आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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सेकेंड लेफ्टिनेंट गुरदीप सिंह सलारिया, शौर्य चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 28 फरवरी 1973 को पंजाब के पठानकोट जिले के नारायणपुर गांव में हुआ था। वर्ष 1994 में वे भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से पास आउट हुए और उन्हें 23 पंजाब रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। जनवरी 1996 के दौरान उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में तैनात थी और नियमित आधार पर आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में लगी हुई थी । 10 जनवरी 1996 को उनकी यूनिट ने खुफिया सूत्रों के आधार पर पुलवामा जिले के पंजगाम गांव में आतंकवादियों के खिलाफ एक खोज एवं विनाश अभियान शुरू किया जिसका नेतृत्व सेकेंड लेफ्टिनेंट गुरदीप सिंह सलारिया को सौपां गया। योजना के अनुसार उनकी टीम संदिग्ध क्षेत्र में पहुँची और ऑपरेशन शुरू किया। चुनौती दिए जाने पर आतंकवादियों ने सैनिकों पर गोलीबारी शुरू कर दी। दोनों ओर से भीषण गोलीबारी हुई जिसमें सेकेंड लेफ्टिनेंट गुरदीप सिंह सलारिया और उनके साथियों ने तीन कट्टर आतंकवादियों को मार गिराया। परन्तु भारी गोलीबारी के दौरान सेकेंड लेफ्टिनेंट गुरदीप सिंह सलारिया गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए । सेकेंड लेफ्टिनेंट गुरदीप सिंह सलारिया को उनके असाधारण साहस, कर्तव्य के प्रति समर्पण और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से सेकेंड लेफ्टिनेंट गुरदीप सिंह सलारिया, शौर्य चक्र (मरणोपरांत) को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
सिपाही नागराजू ममिदी का जन्म 28 फरवरी 1990 को आंध्र प्रदेश के विजयनगर जिले में हुआ था । वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 18 महार रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। अपनी यूनिट के साथ कुछ वर्षों तक सेवा करने के बाद उन्हें 51 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) में नियुक्त किया गया जो आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर में तैनात थी । 25 जनवरी 2017 को 51 आरआर के शिविर में एक भयानक हिमस्खलन हुआ जिसके परिणामस्वरूप सैनिक टनों बर्फ के नीचे दब गए। सेना द्वारा बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया गया परन्तु सिपाही नागराजू ममिदी और तेरह अन्य सैनिक शहीद हो गए। सिपाही नागराजू ममिदी एक बहादुर सैनिक थे जिन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए देश के सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
मेजर संजीव लाठर का जन्म 28 फरवरी 1983 को हरियाणा के भिवानी जिले के विद्या नगर में हुआ था। वर्ष 2004 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें गोरखा राइफल्स रेजिमेंट में नियुक्त किया गया । अपनी यूनिट में कुछ वर्षों तक सेवा करने के बाद उन्हें सेना के एविएशन विंग के लिए चुना गया। उन्होंने हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त किया और पश्चिम बंगाल के सुकना में स्थित 659 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन में नियुक्त हुए । 30 नवम्बर 2016 को मेजर संजीव को पूर्वी सीमा पर एक ऑपरेशनल मिशन का काम सौंपा गया था। योजना के अनुसार जैसे ही वे मिशन के लिए रवाना हुए उनके हेलीकॉप्टर में तकनीकी खराबी आ गई ओर हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें मेजर संजीव गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए । मेजर संजीव लाठर एक कुशल पायलट और समर्पित सैनिक थे जिन्होंने देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
लेफ्टिनेंट अमित बेनीवाल का जन्म 28 फरवरी 1985 को हरियाणा के झज्जर जिले की बेरी तहसील के सफीपुर गांव में हुआ था। 22 सितम्बर 2007 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें सेना आयुध कोर में नियुक्त किया गया एवं उनके पहले कार्यभार के रूप में उन्हें जम्मू-कश्मीर में तैनात 8 बिहार रेजिमेंट में नियुक्त किया गया । 2008 के दौरान वे अपनी यूनिट के घातक प्लाटून कमांडर के रूप में कार्य कर रहे थे। 17 नवम्बर 2008 को उनकी यूनिट के एक गश्ती दल के तीन सैनिक बर्फ के नीचे दब गए। लेफ्टिनेंट अमित बेनीवाल को खोज और बचाव अभियान चलाने का काम सौंपा गया। वे अपने सैनिकों को बचाने के लिए तुरंत कार्रवाई में जुट गए । परन्तु बचाव अभियान के दौरान खुद बर्फ में दब गए और शहीद हो गए । लेफ्टिनेंट अमित बेनीवाल ने भारतीय सेना की उच्चतम परंपराओं का पालन करते हुए राष्ट्र की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से लेफ्टिनेंट अमित बेनीवाल को उनकी जयंती पर बारंबार नमन | स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







