर गोलीबारी जारी रखी और एक आतंकवादी को मौके पर ही मार गिराया परन्तु खुद शहीद हो गए। सिपाही विशाल चौधरी को उनके साहस, कर्तव्य के प्रति समर्पण और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "सेना मैडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Sep Vishal Chaudhary SM को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1985-07-30 |
| Martyr | Battle Casualty |
मेजर शशिधरन विजय नायर का जन्म 30 जुलाई 1985 को एर्नाकुलम के नेदुम्बसेरी में हुआ था । 10 दिसम्बर 2007 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 2/1 गोरखा राइफल्स में नियुक्त किया गया। 11 जनवरी 2019 को उन्हें अपनी यूनिट की जिम्मेदारी के क्षेत्र की रेकी करने का काम सौंपा गया । जब उनकी टीम रेकी कर रही थी तभी उनके पास एक बड़ा आईईडी विस्फोट हुआ जिसके कारण वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत चिकित्सा के लिए एक नजदीकी अस्पताल में ले जाया गया जहाँ वे शहीद हो गए। मेजर शशिधरन नायर एक प्रतिबद्ध सैनिक और एक अच्छे अधिकारी थे जिन्होंने देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major SHASHIDHARAN NAIR को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







