आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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कैप्टन तुषार महाजन, शौर्य चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 20 अप्रैल 1989 को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में हुआ था। कैप्टन तुषार 2010 में 100 प्रोबेशनरों में से 9 पैरा (विशेष बल) में शामिल होने वाले दो अधिकारियों और दस अन्य सैनिकों में से एक थे। वर्ष 2016 के दौरान, कैप्टन तुषार की इकाई जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में तैनात थी। 20 फरवरी 2016 को आतंकियों ने पंपोर में सीआरपीएफ के काफिले पर उस वक्त हमला कर दिया जब वे सर्च ऑपरेशन से लौट रहे थे. हमले में कुल 11 सीआरपीएफ जवान घायल हो गए और फिर आतंकवादी श्रीनगर शहर से लगभग 15 किमी दक्षिण में पुलवामा जिले के पंपोर में पास के बहुमंजिला उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआई) में घुस गए। कैप्टन तुषार महाजन को आतंकवादियों को खत्म करने के लिए बिल्डिंग इंटरवेंशन ऑपरेशन का नेतृत्व करने, योजना बनाने और निष्पादित करने का काम सौंपा गया था। गंभीर मुठभेड़ में वे गंभीर रूप से घायल होकर वीरगति को प्राप्त हो गए । उनकी बहादुरी, अदम्य लड़ाई की भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें वीरता पुरस्कार "शौर्य चक्र" से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Captain Tushar Mahajan SC स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Sepoy Pardeep Singh स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







