आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | 1977-02-05 |
| Martyr | Battle Casualty |
कैप्टन अमित जोशी का जन्म 05 फरवरी 1977 को हिमाचल प्रदेश के शिमला में हुआ था। फरवरी 2002 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें ईएमई कोर में नियुक्त किया गया। फील्ड अनुभव प्राप्त करने के लिए 7/11 गोरखा राइफल्स में उनकी नियुक्ति हुई । सितंबर 2002 के दौरान उनकी यूनिट सियाचिन ग्लेशियर में तैनात थी जहाँ मौसम की स्थिति का सामना करने के अलावा दुश्मन की सेना से अकारण गोलीबारी का सामना भी करना पड़ता है । इसके आलावा इन चौकियों पर हिमस्खलन के नीचे दब जाना या किसी दरार में गिर जाना सामान्य घटनाएँ होती हैं । 07 सितंबर 2002 को कैप्टन अमित जोशी चमन पोस्ट पर दुश्मन की गतिविधियों की निगरानी कर रहे थे। इसी दौरान वे एक हिमस्खलन की चपेट में आ गए और शहीद हो गए। कैप्टन अमित जोशी एक बहादुर सैनिक और युवा ऊर्जावान अधिकारी थे जिन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Captain Amit Joshi को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!
| DOB | 1932-12-24 |
| Martyr | Battle Casualty |
स्क्वाड्रन लीडर अज्जमदा बोप्पय्या देवय्या, महावीर चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 24 दिसंबर 1932 को कर्नाटक के कोडागु जिले के मनचल्ली गांव में हुआ था। 06 नवंबर 1954 को वे वायु सेना में शामिल हुए और उन्हें एक लड़ाकू पायलट के रूप में नियुक्त किया गया । सितंबर 1965 के दौरान वे वायु सेना स्टेशन आदमपुर में कार्यरत थे जिसे "द टाइगर्स" के नाम से जाना जाता था। 07 सितम्बर 1965 को स्क्वाड्रन लीडर अज्जमदा बोप्पय्या देवय्या के स्क्वाड्रन को पंजाब सेक्टर की वायु रक्षा और दुश्मन के इलाके के अंदर हमारी अपनी हमलावर संरचनाओं को हवाई कवर प्रदान करने का काम सौंपा गया । स्क्वाड्रन लीडर देवय्या ने अपने बेहतर उड़ान कौशल का उपयोग करते हुए स्टारफाइटर के हमलों से सफलतापूर्वक बचाव किया। लेकिन दुश्मन के विमान ने उन्हें पकड़ लिया और अपनी मशीनगनों से हमला करके उनके विमान को क्षतिग्रस्त कर दिया। एक क्षतिग्रस्त विमान को उड़ाने के बावजूद स्क्वाड्रन लीडर देवय्या ने साहस का एक दुर्लभ प्रदर्शन करते हुए दुश्मन के स्टार-फाइटर पर हमला किया और उसे गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया। परन्तु स्क्वाड्रन लीडर देवय्या का विमान दुश्मन के इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया । एक ब्रिटिश लेखक जॉन फ्रिकर, जिन्हें युद्ध के बारे में लिखने के लिए पाकिस्तान द्वारा नियुक्त किया गया था उनके द्वारा भारतीय वायुसेना को सही घटना के बारे में पता चला और 1988 में स्क्वाड्रन लीडर देवय्या को "महावीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Sqn Ldr Ajjamada Boppayya Devayya MVC को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







