आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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हवलदार मदन लाल का जनà¥à¤® 02 मारà¥à¤š 1961 को आर à¤à¤¸ पà¥à¤°à¤¾ जमà¥à¤®à¥‚-कशà¥à¤®à¥€à¤° में हà¥à¤† था। 13 अपà¥à¤°à¥ˆà¤² 1978 को वे सेना में शामिल हà¥à¤ और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ 18 गà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤°à¥à¤¸ में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ किया गया । कारगिल यà¥à¤¦à¥à¤§ के दौरान, 05 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 1999 को हवलदार मदन लाल की टीम जिसके वे सेकà¥à¤¶à¤¨ कमांडर थे टाइगर हिल के पूरà¥à¤µà¥€ हिसà¥à¤¸à¥‡ पर कबà¥à¤œà¤¾ करने का काम सौंपा गया । इसी दौरान दोनों ओर से à¤à¥€à¤·à¤£ गोलीबारी हà¥à¤ˆ जिसमें उनकी टीम ने दो घà¥à¤¸à¤ªà¥ˆà¤ ियों को मार गिराया परनà¥à¤¤à¥ हवलदार मदन लाल गंà¤à¥€à¤° रूप से घायल हà¥à¤ और वीरगति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो गà¤à¥¤ स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Battle Casualty
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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नायक बलवान सिंह , सेना मेडल (मरणोपरांत) का जनà¥à¤® हरियाणा के रोहतक जिले के शांत गांव जिंदà¥à¤°à¤¨ कलां में हà¥à¤† था। नायक बलवान सिंह अपनी बहादà¥à¤°à¥€ और समृदà¥à¤§ विरासत के लिठपà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित जाट रेजिमेंट में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ हà¥à¤à¥¤ 1999 के दौरान, नायक बलवान सिंह की 17 जाट बटालियन को जमà¥à¤®à¥‚ और कशà¥à¤®à¥€à¤° में LOC पर तैनात किया गया था। 1999 में, à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सेना ने जमà¥à¤®à¥‚ और कशà¥à¤®à¥€à¤° के कारगिल कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥€ सेना और अरà¥à¤§à¤¸à¥ˆà¤¨à¤¿à¤• बलों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बड़े पैमाने पर घà¥à¤¸à¤ªà¥ˆà¤ का पता लगाया। सेना ने à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° से पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥€ घà¥à¤¸à¤ªà¥ˆà¤ ियों को खदेड़ने के लिठतà¥à¤°à¤‚त अपने बलों को जà¥à¤Ÿà¤¾à¤¯à¤¾à¥¤ 04 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ को 2100 बजे 17 जाट और 13 जेà¤à¤•े राइफ़ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बोफोरà¥à¤¸ की दो बैटरियों के साथ दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ के ठिकानों को कमज़ोर करने के बाद हमला किया गया। 05 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ को 0500 बजे तक,मेजर आरके सिंह और मेजर दीपक रामपाल की कमान में 17 जाट की ठऔर डी कंपनियों ने दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ के कड़े पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§ के बावजूद वà¥à¤¹à¥‡à¤² बैक और पिंपल पर कबà¥à¤œà¤¾ कर लिया। हालांकि, à¤à¤¸à¤¾ करते समय, नायक बलवान सिंह दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ की गोलीबारी में घायल हो गठऔर कारण वीरगति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो गà¤à¥¤ नायक बलवान सिंह à¤à¤• वीर और दृढ़ निशà¥à¤šà¤¯à¥€ सैनिक थे, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ का पालन करते हà¥à¤ अपने पà¥à¤°à¤¾à¤£ नà¥à¤¯à¥Œà¤›à¤¾à¤µà¤° कर दिठ। यà¥à¤¦à¥à¤§ के दौरान उनकी असाधारण बहादà¥à¤°à¥€, निसà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤¥ सेवा और सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š बलिदान के समà¥à¤®à¤¾à¤¨ में नायक बलवान सिंह को मरणोपरांत पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित "सेना मेडल " से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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गà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤° उदयमान सिंह का जनà¥à¤® जमà¥à¤®à¥‚-कशà¥à¤®à¥€à¤° के शामचक शहर में हà¥à¤† था । वे सेना में शामिल हà¥à¤ और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ 18 गà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤°à¥à¤¸ में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ किया गया। कारगिल यà¥à¤¦à¥à¤§ के दौरान 4 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 1999 को 18 गà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤°à¥à¤¸ की टीम को टाइगर हिल पर कबà¥à¤œà¤¾ करने की जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ दी गई । गà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤° उदयमान सिंह उस टीम का हिसà¥à¤¸à¤¾ थे। शिखर पर पहà¥à¤‚चने के बाद उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ की ओर से à¤à¤¾à¤°à¥€ गोलीबारी का सामना करना पड़ा जिसमें वे घायल हà¥à¤ और 05 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 1999 को वीरगति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो गà¤à¥¤ स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







