शहीद स्मारक एवं उपवन क्लब - स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविदयालय परिसर

 

आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।

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Death Anniversary Test

Col Kanwar Jaideep Singh Salaria SC SM
DOB 1961-07-18
Martyr Battle Casualty

कर्नल कंवर जयदीप सिंह सलारिया "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत), सेना मेडल का जन्म 18 जुलाई 1961 को पंजाब के पंगोली गांव में हुआ था। 1983 में वे एक अधिकारी के रूप में पास आउट हुए और उन्हें 5 डोगरा रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। मेजर के रूप में उन्हें आतंकवाद विरोधी अभियान में वीरता के लिए 1997 में उन्हें "शौर्य चक्र" से सम्मानित किया गया और उसके बाद उनकी गहरी प्रतिबद्धता और सैन्य नेतृत्व कौशल के लिए उन्हें "सेना मेडल" से भी सम्मानित किया गया। कर्नल कंवर जयदीप सिंह ने मार्च 2002 में 6 डोगरा के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में पदभार संभाला जो यूनिट राजौरी जिले के आतंकवादी प्रभावित क्षेत्र में तैनात थी। 18 अगस्त 2002 को यूनिट के टोही गश्ती दल की जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में सशस्त्र घुसपैठियों के एक समूह से मुठभेड़ हो गई। जिसमे भीषण गोलीबारी हुई। इसी दौरान कर्नल कंवर जयदीप सिंह सलारिया घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। कर्नल कंवर जयदीप सिंह सलारिया को उनकी वीरता, अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए दूसरी बार वीरता पुरस्कार, "शौर्य चक्र" से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Col Kanwar Jaideep Singh Salaria SC SM को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!

Sep Pabu Ram Thori
DOB 1990-06-07
Martyr Battle Casualty

सिपाही पाबू राम थोरी का जन्म 07 जून 1990 को राजस्थान के जोधपुर जिले के सालवा कलां गांव में हुआ था। 25 जून 2010 को वे सेना में भर्ती हुए और उन्हें राजपूत रेजिमेंट की 17 राजपूत बटालियन में नियुक्त किया गया और बाद में उन्हें जम्मू-कश्मीर में तैनात 44 आरआर में नियुक्त किया गया। 11 अगस्त 2015 को पाबू राम और उनके साथियों को शोपियां जिले में एक ऑपरेशन का काम सौंपा गया था। जब सैनिक ऑपरेशन के लिए जा रहे थे तो छिपे हुए आतंकियों ने स्वचालित हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग कर दिया। सिपाही पाबू राम और उनके साथियों ने आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब दिया लेकिन भीषण गोलीबारी के चलते सिपाही पाबू राम गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में 18 अगस्त 2015 को वे वीरगति को प्राप्त हो गए।। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Sep Pabu Ram Thori को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!

Rifleman Rajesh Poonia
DOB
Martyr

राइफलमैन राजेश पूनिया हरियाणा के कैथल जिले की गुहला तहसील के भागल गांव के रहने वाले थे। वे 2015 में आर्मी में शामिल हुए और मशहूर राजपुताना राइफल्स रेजिमेंट की 6 राज राइफल यूनिट में भर्ती हो गए। 2018 में, राइफलमैन राजेश पूनिया की यूनिट LOC के पास लद्दाख के काकर इलाके में तैनात थी। 18 अगस्त 2018 को, वह खतरनाक ढलानों, घाटियों और फिसलन वाले इलाके में लगभग 18000 फीट की ऊंचाई पर पेट्रोलिंग ड्यूटी कर रहे थे। खराब मौसम की वजह से बर्फीली ढलानों पर उनका पैर फिसल गया और वह 300 मीटर नीचे खाई में गिर गए। जिस कारण वे बुरी तरह घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गये। राइफलमैन राजेश पूनिया एक बहादुर और समर्पित सैनिक थे जिन्होंने अपनी ड्यूटी निभाते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Rifleman Rajesh Poonia को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!

Birth Anniversary


Naib Subedar Gurnam Singh AC
DOB 1935-08-18
Martyr Battle Casualty

नायब सूबेदार गुरनाम सिंह, "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 18 अगस्त 1935 को पंजाब के अमृतसर जिले के भुल्लर गाँव में हुआ था। 26 अगस्त 1955 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें बॉम्बे सैपर्स में नियुक्त किया गया। वर्ष 1971 में उन्हें प्रशिक्षक के रूप में कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग, पुणे में नियुक्त किया गया। 23 सितंबर 1973 को डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन के विजिटिंग स्टाफ और छात्र अधिकारियों के लिए कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग द्वारा एक प्रदर्शन की व्यवस्था की गई जिसकी जिम्मेदारी नायब सूबेदार गुरनाम सिंह को सौंपी गयी। जब वे फायरिंग के लिए चार्ज लाइन माइन क्लियरिंग को स्थापित करने का प्रदर्शन कर रहे थे तभी चार्ज का टेल इनिशिएटर समय से पहले ही सक्रिय हो गया। उन्होंने अपनी सुरक्षा की परवाह किये बिना लोगों के जीवन के खतरे को महसूस करते हुए उन्हें तुरंत सुरक्षित स्थान पर भागने का आदेश दिया। उसी समय एक भयानक विस्फोट हुआ जिसमें नायब सूबेदार गुरनाम सिंह वीरगति को प्राप्त हो गए। नायब सूबेदार गुरनाम सिंह को उनके सराहनीय साहस और कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण के लिए शांति काल के दौरान देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Naib Subedar Gurnam Singh AC को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!

Lt Col Ardeshir Burzorji Tarapore PVC
DOB 1923-08-18
Martyr Battle Casualty

लेफ्टिनेंट कर्नल अर्देशिर बुर्जोरजी तारापोर, "परमवीर चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 18 अगस्त 1923 को मुंबई में हुआ था। 01 जनवरी 1942 को वे हैदराबाद राज्य की सेना में शामिल हुए और उन्हें 7वीं हैदराबाद इन्फैंट्री में नियुक्त किया गया। हैदराबाद राज्य के भारत के साथ एकीकृत के बाद उन्हें पदोन्नति के साथ साथ 17 हॉर्स का कमांडिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया। 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध के दौरान 11 सितंबर 1965 को 17 हॉर्स ने पाकिस्तान के फिलोरा पर एक आश्चर्यजनक हमले की योजना बनाई। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच गहन युद्ध हुआ जिसमें दुश्मन के 13 टैंक नष्ट हो गए और पाकिस्तानी सेना चाविंडा क्षेत्र छोड़कर भाग गयी। इसी दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल तारापोर घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए हो गए। लेफ्टिनेंट कर्नल अर्देशिर बुर्जोरजी तारापोर को उनके उत्कृष्ट साहस, नेतृत्व, अदम्य भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार "परमवीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lt Col Ardeshir Burzorji Tarapore PVC को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!

Become a Member! Join us and become a member of Subharti Shaheed Smarak & Upwan Club.

Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.

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Gallery - Glimpses of remembering the Bravehearts!

Lets salute the martyrs for the sacrifices they made and thank them for saving our freedom.

Pricing -Membership Plans

General (सामान्य सदस्यता)

  • सदस्यों को यह अधिकार होगा कि वह शहीद उपवन में निःशुल्क प्रवेश कर सकें एवं भ्रमण कर सकें।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की कैन्टीन में 10 प्रतिशत छूट के साथ भोज्य पदार्थ उपलब्ध होंगे।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की दुकान पर उपलब्ध सामग्री 10 प्रतिशत छूट के साथ उपलब्ध होगी।
  • सदस्यों को मार्स रिसोर्ट्स हाॅटल तस्मय भोजनालय में 10 प्रतिशत छूट की दर से भोज्य उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • सभी सदस्यों को शहीदों एवं महापुरूषों की जयन्ती, पुण्यतिथि एवं विशिष्ट तिथियों को स्मरण कराने हेतु सूचनाएँ भेजी जाएंगी ताकि उन सूचनाओं से अपने परिवार के युवाओं, बच्चों को संस्कारित कर सकें एवं अपने मित्रों को भी सूचना दे सकें।
Rs.1,000 (Annually)
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Amazing place

Amazing place. Gives a sense of patriotism in yourself once you visit the Subharti Shaheed Smarak & Upwan.

Mukul Aggarwal

Visitor

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Magnificent Place

This magnificent place is situated at Subharti University Campus and it is especially filled with the spirit of national pride.

Sara Khan

Visitor

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Feel of Patriotism

There are many more stories regarding the patriotism of Indian people & many more monuments to glorify that too. Standing at this place all those stories made me remember how privileged & honored the Indians feel when it comes to talk about their patriotism.

Sagar Kumar

Visitor

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