आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | 1987-01-12 |
| Martyr |
कैप्टन प्रेम कुमार पाटिल महाराष्ट्र के रहने वाले थे। उन्हें आर्टिलरी रेजिमेंट की 80 फील्ड रेजिमेंट में कमीशन मिला। 2015 के दौरान, कैप्टन प्रेम कुमार 36 राष्ट्रीय राइफल बटालियन में कार्यरत थे, जो आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में तैनात थी। 7 अगस्त 2015 को, सुरक्षा बलों ने गुरेज सेक्टर में एक 'सीक एंड डिस्ट्रॉय ऑपरेशन' की योजना बनाई। यह अभियान 36 राष्ट्रीय राइफल इकाई के सैनिकों द्वारा शुरू किया गया था और कैप्टन प्रेम कुमार को इस अभियान का नेतृत्व करने का काम सौंपा गया था। जल्द ही सैनिकों ने असामान्य गतिविधि को देखा और संपर्क करने के लिए आगे बढ़े। चुनौती दिए जाने पर आतंकवादियों ने सैनिकों पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। ऑपरेशन के दौरान, कैप्टन प्रेम ने दो आतंकवादियों को मार गिराया हालाँकि, जब कैप्टन प्रेम कुमार आतंकियों का पीछा कर रहे थे वे लगभग 280 फीट नीचे बह रही नौशेरनार नदी में गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए पास के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वे वीरगति को प्राप्त हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Captain Prem Kumar Patil को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | |
| Martyr | Battle Casualty |
Gunner Vikramjeet Singh स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Gunner Vikramjeet Singh को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1989-02-27 |
| Martyr |
मेजर कौस्तुभ प्रकाश राणे, सेना मैडल (मरणोपरांत) का जन्म 27 फरवरी 1989 को महाराष्ट्र के ठाणे जिले में हुआ था । वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 12 गढ़वाल राइफल्स में नियुक्त किया गया। कुछ वर्षों तक अपनी यूनिट में सेवा करने के बाद उन्हें उग्रवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर में तैनात 36 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) में नियुक्त किया गया। 2018 के दौरान 36 आरआर को जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में तैनात किया गया। 06 अगस्त 2018 को आठ भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने अंधेरे का फायदा उठाकर बख्तोर इलाके में गोविंद नाले के पास भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करने की कोशिश की। सतर्क सैनिकों ने असामान्य हलचल देखी और कार्रवाई में जुट गए। इसके बाद दोनों ओर से भीषण गोलीबारी हुई जिसमें दो आतंकवादी मारे गए। परन्तु गोलीबारी के दौरान मेजर कौस्तुभ राणे गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए । मेजर कौस्तुभ राणे को उनके अदम्य साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए 26 जनवरी 2019 को वीरता पुरस्कार "सेना मैडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Kaustubh Prakash Rane SM को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | |
| Martyr | Battle Casualty |
Rifleman Hameer Singh Pokhriyal स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Rifleman Hameer Singh Pokhriyal को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | |
| Martyr | Battle Casualty |
Rifleman Mandeep Singh Rawat स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Rifleman Mandeep Singh Rawat को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1962-08-07 |
| Martyr |
मेजर दीवान चंद चौहान का जन्म 07 अगस्त 1962 को हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में हुआ था। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज़ एग्जाम पास किया और OTA चेन्नई में शामिल होने के लिए चुने गए और उन्हें ब्रिगेड ऑफ़ गार्ड्स में कमीशन प्राप्त हुआ। सितंबर 2005 में, मेजर डीसी चौहान की यूनिट, 21 RR बटालियन को जम्मू और कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में तैनात किया गया था। 01 सितंबर 2005 को, कुपवाड़ा जिले के राजवार सेक्टर में LOC के पास घुसपैठ की कोशिश की ख़ुफ़िया सूत्रों से जानकारी मिली। मेजर चौहान अपनी टीम के साथ घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करने और आतंकियों को खत्म करने के लिए तुरंत एक्शन में आ गए। इसके बाद हुई भीषण गोलीबारी में, कुछ आतंकी घायल हो गए और घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर दी गई। हालांकि, फायरिंग के दौरान मेजर डीसी चौहान को गोलियां लगीं और वह गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर डीसी चौहान एक बहादुर सैनिक और एक बेहतरीन ऑफिसर थे, जिन्होंने आगे बढ़कर नेतृत्व किया और इंडियन आर्मी की सबसे ऊंची परंपराओं का पालन करते हुए अपनी ड्यूटी निभाते हुए देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Diwan Chand Chauhan को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







