आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | 1974-12-24 |
| Martyr | Battle Casualty |
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से CAPT ADITYA MISHRA को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | |
| Martyr | Battle Casualty |
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से L HAV BALDEV RAJ को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1969-10-04 |
| Martyr | Battle Casualty |
नायक कौशल यादव, वीर चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 04 अक्टूबर 1969 को छत्तीसगढ़ के भिलाई में हुआ था । वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 9 पैरा (एसएफ) में नियुक्त किया गया। 1999 के दौरान नायक कौशल यादव को "ऑपरेशन विजय" के तहत कारगिल के द्रास सेक्टर में तैनात थे। 25 जुलाई 1999 को एक टीम के स्क्वाड कमांडर के रूप में नायक कौशल यादव को द्रास सेक्टर में ज़ुलु टॉप पर कब्ज़ा करने का काम सौंपा गया था। नायक कौशल ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना दुश्मन पर भारी गोलीबारी की जिसमे दुश्मन के पांच सैनिकों को मार गिराया। इसी दौरान वे गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। उनकी उत्कृष्ट वीरता, दृढ़ संकल्प, कर्तव्य के प्रति समर्पण और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें वीरता पुरस्कार "वीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Naik Kaushal Yadav VrC को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1992-07-25 |
| Martyr | Battle Casualty |
Sepoy Sunil Patel स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Sepoy Sunil Patel को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
| DOB | 1974-07-25 |
| Martyr | Battle Casualty |
मेजर समीर कटवाल का जन्म 25 जुलाई 1974 को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की सैंडहोल तहसील के रावरा गांव में हुआ था। 10 जून 1995 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 21 कुमाऊं रेजिमेंट में नियुक्त किया गया । अगस्त 1999 के दौरान उनकी यूनिट असम में तैनात थी जो आतंकवाद विरोधी अभियानों में लगी हुई थी। 28 अगस्त 1999 को मेजर समीर कटवाल 40 सैनिकों के साथ पैदल ही संदिग्ध इलाके की ओर निकले तभी उनकी टीम पर आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। इसी दौरान मेजर समीर अकेले ही दो आतंकवादियों को मार गिराने में सफल रहे। लेकिन भागते हुए एक आतंकवादी ने पलटकर मेजर समीर पर फायरिंग कर दी जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हए और शहीद हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Sameer Katwal को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







