आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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Naib Subedar Nafe Singh SM स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Battle Casualty
Naik Risal Singh स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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Sep Ram Singh Sheoran स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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Sepoy Balga Nand स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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Naik Pema Ram स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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नायक सुखदेव सिंह, वीर चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 10 मई 1962 को पंजाब के जालंधर जिले के भटनुरा गांव में हुआ था। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 9 पैरा (एसएफ) में नियुक्त किया गया। मार्च 1989 के दौरान उनकी यूनिट को IPKF के हिस्से के रूप में श्रीलंका में तैनात किया गया । 04 मार्च 1989 को खुफिया जानकारी के आधार पर नायक सुखदेव सिंह और उनके साथियों को उग्रवादियों के एक शिविर को नष्ट करने का काम सौंपा गया । जैसे ही सैनिक संदिग्ध क्षेत्र में पहुंचे उन्हें 150 से अधिक उग्रवादियों के शिविर का सामना करना पड़ा। इसी दौरान दोनों ओर से भीषण गोलीबारी शुरू हुई जिसमें नायक सुखदेव सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें नजदीकी सेना के अस्पताल में लाया गया जहाँ 13 मार्च 1989 को वे वीरगति को प्राप्त हो गए। नायक सुखदेव सिंह को उनके असाधारण साहस, अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "वीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Battle Casualty
सूबेदार सुभाष सेल का जन्म महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 13 महार रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। वर्ष 2011 में उनकी यूनिट ऑपरेशन मेधदूत के तहत जम्मू - कश्मीर के लदाख क्षेत्र में तैनात थी । यूनिट के जवानों को दुश्मन सेना की तरफ से अकारण गोलीबारी का खतरा बना रहता था इसीलिए सैनिकों को हमेशा सतर्कता बरतनी पड़ती थी। इसी प्रकार की गोलीबारी दुश्मन सेना की तरफ से 13 मार्च 2011 को हुई जिसका भारतीय सेना ने मुहतोड़ जवाब दिया परन्तु इसी दौरान सूबेदार सुभाष सेल घायल हुए और शहीद हो गए । सूबेदार सुभाष सेल एक प्रतिबद्ध सैनिक थे जिन्होंने देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







