आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | 1969-03-06 |
| Martyr | Battle Casualty |
कैप्टन तरुण कुमार, शौर्य चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 06 मार्च 1969 को उत्तराखंड के देहरादून में हुआ था। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 157 एयर डिफेन्स रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 1998 के दौरान वे 4 राष्ट्रीय राइफल्स में कार्यरत थे जो आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में तैनात थी। 09 अगस्त 1998 को नियंत्रण वाले क्षेत्र में कुछ कट्टर आतंकवादियों की मौजूदगी की जानकारी मिली और सेना द्वारा आतंकवादियों की खोज और विनाश अभियान शुरू किया गया, जिसका नेतृत्व कैप्टन तरुण कुमार ने किया। जैसे ही उनकी टीम ने आतंकवादियों को देखा तो आतंकवादियों ने सैनिकों पर गोलियां चला दीं। दोनों तरफ से भारी गोलीबारी हुई जिसमें कई आतंकवादियों को मार गिराया गया लेकिन इसी दौरान कैप्टन तरुण कुमार गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। कैप्टन तरुण कुमार को उनकी बहादुरी, अदम्य लड़ाई की भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश का तीसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Capt Tarun Kumar SC को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1971-08-09 |
| Martyr | Battle Casualty |
विंग कमांडर जयपॉल जेम्स का जन्म 9 अगस्त 1971 को हुआ था और वे तमिलनाडु के चेन्नई जिले के तांबरम के रहने वाले थे। 18 दिसंबर 1993 को 22 साल की उम्र में उन्होंने एयर फ़ोर्स में कमीशन प्राप्त किया। 2017-18 के दौरान, विंग कमांडर जेम्स असम में एयर फ़ोर्स स्टेशन जोरहाट में मौजूद यूनिट में काम कर रहे थे। 15 फ़रवरी 2018 को, एयर फ़ोर्स स्टेशन जोरहाट में मौजूद विंग कमांडर जयपॉल जेम्स को एक ऑपरेशनल काम दिया गया। जयपॉल जेम्स ने विंग कमांडर दुष्यंत वत्स के साथ वायरस SW-80 माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट में दोपहर करीब 12:30 बजे एयर फ़ोर्स स्टेशन से उड़ान भरी। टेक ऑफ करने के बाद एयरक्राफ्ट स्टेशन से करीब 20 km दूर चला गया था, तभी दोपहर करीब 1 बजे पायलटों को फ्लाइट को हैंडल करने में कुछ टेक्निकल दिक्कतें आईं। जिससे पायलटों ने इमरजेंसी लैंडिंग की कोशिश की। लेकिन एयरक्राफ्ट कंट्रोल नहीं हो सका और असम के माजुली जिले के उत्तरी हिस्से में ब्रह्मपुत्र में एक रेतीले टीले, दरबार चापोरी में क्रैश हो गया। जिसमें दोनों पायलट बुरी तरह घायल हो हुए और वीरगति को प्राप्त हो गये। विंग कमांडर जयपॉल जेम्स एक समर्पित सैनिक और एक बेहतरीन एयर वॉरियर थे, जिन्होंने देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Wing Commander Jaipaul James को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







