आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | |
| Martyr | Battle Casualty |
सिपाही टी के रेड्डी का जन्म आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले की गिद्दलुरु तहसील के ओबुलापुरम गांव में हुआ था। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें मद्रास रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। वर्ष 2017 में उन्हें 25 राष्ट्रीय राइफल्स में नियुक्त किया गया जो आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर में तैनात थी । 12 अक्टूबर 2017 को पाकिस्तानी सेना ने कृष्णा घाटी सेक्टर में भारतीय सेना की चौकियों पर अकारण गोलीबारी शुरू कर दी। भारतीय सेना ने उचित तरीके से पाकिस्तानी सेना पर जवाबी कार्रवाई की परन्तु इसी दौरान सिपाही टी के रेड्डी गंभीर रूप से घायल हुए औरवीरगति को प्राप्त हो गए। सिपाही टी के रेड्डी एक बहादुर सैनिक थे जिन्होंने आगे बढ़कर भारतीय सेना की उच्चतम परंपराओं का पालन करते हुए करते हुए 24 वर्ष की आयु में राष्ट्र की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Sepoy T K Reddy को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!
| DOB | 1974-10-12 |
| Martyr | Battle Casualty |
ग्रेनेडियर सीता राम कुमावत राजस्थान के सीकर जिले के पलसाना गांव के रहने वाले थे। वे 27 अप्रैल 1993 को 19 साल की उम्र में सेना में शामिल हुए और उन्हें ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट की 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन में नियुक्त किया गया। 1999 के दौरान, ग्रेनेडियर सीता राम कुमावत की यूनिट 18 ग्रेनेडियर्स को जम्मू और कश्मीर में एलओसी पर तैनात किया गया था। घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए भारतीय सेना द्वारा ऑपरेशन विजय शुरू किया गया जिसका वे हिस्सा थे। 13 जून 1999 तक, 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन को 18 गढ़ राइफ बटालियन के साथ मिलकर हम्प पर कब्जा करने का काम सौंपा गया था। ग्रेनेडियर सीता राम कुमावत और उनके साथियों ने तोपखाने द्वारा भारी गोलाबारी से पहले 13/14 जून 1999 की रात को हम्प पर हमला किया। दुश्मन के कड़े प्रतिरोध के बावजूद, 18 ग्रेन ने हमला जारी रखा और सुबह तक हम्प के हिस्से पर कब्जा कर लिया। हालांकि भीषण गोलीबारी के दौरान ग्रेनेडियर सीता राम गंभीर रूप से घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से GDR SITA RAM KUMAWAT को उनकी जयंती पर नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







