आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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मेजर सलमान अहमद खान का जन्म 22 अक्टूबर 1978 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ था। वे 22 साल की उम्र में सेना में शामिल हुए और उन्हें 4 सिख रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 05 मई 2005 को जब उनकी नियुक्ति 6 राष्ट्रीय राइफल्स में थी तो कुपवाड़ा जिले के एक गांव में आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में जानकारी मिली जिसके लिए मेजर सलमान अहमद खान का आक्रमण दल घटनास्थल पर पहुंचा और आतंकवादियों के साथ भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई। मेजर सलमान ने मुठभेड़ में एक आतंकवादी को मार गिराया। इस दौरान एक घर में छिपे अन्य आतंकवादियों ने स्वचालित हथियारों से मेजर सलमान को निशाना बनाया और वे गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में वीरगति को प्राप्त हुए। मेजर सलमान अहमद खान को उनके उत्कृष्ट साहस, अदम्य लड़ाई की भावना, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार, "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय द्वारा मेजर सलमान अहमद खान को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Subedar Sanjiv Kumar KC स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
कैप्टन सुनील खोखर,वीर चक्र ( मरणोपरांत) का जन्म 5 मई 1966 को हरियाणा के रोहतक जिले के कंसाला गांव में हुआ था। कमीशन के बाद उन्हें आर्टिलरी रेजिमेंट की 268 मीडियम रेजिमेंट में नियुक्त किया गया था। 07 मई, 1994 को कैप्टन सुनील खोखर को शिविर स्थल पर तोपखाने की गोलाबारूद को निर्देशित करने के लिए एक गश्ती दल के साथ जाने के लिए नियुक्त किया गया था। अपने कार्य को अंजाम देते समय दुश्मन ने उन्हें देख लिया और उन पर भारी गोलीबारी की गई। जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हुए । कैप्टन सुनील खोखर को उनके उत्कृष्ट धैर्य, दृढ़ संकल्प, कर्तव्य के प्रति समर्पण और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार, "वीर चक्र" से सम्मानित किया गया । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







