शहीद स्मारक एवं उपवन क्लब - स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविदयालय परिसर

 

आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।

Read More

Death Anniversary Test

Major Ganesh Madappa SC
DOB 1963-02-05
Martyr Battle Casualty

मेजर गणेश मडप्पा “शौर्य चक्र” (मरणोपरांत) का जन्म 5 फरवरी, 1963 को कर्नाटक के कोडागु जिले में हुआ था। वे भारतीय सेना के अनुभवी कैप्टन सीपी मडप्पा पुत्र थे। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें आर्मर्ड कोर मे ऑफिसर के तौर कमीशन प्राप्त हुआ। एक दशक से अधिक समय सेवा करने के बाद, मेजर गणेश को 36 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) बटालियन के साथ सेवा करने के लिए प्रतिनियुक्त किया गया , जो जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में लगी हुई थी। 27 सितंबर 1995 को, मेजर गणेश मडप्पा को जम्मू और कश्मीर के बडगाम जिले में स्थित बछरू गाँव में एक आतंकवादी ठिकाने पर मौके पर छापेमारी करने का महत्वपूर्ण कार्य सौंपा गया था। 2030 बजे, जैसे ही मेजर गणेश मडप्पा और उनकी कंपनी का स्तंभ संदिग्ध ठिकाने के पास पहुंचा, एक घर के भीतर छिपे तीन सशस्त्र आतंकवादियों ने अचानक आगे बढ़ रहे सैनिकों पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। दोनों और से हुई भारी गोलीबारी में उन्हें गोली लगी परतु गंभीर होने क बावजूद उन्होंने एक आतंकवादी को मार गिराया। हालाँकि गंभीर चोटों के कारण वे वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर गणेश मडप्पा को उनकी ज़बरदस्त बहादुरी, लीडरशिप, ड्यूटी के प्रति समर्पण और सबसे बड़े बलिदान के लिए “शौर्य चक्र” (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Ganesh Madappa SC को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!

Lt Col Rajneesh Parmar
DOB 1976-09-27
Martyr Battle Casualty

लेफ्टिनेंट कर्नल रजनीश परमार का जन्म 27 सितम्बर 1976 को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नानाओ गांव में हुआ था। वर्ष 2000 में वे भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट हुए और उन्हें आर्मी एविएशन कोर में नियुक्त किया गया तथा एक हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया गया। सितम्बर 2019 के दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल रजनीश परमार, 667 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन के 28 आर एंड ओ फ्लाइट में तैनात थे। 27 सितम्बर 2019 को लेफ्टिनेंट कर्नल रजनीश को रॉयल भूटान आर्मी के कैप्टन कलज़ांग वांगडी के साथ एक एयर-मिशन का काम सौंपा गया। जब उनका हेलीकॉप्टर अरुणांचल प्रदेश के खिरमू से भूटान के योंगफुल्ला जा रहा था तो उसमें गंभीर खराबी आ गई और हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें लेफ्टिनेंट कर्नल रजनीश परमार वीरगति को प्राप्त हो गए। लेफ्टिनेंट कर्नल रजनीश परमार एक बहादुर और प्रतिबद्ध सैनिक थे, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिये। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lt Col Rajneesh Parmar को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!

LT PRATEEK ACHARYA- SM
DOB 1974-12-11
Martyr Battle Casualty

लेफ्टिनेंट प्रतीक आचार्य उत्तराखंड के देहरादून के रहने वाले थे, लेकिन उनका जन्म 11 दिसंबर 1974 को असम में हुआ था। अपनी शिक्षा पूरी करने क बाद 13 जून 1998 को 23 साल की उम्र को वे कमीशन्ड ऑफिसर के रूप में सेना में शामिल हुए और उन्हें ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट की 19 ग्रेनेडियर्स बटालियन में कमीशन मिला। सितंबर 1999 में, लेफ्टिनेंट प्रतीक आचार्य की यूनिट 19 ग्रेनेडियर्स को "ऑपरेशन विजय" के हिस्से के तौर पर जम्मू के छंब सेक्टर में तैनात किया गया था। 27 सितंबर 1999 को, लेफ्टिनेंट प्रतीक आचार्य प्लाटून कमांडर के तौर पर जम्मू के छंब सेक्टर के पल्लनवाला में लाइन ऑफ़ कंट्रोल पर तैनात थे। उस दिन उनके सैनिक उस इलाके में फॉरवर्ड पोस्ट पर तैनात थे, जब शाम को पाकिस्तानी सेना ने बिना किसी उकसावे के बॉर्डर पार से फायरिंग शुरू कर दी। शाम करीब 6:30 बजे, जब दो मोर्टार शेल पोस्ट के पास गिरे, तो लेफ्टिनेंट प्रतीक तुरंत एक्शन में आए और जवाबी कार्यवाही शुरू की। परन्तु जब वे अपने एक सैनिक लांस नायक चौहान बच्चू भाई गोविंद को सुरक्षित करने के बाद स्वयं बंकर के अंदर कदम रखने वाले थे, तभी एक मोर्टार बम बंकर के पास गिरा जिससे वे गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। लेफ्टिनेंट प्रतीक आचार्य एक समर्पित सैनिक और एक बेहतरीन ऑफिसर थे, जिन्होंने 24 साल की उम्र में देश की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दे दी। उनकी ज़बरदस्त हिम्मत, ड्यूटी के प्रति समर्पण और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत गैलेंट्री अवार्ड, "सेना मेडल" से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से LT PRATEEK ACHARYA- SM को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!

Lieutenant Sushil Khajuria KC
DOB 1985-08-28
Martyr Battle Casualty

लेफ्टिनेंट सुशील खजूरिया, "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 28 अगस्त 1985 को जम्मू-कश्मीर के सांबा में हुआ था। 20 मार्च 2010 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें सेना सेवा कोर में नियुक्त किया गया। ऑपरेशनल असाइनमेंट के रूप में उन्हें 18 ग्रेनेडियर्स में नियुक्त किया गया जो जम्मू एंड कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए तैनात थी। 27 सितम्बर 2011 को लेफ्टिनेंट सुशील खजूरिया अपनी टीम का नेतृत्व कर रहे थे जहाँ उन्हें 5 से 6 आतंकवादियों के घुसपैठ दस्ते का पता चला। आतंकवादियों से निपटने के लिए उन्होंने एक खोज और विनाश अभियान चलाया। इसी दौरान भारी गोलीबारी हुई जिसमें लेफ्टिनेंट सुशील खजूरिया एवं उनकी टीम ने दो आतंकवादियों को मार गिराया लेकिन खुद गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। लेफ्टिनेंट सुशील खजूरिया को उनकी विशिष्ट वीरता, असाधारण नेतृत्व और सौहार्दपूर्ण कार्य के लिए देश के दूसरे सबसे बड़े वीरता पुरस्कार "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lieutenant Sushil Khajuria KC को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!

Birth Anniversary


Lt Col Rajneesh Parmar
DOB 1976-09-27
Martyr Battle Casualty

लेफ्टिनेंट कर्नल रजनीश परमार का जन्म 27 सितम्बर 1976 को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नानाओ गांव में हुआ था। वर्ष 2000 में वे भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट हुए और उन्हें आर्मी एविएशन कोर में नियुक्त किया गया तथा एक हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया गया। सितम्बर 2019 के दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल रजनीश परमार, 667 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन के 28 आर एंड ओ फ्लाइट में तैनात थे। 27 सितम्बर 2019 को लेफ्टिनेंट कर्नल रजनीश को रॉयल भूटान आर्मी के कैप्टन कलज़ांग वांगडी के साथ एक एयर-मिशन का काम सौंपा गया। जब उनका हेलीकॉप्टर अरुणांचल प्रदेश के खिरमू से भूटान के योंगफुल्ला जा रहा था तो उसमें गंभीर खराबी आ गई और हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें लेफ्टिनेंट कर्नल रजनीश परमार वीरगति को प्राप्त हो गए। लेफ्टिनेंट कर्नल रजनीश परमार एक बहादुर और प्रतिबद्ध सैनिक थे, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिये। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lt Col Rajneesh Parmar को उनकी जयंती पर नमन!

Captain Shekhar Ghosh
DOB 1975-09-27
Martyr Battle Casualty

कैप्टन शेखर घोष "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बैरकपुर के रहने वाले थे और उनका जन्म 27 सितंबर 1975 को हुआ था। 1996 में मशहूर IMA देहरादून में शामिल हुए और 06 दिसंबर 1997 को लेफ्टिनेंट के तौर पर पास आउट हुए। उन्हें आर्मी सर्विस कोर में कमीशन मिला। अगस्त 2000 में, कैप्टन शेखर घोष की यूनिट J&K के राजौरी जिले में तैनात थी। यूनिट के सैनिक नियमित रूप से आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में लगे हुए थे। कुछ आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में खुफिया जानकारी के स्रोत से मिले इनपुट के बाद उनकी यूनिट ने राजौरी जिले के नंबलान गाँव में एक ऑपरेशन शुरू किया। 11 अगस्त 2000 को, प्लान के मुताबिक, कैप्टन शेखर अपने सैनिकों के साथ राजौरी जिले के नंबलान गांव में संदिग्ध इलाके में पहुंचे और सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सैनिकों को देखते ही आतंकवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी। 12 अगस्त की सुबह, फंसे हुए आतंकवादियों में से एक, सब्र खो बैठा और अपने ठिकाने से बाहर आकर अंधाधुंध फायरिंग करने लगा। कैप्टन शेखर ने अपनी जान की परवाह किए बिना, फायर कवर का इंतज़ार किए बिना आतंकवादी पर हमला कर दिया। हालांकि, ऐसा करते समय, कैप्टन शेखर घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गये। कैप्टन शेखर घोष के अदम्य साहस, युद्ध भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें, "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Captain Shekhar Ghosh को उनकी जयंती पर नमन!

Become a Member! Join us and become a member of Subharti Shaheed Smarak & Upwan Club.

Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.

Leaf Png
Leaf Png
Leaf Png
Gallery - Glimpses of remembering the Bravehearts!

Lets salute the martyrs for the sacrifices they made and thank them for saving our freedom.

Pricing -Membership Plans

General (सामान्य सदस्यता)

  • सदस्यों को यह अधिकार होगा कि वह शहीद उपवन में निःशुल्क प्रवेश कर सकें एवं भ्रमण कर सकें।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की कैन्टीन में 10 प्रतिशत छूट के साथ भोज्य पदार्थ उपलब्ध होंगे।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की दुकान पर उपलब्ध सामग्री 10 प्रतिशत छूट के साथ उपलब्ध होगी।
  • सदस्यों को मार्स रिसोर्ट्स हाॅटल तस्मय भोजनालय में 10 प्रतिशत छूट की दर से भोज्य उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • सभी सदस्यों को शहीदों एवं महापुरूषों की जयन्ती, पुण्यतिथि एवं विशिष्ट तिथियों को स्मरण कराने हेतु सूचनाएँ भेजी जाएंगी ताकि उन सूचनाओं से अपने परिवार के युवाओं, बच्चों को संस्कारित कर सकें एवं अपने मित्रों को भी सूचना दे सकें।
Rs.1,000 (Annually)
Register Now
image
image
image
Tree image
Tree image

quote icon

Amazing place

Amazing place. Gives a sense of patriotism in yourself once you visit the Subharti Shaheed Smarak & Upwan.

Mukul Aggarwal

Visitor

quote icon

Magnificent Place

This magnificent place is situated at Subharti University Campus and it is especially filled with the spirit of national pride.

Sara Khan

Visitor

quote icon

Feel of Patriotism

There are many more stories regarding the patriotism of Indian people & many more monuments to glorify that too. Standing at this place all those stories made me remember how privileged & honored the Indians feel when it comes to talk about their patriotism.

Sagar Kumar

Visitor

Partner Image
Partner Image
Partner Image
Partner Image
Partner Image
Partner Image
Membership
Donate Now