आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
Read MoreBattle Casualty
राइफलमैन धोंकल सिंह, महावीर चक्र (मरणोपरांत का जन्म 01 दिसंबर 1923 को राजस्थान के जोधपुर जिले के सेखाला जुनावास गांव में हुआ था। वे 1944 में 21 साल की उम्र में सेना में शामिल हुए और राजपूताना राइफल्स की छठी बटालियन में नियुक्त हुए जो एक जानी-मानी बटालियन है। राइफलमैन धोंकल सिंह की यूनिट उरी सेक्टर में तैनात थी । 30 अप्रैल 1944 को राइफलमैन धोंकल सिंह अग्रणी स्काउट के रूप में अपनी पलटन को निर्धारित उद्देश्य की ओर निर्देशित कर रहे थे। राइफलमैन धोंकल सिंह को जल्द ही एहसास हुआ कि दुश्मन की एलएमजी से अपने साथियों को बचाने और आब्जेक्टिव की ओर आगे बढ़ने के लिए किसी तरह चुप रहना होगा। फिर वे रेंगते हुए दुश्मन की तरफ आगे बढ़े और चौकी के कुछ गज के भीतर पहुंचने के बाद उसे ग्रेनेड से नष्ट कर दिया। ऑपरेशन के दौरान, राइफलमैन धोंकल सिंह के सीने और चेहरे पर ग्रेनेड के स्प्लिंटर लग गये। अपने गंभीर घावों के बावजूद राइफ़लमैन धोंकल सिंह आगे बढ़े और भाग रहे दुश्मन पर दूसरा ग्रेनेड फेंका जिसमें एक कमांडर सहित दो और मारे गए। लेकिन वो स्वयं गंभीर रूप से घायल होने के कारण वीरगति को प्राप्त हो गए। राइफलमैन धोंकल सिंह को उनके अदम्य साहस, अदम्य युद्ध भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश का दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार, "महावीर चक्र" (मरणोपरांत ) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Battle Casualty
मेजर विनीत वर्मा का जन्म 12 अगस्त 1979 को बिहार के पटना शहर में हुआ था। वे डोगरा रेजिमेंट की 19वीं डोगरा बटालियन में कार्यरत थे। 2013 के दौरान मेजर विनीत वर्मा की यूनिट 19 डोगरा को ऑपरेशन राइनो के हिस्से के रूप में असम में तैनात किया गया था। 30 अप्रैल 2013 को मेजर विनीत वर्मा असम के गोलपारा जिले के चोटीपारा क्षेत्र में एक क्षेत्रीय प्रभुत्व गश्त का नेतृत्व कर रहे थे। गश्त के दौरान ही आतंकवादियों ने पूर्व नियोजित चाल में सैनिकों पर हमला कर दिया। मेजर विनीत वर्मा और उनके सैनिक करारा जवाब देने के लिए हरकत में आ गए और भीषण गोलीबारी शुरू हो गई। जिसमें मेजर विनीत वर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
लांस नायक शमशेर सिंह, वीर चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 30 अप्रैल 1969 को पंजाब के संगरूर जिले में हुआ था। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 24 पंजाब रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। अगस्त 1997 के दौरान उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में तैनात थी जहाँ एलओसी पर अग्रिम चौकियों निगरानी करनी पड़ती थी। 23 अगस्त 1997 को वे उरी के उत्तरी झेलम सेक्टर में नानक पोस्ट पर तैनात थे। इसी दौरान उनकी चौकी पर दुश्मन ने अकारण अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। लांस नायक शमशेर सिंह ने अपनी जान जोखिम में डालकर दुश्मन के बंकर पर हमला किया और बंकर को पूरी तरह से नष्ट कर दिया जिसमें दुश्मन के दो सैनिक मारे गए। लांस नायक शमशेर सिंह को उनकी विशिष्ट वीरता, अदम्य युद्ध भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "वीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







