आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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| DOB | |
| Martyr | Battle Casualty |
मेजर कमलेश पांडे का जन्म उत्तराखंड के हलद्वानी जिले के दुगोली गांव में हुआ था । वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 21 डोगरा रेजिमेंट में नियुक्त किया गया । 2017 के दौरान मेजर कमलेश पांडे को 62 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात किया गया जो जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में तैनात थी। 02 अगस्त 2017 को मेजर कमलेश पांडे ने एक ऑपरेशन में भाग लिया और आतंकवादियों की घेराबंदी शुरू की। 03 अगस्त 2017 को जब ऑपरेशन चल रहा था तभी जवानों पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया। इसी दौरान मेजर कमलेश पांडे गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Kamlesh Pandey को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | |
| Martyr | Battle Casualty |
सवार विजय कुमार, कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) का जन्म हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के नैना देवी तहसील के उत्तापेर गांव में हुआ था । 2004 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 87 आर्म्ड रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। कुछ समय बाद उन्हें 22 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात किया गया जो आतंक विरोधी अभियानो में लगी थी । 02 अगस्त 2018 को सवार विजय कुमार और उनके साथियों ने संदिग्ध क्षेत्र की घेराबंदी की और योजना के अनुसार तलाशी अभियान शुरू किया। ऑपरेशन के दौरान सवार विजय कुमार ने दो आतंकवादियों को मार गिराया। लेकिन खुद गंभीर रूप से घायल हुए और 03 अगस्त 2018 को शहीद हो गए। सवार विजय कुमार को उनके उत्कृष्ट साहस, कर्तव्य के प्रति समर्पण और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश का दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Sowar Vijay Kumar KC को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1941-08-03 |
| Martyr | Battle Casualty |
मेजर हरभजन सिंह, महावीर चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 03 अगस्त 1941 को पंजाब के तरनतारन जिले की पट्टी तहसील के भट्टे भैनी गांव में हुआ था। 30 जून 1963 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 18 राजपूत रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 1967 के दौरान उनकी यूनिट सिक्किम में चीन के बॉर्डर पर तैनात थी। 11 सितम्बर 1967 को भारत ने अपनी सीमा पर कंटीले तारों की तीन परतों से बाड़ लगाना शुरू कर दिया जिस पर चीनी सेना को आपत्ति थी! मेजर हरभजन सिंह को एक पार्टी के प्रभारी अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया। जैसे ही तार बाधा का निर्माण शुरू किया चीनी सेना ने तार बाधा का विरोध किया और परिणामस्वरूप भारतीयों और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई हुई और चीनियों ने सामने से गोलियाँ चलाईं। मेजर हरभजन सिंह ने स्वयं तीन चीनी सैनिकों पर संगीन से हमला किया और फिर आगे बढ़कर उनकी लाइट मशीन गन जो भारतीय सैनिकों पर फायरिंग कर रही थी उसको हैंड ग्रेनेड फेंककर शांत कर दिया। परन्तु इसी दौरान वे गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर हरभजन सिंह को उनकी विशिष्ट वीरता, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए 26 जनवरी 1968 को देश के दूसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार "महावीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Harbhajan Singh MVC को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







