आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| Martyr | Battle Casualty |
राइफलमैन शुभम शर्मा का जन्म वर्ष 1998 में जम्मू-कश्मीर के जम्मू जिले की सतराइयां तहसील के शाखियान चक गांव में हुआ था। 17 सितम्बर 2016 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 8 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री में नियुक्त किया गया। सितम्बर 2020 के दौरान उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में तैनात थी । 01 अक्टूबर 2020 को राइफलमैन शुभम शर्मा नौगाम सेक्टर में नियंत्रण रेखा के साथ आगे की चौकियों में से एक पर तैनात थे जहाँ पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय चौकियों पर अकारण गोलीबारी शुरू कर दी। भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब दिया। परन्तु इसी दौरान राइफलमैन शुभम शर्मा गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। एक बहादुर और प्रतिबद्ध सैनिक थे, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिये। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Rifleman Shubham Sharma को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!
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| Martyr | Battle Casualty |
Capt Avinash Yashwant Somvanshi SM स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Capt Avinash Yashwant Somvanshi SM को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!
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| Martyr | Battle Casualty |
Major Abhijai Thapa SC स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Abhijai Thapa SC को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!
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| Martyr | Battle Casualty |
Major Vikas Varyani SM स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Vikas Varyani SM को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!
| DOB | 1959-10-01 |
| Martyr | Battle Casualty |
हवलदार महाबीर सिंह का जन्म 01 अक्टूबर 1959 को हरियाणा के रोहतक जिले के मैना गांव में हुआ था। 10 जनवरी 1979 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 14 राजपूताना राइफल्स में नियुक्त किया गया। 1992 के दौरान उनकी यूनिट राजस्थान के नसीराबाद में तैनात थी। 20 अगस्त 1992 को हवलदार महाबीर सिंह और उनके साथियों को प्रशिक्षण के उद्देश्य से यूनिट द्वारा बिछाई गई पुरानी बारूदी सुरंगों को साफ करने का काम सौंपा गया। दुर्भाग्य से उस दिन बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करते समय उनमें से एक में विस्फोट हो गया। इसी दौरान हवलदार महाबीर सिंह गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। हवलदार महावीर सिंह एक बहादुर सैनिक थे जिन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए राष्ट्र की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दे दी। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Havaldar Mahabir Singh को उनकी जयंती पर नमन!
| DOB | 1998-10-01 |
| Martyr | Battle Casualty |
ग्रेनेडियर हरि भाकर, "सेना मेडल" (मरणोपरांत) का जन्म 01 अक्टूबर 1998 को राजस्थान के नागौर जिले के मकराना तहसील के जौसारी गांव में हुआ था। जुलाई 2016 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 4 ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। मार्च 2019 के दौरान उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में तैनात थी। 23 मार्च 2019 को पाकिस्तानी सेना के जवानों ने पुंछ सेक्टर के शाहपुर क़स्बा और केरनी इलाकों में सीमा पार से भारतीय चौकियों पर अकारण गोलीबारी की। भारतीय सेना ने पाकिस्तानी गोलीबारी का मुंहतोड़ जवाब दिया। परन्तु इसी दौरान ग्रेनेडियर हरि भाकर दुश्मन के एक गोले से गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। ग्रेनेडियर हरि भाकर को उनके असाधारण साहस, कर्तव्य के प्रति समर्पण और सर्वोच्च बलिदान के लिए 26 जनवरी 2020 को वीरता पुरस्कार, "सेना मेडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Grenadier Hari Bhakar SM को उनकी जयंती पर नमन!
| DOB | 1958-10-01 |
| Martyr | Battle Casualty |
मेजर अश्विनी कुमार कनवा, विशिष्ट सेवा मैडल (मरणोपरांत) का जन्म 01 अक्टूबर 1958 को दिल्ली में हुआ था। नवम्बर 1982 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें सेना चिकित्सा कोर में नियुक्त किया गया । 1987 के दौरान उन्हें सिकंदराबाद स्थित 93 फील्ड रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। जब जुलाई 1987 में भारत-श्रीलंका समझौते के परिणामस्वरूप ऑपरेशन पवन शुरू हुआ तो मेजर अश्विनी 25 अक्टूबर 1987 को अपनी यूनिट के साथ आईपीकेएफ के हिस्से के रूप में श्रीलंका चले गए। 03 नवंबर 1987 को मेजर अश्विनी कुमार कनवा जाफना के बाहरी इलाके में सेना शिविर में घायल सैनिकों को चिकित्सा सहायता प्रदान करने में व्यस्त थे। तभी एक लिट्टे का आतंकवादी मरीज़ बनकर कैंप में घुसा और मेजर अश्विनी कुमार कनवा को बहुत करीब से गोली मार दी और वे शहीद हो गए। मेजर अश्विनी कुमार कनवा को उनके साहस और उच्च कोटि की कर्तव्यपरायणता के लिए "विशिष्ट सेवा मैडल " (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Ashwini Kumar Kanva VSM को उनकी जयंती पर नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







