आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | |
| Martyr | Battle Casualty |
लेफ्टिनेंट धर्मबीर सिंह सिहाग, नौसेना मेडल (मरणोपरांत) हरियाणा के भिवानी जिले की तोशन तहसील के मीरां गाँव के रहने वाले थे। शिक्षा पूरी करने के बाद वे नौसेना में भर्ती हो गए और उन्हें ऑपरेशनल नौसेना इकाई में नियुक्त किया गया। बाद में वे भारतीय नौसेना के मरीन कमांडो, मार्कोस का हिस्सा बन गए। मई 1999 में ऑपरेशन विजय के दौरान सैन्य अभियानों में सहायता के लिए, मार्कोस को भी विशेष अभियानों के लिए तैनात किया गया। लेफ्टिनेंट धर्मबीर सिंह सिहाग और उनकी टीम के सदस्यों को 12 अगस्त 1999 को बांदीपुर जिले में ऐसे ही एक विशेष अभियान का कार्यभार सौंपा गया था। लेफ्टिनेंट सिहाग ने क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए पहले बारूदी सुरंगों को साफ करने का फैसला किया। वे परिश्रमपूर्वक दो बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने में कामयाब रहे, लेकिन आतंकवादियों ने तीसरे बारूदी सुरंग में दूर से विस्फोट कर दिया। परिणामी विस्फोट का विनाशकारी प्रभाव पड़ा जिसमें वे वीरगति को प्राप्त हो गए। लेफ्टिनेंट धर्मबीर सिंह सिहाग को उनके अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार, "नौसेना मेडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से LT D S SIHAG- NM को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1975-09-27 |
| Martyr | Battle Casualty |
कैप्टन शेखर घोष "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बैरकपुर के रहने वाले थे और उनका जन्म 27 सितंबर 1975 को हुआ था। 1996 में मशहूर IMA देहरादून में शामिल हुए और 06 दिसंबर 1997 को लेफ्टिनेंट के तौर पर पास आउट हुए। उन्हें आर्मी सर्विस कोर में कमीशन मिला। अगस्त 2000 में, कैप्टन शेखर घोष की 2 सिख बटालियन J&K के राजौरी जिले में तैनात थी। यूनिट के सैनिक रेगुलर तौर पर आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में लगे हुए थे। कुछ आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में इंटेलिजेंस सोर्स से मिले इनपुट के बाद, 2 सिख ने राजौरी जिले के नंबलान गाँव में एक ऑपरेशन शुरू किया। 11 अगस्त 2000 को, प्लान के मुताबिक, कैप्टन शेखर अपने सैनिकों के साथ राजौरी जिले के नंबलान गांव में संदिग्ध इलाके में पहुंचे और सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सैनिकों को देखते ही आतंकवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी। 12 अगस्त की सुबह, फंसे हुए आतंकवादियों में से एक, सब्र खो बैठा और अपने ठिकाने से बाहर आकर अंधाधुंध फायरिंग करने लगा। कैप्टन शेखर ने अपनी जान की परवाह किए बिना, फायर कवर का इंतज़ार किए बिना आतंकवादी पर हमला कर दिया। हालांकि, ऐसा करते समय, कैप्टन शेखर घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गये। कैप्टन शेखर घोष के अदम्य साहस, युद्ध भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें, "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Captain Shekhar Ghosh को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1979-08-12 |
| Martyr | Battle Casualty |
मेजर विनीत वर्मा का जन्म 12 अगस्त 1979 को बिहार के पटना शहर में हुआ था। वे डोगरा रेजिमेंट की 19वीं डोगरा बटालियन में कार्यरत थे। 2013 के दौरान मेजर विनीत वर्मा की यूनिट 19 डोगरा को ऑपरेशन राइनो के हिस्से के रूप में असम में तैनात किया गया था। 30 अप्रैल 2013 को मेजर विनीत वर्मा असम के गोलपारा जिले के चोटीपारा क्षेत्र में एक क्षेत्रीय प्रभुत्व गश्त का नेतृत्व कर रहे थे। गश्त के दौरान आतंकवादियों ने पूर्व नियोजित चाल से सैनिकों पर हमला कर दिया। मेजर विनीत वर्मा और उनके सैनिक आतंकवादियों को करारा जवाब देने के लिए हरकत में आ गए और भीषण गोलीबारी शुरू हो गई। जिसमें मेजर विनीत वर्मा गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Vineet Verma को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
| DOB | 1976-08-12 |
| Martyr | Battle Casualty |
कैप्टन आर सुब्रमण्यम, कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 12 अगस्त 1976 को मुंबई के गोरेगांव में हुआ था। 1997 में आईएमए, देहरादून से पास आउट हुए और उन्हें 1 पैराशूट रेजिमेंट में शामिल किया गया। 18 जून 2000 को कैप्टन सुब्रमण्यम उस दस्ते का नेतृत्व कर रहे थे जो कुपवाड़ा के हफरुदा जंगल में एक ऑपरेशन चला रहा था। पूरी रात चली गोलीबारी में वे अधिकांश कट्टर आतंकवादियों को मार गिराने में सफल रहे। 19 जून 2000 को दुश्मन के शवों को हटाते समय तीन बचे हुए आतंकवादियों ने उन सभी पर गोलीबारी शुरू कर दी। कैप्टन सुब्रमण्यम ने उनमें से दो को मार गिराया। इसी दौरान वे गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। कैप्टन सुब्रमण्यन को उनके असाधारण साहस, अडिग लड़ाई की भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश का दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Capt R Subramanian KC को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
| DOB | 1997-08-12 |
| Martyr | Battle Casualty |
पैराट्रूपर छत्रपाल सिंह, सेना मैडल (मरणोपरांत) का जन्म 12 अगस्त 1997 को राजस्थान के झुंझुनू जिले के छावा श्री गांव में हुआ था। 2015 में वे सेना में शामिल हुए। उन्हें सेना सेवा कोर में नियुक्त किया गया था। कुछ समय पश्चात् वे 4 पैरा रेजिमेंट (स्पेशल फाॅर्स) में शामिल हुए। अप्रैल 2020 के दौरान पैराट्रूपर छत्रपाल सिंह की यूनिट को आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए कश्मीर घाटी में तैनात किया गया । 01 अप्रैल 2020 को उनकी यूनिट ने "ऑपरेशन रंगडोरी बैहक" लॉन्च किया जिसका पैराट्रूपर छत्रपाल सिंह हिस्सा थे। दोनों ओर से हुई गोलीबारी में पैराट्रूपर छत्रपाल सिंह एवं उनकी टीम ने एक आतंकवादी को मार गिराया लेकिन इसी दौरान पैराट्रूपर छत्रपाल सिंह गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। पैराट्रूपर छत्रपाल सिंह को उनके असाधारण साहस, कर्तव्य के प्रति समर्पण और सर्वोच्च बलिदान के लिए 26 जनवरी 2021 को वीरता पुरस्कार, "सेना मैडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Paratrooper Chhatrapal Singh SM को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







