आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| Martyr |
कैप्टन संजीव एस. पाठक दिल्ली के रहने वाले थे। उन्होंने इंडियन आर्मी में एंट्री के लिए क्वालिफाई किया और चेन्नई की मशहूर ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) में शामिल हो गए । उन्होंने अपनी ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी की और SS-68 कोर्स के हिस्से के तौर पर पास आउट हुए, और उन्हें राजपूत रेजिमेंट की दूसरी बटालियन में लेफ्टिनेंट के तौर पर कमीशन मिला। अगस्त 2002 में, कैप्टन संजीव एस पाठक 44 राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन के साथ सेवारत थे , जिसे जम्मू और कश्मीर के अस्थिर शोपियां जिले में तैनात किया गया था। 13 अगस्त 2002 को, विश्वसनीय खुफिया सूचनाओं ने शोपियां जिले के कच दोराह गांव क्षेत्र में कट्टर आतंकवादियों की उपस्थिति के संकेत मिले। कैप्टन संजीव एस. पाठक और उनके सैनिकों ने भागने के संभावित रास्तों की घेरबंदी शुरू कर दी। जैसे ही चारों ओर घेरा मज़बूत हुआ, घिरे हुए आतंकवादियों ने भागने की बेचैनी में फायरिंग शुरू कर दी। कैप्टन संजीव ने जवाबी कार्यवाही की परन्तु कैप्टन पाठक को गोलियां लगीं और वे गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गये। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से CAPT SANJEEV S PATHAK को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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| Martyr | Battle Casualty |
सिपाही गवई सुमेध वामन का जन्म महाराष्ट्र के अकोला जिले के लोनागरा गांव में हुआ था। 2011 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें महार रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। कुछ समय पश्चात् उन्हें 1 राष्ट्रीय राइफल्स में प्रतिनियुक्त किया गया। 13 अगस्त 2017 को सुरक्षा बलों को 5 से 6 कट्टर आतंकवादियों की मौजूदगी की खबर मिली। 1 राष्ट्रीय राइफल्स की टीम ने आतंकवादियों की खोज और विनाश अभियान अभियान शुरू किया। इसी दौरान भारतीय सैनिको ने भारी गोलीबारी की। परन्तु आतंकवादी रात के अंधेरे का फायदा उठा कर भागने में सफल रहे गोलीबारी के दौरान सिपाही गवई सुमेध वामन गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Sepoy Gawai Sumedh Waman को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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| Martyr | Battle Casualty |
सिपाही पुष्पेंद्र सिंह का जन्म 1987 में उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के खुटिया गांव में हुआ था। 2011 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 20 जाट रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 2018 के दौरान सिपाही पुष्पेंद्र सिंह की यूनिट को एलओसी के साथ कुपवाड़ा जिले में उत्तरी कश्मीर के तंगधार सेक्टर में तैनात थी। 13 अगस्त 2018 को पाकिस्तानी सैनिकों ने युद्ध विराम का उल्लंघन किया और भारतीय सेना की चौकियों पर भारी मोर्टार से गोलाबारी शुरू कर दी। भारतीय सेना ने इस युद्ध विराम उल्लंघन का जोरदार जबाब दिया और इसी दौरान दो पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। परन्तु दोनों और से हुई भीषण गोलीबारी में सिपाही पुष्पेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Sepoy Pushpendra Singh को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1977-08-13 |
| Martyr | Battle Casualty |
लेफ्टिनेंट अभय पारीक का जन्म 13 अगस्त 1977 को हुआ था। लेफ्टिनेंट अभय को सितंबर 2000 में सेना के आर्टिलरी की 69 फील्ड रेजिमेंट में नियुक्त किया गया जो एलओसी के पास जम्मू-कश्मीर में तैनात थी। 10 जून 2002 को जैसे ही सीमा पार से गोलाबारी बढ़ी लेफ्टिनेंट अभय हरकत में आए और दुश्मन की चौकी पर बड़े पैमाने पर तोपखाने से हमला किया जिसके परिणामस्वरूप दुश्मन को भारी नुकसान हुआ लेकिन गोलाबारी के दौरान लेफ्टिनेंट अभय दुश्मन की एंटी-टैंक मिसाइल की चपेट में आ गए और वीरगति को प्राप्त हो गये। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lt Abhay Pareek को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







