आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
Read More
| DOB | 1967-03-25 |
| Martyr |
कर्नल वसंत वेणुगोपाल अशोक चक्र "मरणोपरान्त" का जन्म 25 मार्च 1967 को बैंगलोर में हुआ था। कर्नल वसंत 1988 में भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून में शामिल हुए और 10 जून 1989 को उन्हें प्रसिद्ध मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट के 9 मराठा में नियुक्त किया गया। 31 जुलाई 2007 को संदिग्ध क्षेत्र में पहुंचने पर कर्नल वसंत और उनके सैनिकों ने आतंकवादियों को देखा और उन्हें चुनौती दी। कर्नल वसंत ने आतंकवादियों से नजदीक से मुकाबला किया, और उनमें से एक आतंकवादी को मार गिराया। गोलीबारी के दौरान कर्नल वसंत घायल हो गए। लेकिन अपनी चोटों की परवाह किए बिना कर्नल वसंत ने अपने सैनिकों का नेतृत्व करना जारी रखा और भागने के सभी मार्गों को अवरुद्ध करने के निर्देश दिए जिसमे उन्होंने दो और आतंकवादियों को मार गिराया। परंतु गंभीर चोटों के कारण वे वीरगति को प्राप्त हो गए। कर्नल वसंत को उनके असाधारण नेतृत्व, बहादुरी और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार, अशोक चक्र "मरणोपरान्त" से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से COL VASANTH V- AC को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1979-06-01 |
| Martyr | Battle Casualty |
लांस नायक बच्छाव शशिकांत गणपत, शौर्य चक्र "मरणोपरांत" का जन्म 01 जून 1979 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के वानेर तहसील के डाबली गांव में हुआ था । वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 9 मराठा लाइट इन्फेंट्री में नियुक्त किया गया। वर्ष 2007 के दौरान उनकी यूनिट को आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में तैनात किया गया। 31 जुलाई 2007 को उनकी यूनिट ने खुफिया सूत्रों के आधार पर एक खोज और विनाश अभियान शुरू किया और लांस नायक बच्छाव शशिकांत उस टीम का हिस्सा थे। इसी दौरान आतंकवादियों ने सैनिकों पर गोलीबारी शुरू कर दी। गोलीबारी के दौरान लांस नायक बच्छाव शशिकांत घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। उनके अनुकरणीय साहस, कर्तव्य के प्रति समर्पण और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें वीरता पुरस्कार, शौर्य चक्र "मरणोपरांत" से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Bachhav Shashikant Ganpat SC को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1956-07-31 |
| Martyr | Battle Casualty |
स्क्वाड्रन लीडर भानु प्रताप पचौरी का जन्म 31 जुलाई 1956 को उत्तर प्रदेश में हुआ था। 1980 में वे भारतीय वायु सेना में एक लड़ाकू पायलट के रूप में नियुक्त हुए और उन्हें हाशिमारा के वायु सेना बेस पर तैनात किया गया। 1994 के दौरान स्क्वाड्रन लीडर पचौरी पंजाब में वायु सेना बेस पठानकोट में स्थित 26 स्क्वाड्रन में कार्यरत थे। 19 जुलाई 1994 को योजना के अनुसार उन्होंने मिग-21 ट्रेनर में उड़ान भरी। कुछ समय बाद उनका संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल से टूट गया और उनका विमान पठानकोट के पास पहाड़ियों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया और वे वीरगति को प्राप्त हो गए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Sqn Ldr Bhanu Pratap Pachauri को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







