आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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कैप्टन राकेश शर्मा, शौर्य चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 25 मई 1966 को उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के भरना कला गोवर्धन गांव में हुआ था । 10 जून 1989 को वे भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट हुए और उन्हें 17 मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री में नियुक्त किया गया। वर्ष 2005 के दौरान वे 11 राष्ट्रीय राइफल्स (आर आर) में नियुक्त थे जो जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में तैनात थी। फरवरी 1995 में खुफिया सूत्रों से डोडा जिले की किश्तवाड़ तहसील के भल्ला इलाके में एक आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर की मौजूदगी की जानकारी मिली थी। 04 मार्च 1995 को कैप्टन राकेश शर्मा के नेतृत्व में एक अधिकारी, 4 जेसीओ और 65 अन्य रैंकों की टीम के साथ ऑपरेशन का काम सौंपा गया । इसी दौरान एक भीषण मुठभेड़ हुई जिसमें कुछ आतंकवादियों ने तो आत्मसमर्पण कर दिया परन्तु कुछ शिविर में मौजूद रहे। बचे हुए आतंकवादियों से निपटने के लिए वे तुरंत हरकत में आए और उनमें से एक को ढेर कर दिया और दूसरे को घायल कर दिया। परन्तु खुद गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। कैप्टन राकेश शर्मा को उनके असाधारण साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Battle Casualty
कैप्टन सोमेश श्रीवास्तव का जन्म 23 सितम्बर 1971 को बिहार के समस्तीपुर जिले में हुआ था। जून 1996 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 15 इंजीनियर रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। मार्च 2001 के दौरान कैप्टन सोमेश को सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) में नियुक्त किया गया जहाँ उन्होंने लद्दाख क्षेत्र में श्रीनगर-लेह (एनएच-1डी) राजमार्ग के अलावा मनाली-लेह सड़क के माध्यम से कनेक्टिविटी प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 04 मार्च 2001 को कैप्टन सोमेश श्रीवास्तव को एक ऑपरेशन का नेतृत्व करने का काम सौंपा गया था। कैप्टन सोमेश ऑपरेशन की गंभीरता के बारे में जानते थे और सौंपे गए कार्य को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध थे।इसी दौरान बर्फ हटाने के अभियान की निगरानी करते समय उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गयी और वे शहीद हो गए | स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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कैपà¥à¤Ÿà¤¨ दीपक शरà¥à¤®à¤¾, कीरà¥à¤¤à¤¿ चकà¥à¤° (मरणोपरांत) का जनà¥à¤® 03 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 1983 को हरियाणा में हà¥à¤† था। 16 सितमà¥à¤¬à¤° 2006 को वे सेना में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सिगà¥à¤¨à¤² कोर में नियà¥à¤•à¥à¤¤ किया गया । मारà¥à¤š 2008 में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ 42 राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ राइफलà¥à¤¸ (आर आर) में नियà¥à¤•à¥à¤¤ किया गया जो आतंकवाद विरोधी अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ के लिठजमà¥à¤®à¥‚ - कशà¥à¤®à¥€à¤° में तैनात थी। 04 मारà¥à¤š 2010 को à¤à¤• विशेष सूचना पर कैपà¥à¤Ÿà¤¨ दीपक शरà¥à¤®à¤¾ और उनके सैनिकों को पà¥à¤²à¤µà¤¾à¤®à¤¾ जिले के दादसरा गांव में à¤à¤• घर को खाली कराने का काम सौंपा गया था जहां हिजबà¥à¤² मà¥à¤œà¤¾à¤¹à¤¿à¤¦à¥€à¤¨ समूह के आतंकवादी छिपे थे। इसी दौरान कैपà¥à¤Ÿà¤¨ दीपक शरà¥à¤®à¤¾ और उनके सैनिकों ने तीन आतंकवादियों को मार गिराया परनà¥à¤¤à¥ उनकी गरà¥à¤¦à¤¨ में गोली लगी जिससे वे गंà¤à¥€à¤° रूप से घायल हà¥à¤ और वीरगति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो गà¤à¥¤ कैपà¥à¤Ÿà¤¨ दीपक शरà¥à¤®à¤¾ को उनके अनà¥à¤•रणीय साहस, अटल नेतृतà¥à¤µ और सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š बलिदान के लिठदेश के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार "कीरà¥à¤¤à¤¿ चकà¥à¤°" (मरणोपरांत) से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
ब्रिगेडियर बलविंदर सिंह शेरगिल का जन्म 04 मार्च 1951 को पंजाब के संगरूर जिले में हुआ था । 14 नवंबर 1971 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 3 पंजाब रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 18 अगस्त 2000 को ब्रिगेडियर बीएस शेरगिल ने 7 सेक्टर के कमांडर का पदभार संभाला और अपनी कमान के तहत परिचालन योजनाओं और सैनिकों से परिचित होने का कार्य शुरू किया । उनके परिचय दौरे के दौरान 21 अगस्त 2000 को आतंकवादियों ने सड़क पर लगाए गए रिमोट-नियंत्रित आईईडी में विस्फोट कर दिया जिससे ब्रिगेडियर बीएस शेरगिल गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







