आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | |
| Martyr | Battle Casualty |
सिपाही प्रशांत शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के खांजापुर गांव में हुआ था। 21 नवंबर 2016 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 26 मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री में नियुक्त किया गया। 2020 के दौरान उन्हें 50 राष्ट्रीय राइफल्स में नियुक्त किया गया जो आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर में तैनात थी। 29 अगस्त 2020 को उनकी यूनिट ने आतंकवादियों के खिलाफ एक तलाशी और घेराबंदी अभियान शुरू किया जिसका वे हिस्सा थे और अपनी पार्टी के प्रमुख सदस्य थे। इसी दौरान आतंकवादियों के साथ भीषण गोलीबारी हुई जिसमें सिपाही प्रशांत की टीम ने तीन आतंकवादियों को मार गिराया। परन्तु ऑपरेशन के दौरान सिपाही प्रशांत शर्मा को कई गोलियां लगीं और वे वीरगति को प्राप्त हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Sepoy Prashant Sharma को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1972-02-12 |
| Martyr | Battle Casualty |
नायक खीम सिंह कुंवर "सेना मेडल" (मरणोपरांत) का जन्म 12 फरवरी 1972 को हुआ था और वे उत्तराखंड के कुंवरचंपावत जिले के बनबासा कस्बे के पचपकरिया गांव के निवासी थे। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद,सेना में शामिल हुए और उन्हें 9 पैराशूट रेजिमेंट में नियुक्त किया गया, जो पर्वतीय अभियानों में विशेषज्ञता रखती है। अगस्त 1999 के दौरान, नायक खीम सिंह 9 पैरा में सेवारत थे। 26 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध की समाप्ति के बाद, सेना किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए उच्च सतर्कता पर थी। 29 अगस्त 1999 को, नायक खीम सिंह, मेजर सुधीर कुमार वालिया के नेतृत्व में, चार अन्य कमांडो की एक टुकड़ी के साथ जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के घने जंगल "हाफरूदा वन" में तलाशी और विनाश अभियान पर थे। अचानक, टुकड़ी को एक छिपा हुआ ठिकाना मिला, जिसमें लगभग बीस आतंकवादी थे। मेजर सुधीर ने तुरंत अपनी टीम संगठित की और आतंकवादी ठिकाने पर हमला कर दिया। इसके बाद भीषण गोलीबारी हुई। नायक खीम सिंह और उनके साथी सैनिकों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चार आतंकवादियों को मार गिराया। परन्तु इस दौरान नायक खीम सिंह गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गये। नायक खीम सिंह ने असाधारण साहस, वीरता और साथी सैनिकों के प्रति निष्ठा का परिचय देते हुए राष्ट्र की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दी। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से NK KHEEM SINGH- SM को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1970-06-16 |
| Martyr | Battle Casualty |
मेजर विवेक सिंह भंडराल, "सेना मेडल" (मरणोपरांत) हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के निवासी थे और उनका जन्म 16 जून 1970 को सैन्य अस्पताल, हैदराबाद में हुआ था। 19 दिसंबर 1992 को वे आई एम् ए से पास आउट हुए और उन्हें 9 मराठा लाइट इन्फैंट्री में नियुक्त किया गया और बाद में उन्हें 21 पैरा (एसएफ) में शामिल किया गया। 2002 के दौरान उनकी यूनिट को "ऑपरेशन पराक्रम" में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर में तैनात किया गया। 29 अगस्त 2002 को ख़ुफ़िया जानकारी के आधार पर कुपवाड़ा जिले के मच्छल सेक्टर में मेजर विवेक सिंह के नेतृत्व में एक ऑपरेशन शुरू किया गया। इसी दौरान दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई जिसमें मेजर विवेक सिंह की टीम ने दो आतंकवादियों को मार गिराया लेकिन खुद गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। उनके उत्कृष्ट साहस, नेतृत्व, सौहार्द और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें वीरता पुरस्कार "सेना मेडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Vivek Singh Bhandral SM को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1968-05-24 |
| Martyr | Battle Casualty |
मेजर सुधीर कुमार वालिया, "सेना मेडल", "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 24 मई 1968 को राजस्थान के जोधपुर में हुआ था। 20 साल की उम्र में वे आईएमए से सेकेंड लेफ्टिनेंट के रूप में पास आउट हुए। उन्हें प्रसिद्ध जाट रेजिमेंट की 4 जाट रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। वर्ष 1990 में 9 पैरा (एसएफ) में शामिल होने के लिए चुना गया। 29 अगस्त 1999 को मेजर सुधीर कुमार वालिया पांच कमांडो की एक टीम के साथ जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में "हफरुदा वन" के घने जंगल में तलाशी और विनाश अभियान पर थे। सामने से नेतृत्व करते हुए मेजर सुधीर ने अकेले ही 4 आतंकवादियों को मार गिराया। परन्तु इस प्रक्रिया के दौरान उनके पेट, नाक और छाती में गोलियां लगीं। घायल होने के बावजूद उन्होंने अपनी टीम का नेतृत्व किया परंतु वे वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर सुधीर वालिया को 26 जनवरी 2000 को देश का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "अशोक चक्र" (मरणोपरांत ) से सम्मानित किया गया। उनकी बहादुरी के लिए इससे पूर्व उनको दो बार सेना मेडल से भी अलंकृत किया गया था। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Sudhir Kumar Walia AC SM को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1939-08-29 |
| Martyr | Battle Casualty |
मेजर ग्रीश चंद्र वर्मा, "वीर चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 29 अगस्त 1939 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ था। 18 दिसम्बर 1960 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 3 डोगरा रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 1965 भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर में तैनात थी। मेजर ग्रीश चंद्र वर्मा की यूनिट को राजा और चांद टेकरी पिकेट के प्वाइंट 7702 पर कब्जा करने का काम सौंपा गया। 06 सितम्बर 1965 को सुबह 04:00 बजे स्टार्ट लाइन को पार करना था। मेजर ग्रीश चंद्र वर्मा के नेतृत्व में उनकी कंपनी ने 05:00 बजे प्वाइंट 7702 पर धावा बोल दिया। भीषण गोलीबारी के बाद दुश्मन के कुछ सैनिकों को बंकरों से खदेड़ दिया और 05:45 बजे तक पॉइंट 7702 पोस्ट पर कब्जा कर लिया। लेकिन उद्देश्य के अंतिम छोर में मेजर वर्मा के सिर में दुश्मन की गोली लगी और वे वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर ग्रीश चंद्र वर्मा को उनके अदम्य साहस, असाधारण नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए "वीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Greesh Chandra Verma VrC को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
| DOB | 1969-08-29 |
| Martyr | Battle Casualty |
मेजर मनोज तलवार का जन्म 29 अगस्त 1969 को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हुआ था। 1992 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें महार रेजिमेंट की तीसरी बटालियन में नियुक्त किया गया। जून 1999 के दौरान मेजर मनोज तलवार सियाचिन ग्लेशियर में तैनात 9 महार बटालियन में कार्यरत थे। उस दौरान भारतीय सेना ज़ोजिला दर्रे के पूर्व और पश्चिम में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चला रही थी। 13 जून 1999 को मेजर मनोज तलवार ऐसे ही एक गश्ती दल का नेतृत्व कर रहे थे। इसी दौरान वे दुश्मन की गोलीबारी की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति वीरगति को प्राप्त हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Manoj Talwar को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
| DOB | 1939-08-29 |
| Martyr | Battle Casualty |
मेजर ग्रीश चंद्र वर्मा, "वीर चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 29 अगस्त 1939 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ था। 18 दिसम्बर 1960 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 3 डोगरा रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 1965 भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर में तैनात थी। मेजर ग्रीश चंद्र वर्मा की यूनिट को राजा और चांद टेकरी पिकेट के प्वाइंट 7702 पर कब्जा करने का काम सौंपा गया। 06 सितम्बर 1965 को सुबह 04:00 बजे स्टार्ट लाइन को पार करना था। मेजर ग्रीश चंद्र वर्मा के नेतृत्व में उनकी कंपनी ने 05:00 बजे प्वाइंट 7702 पर धावा बोल दिया। भीषण गोलीबारी के बाद दुश्मन के कुछ सैनिकों को बंकरों से खदेड़ दिया और 05:45 बजे तक पॉइंट 7702 पोस्ट पर कब्जा कर लिया। लेकिन उद्देश्य के अंतिम छोर में मेजर वर्मा के सिर में दुश्मन की गोली लगी और वे वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर ग्रीश चंद्र वर्मा को उनके अदम्य साहस, असाधारण नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए "वीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Greesh Chandra Verma VrC को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







