आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
नायक दमा राम का जन्म 09 जुलाई 1966 को राजस्थान के जोधपुर जिले की शेरगढ़ तहसील के चाबा गांव में हुआ थ।वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 20 जाट रेजिमेंट में नियुक्त किया गया । वर्ष 2000 में वे 5 राष्ट्रीय राइफल्स में नियुक्त थे जो यूनिट जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए तैनात थी। 05 मार्च 2000 को गांदरबल क्षेत्र के पतामबरा बादामपुर स्थित 5 राष्ट्रीय राइफल्स के शिविर पर आतंकवादियों ने आत्मघाती हमला कर दिया । आकस्मिक और अप्रत्याशित आक्रमण होते हुए भी 5 राष्ट्रीय राइफल्स के सैनिकों ने आतंकवादियों पर त्वरित पलटवार किया। इस भीषण मुठभेड़ में तीन आतंकवादी मारे गए। परन्तु नायक दमा राम गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







