आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
Read More
| DOB | 1969-05-19 |
| Martyr | Battle Casualty |
कैप्टन मनदीप सिंह का जन्म 19 मई 1969 को पंजाब के जालंधर में हुआ था। वे एयर डिफेंस आर्टिलरी कोर में नियुक्त हुए। कारगिल युद्ध 26 जुलाई 1999 को समाप्त हो गया था लेकिन अगस्त 1999 के दौरान एलओसी पर स्थिति तनावपूर्ण थी और सैनिक किसी भी स्थिति के लिए सतर्क थे। इसके अलावा उस दौरान अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा के तहत अनंतनाग में पर्याप्त संख्या में सेना के जवानों को तैनात किया गया था। कुपवाड़ा शहर को सीआरपीएफ के अधीन छोड़ दिया गया था और आतंकवादियों ने 4 आरआर बटालियन के सेना शिविर पर हमला करने के लिए एक उपयुक्त अवसर के रूप में देखा। इस प्रकार एक पूर्व नियोजित चाल में 06 अगस्त 1999 को लगभग प्रातः 01:15 बजे, कुपवाड़ा जिले के चक नुत्नुसा गांव में 4 आरआर बटालियन के सेना शिविर पर भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों के एक समूह ने हमला कर दिया। जिसमें भारी गोलीबारी के दौरान कैप्टन मनदीप को गोली लगी और वे वीरगति को प्राप्त हो गए। कैप्टन मनदीप सिंह को उनके अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार, "वीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से CAPT MANDEEP SINGH को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1974-06-16 |
| Martyr | Battle Casualty |
लेफ्टिनेंट दिग्विजय पंवार का जन्म 16 जून 1974 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के भलस्वा ईसापुर गांव में हुआ था। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 313 फील्ड रेजीमेंट में नियुक्त किया गया। 1998 के दौरान लेफ्टिनेंट दिग्विजय पंवार की यूनिट "ऑपरेशन राइनो" के हिस्से के रूप में असम के नलबाड़ी जिले में तैनात थी। 06 अगस्त 1998 को उनके एक सैन्य काफिले पर उल्फा उग्रवादियों ने एक आई ई डी विस्फोट कर दिया और उसके तुरंत बाद भारी हथियारों से सैनिकों पर गोलीबारी शुरू कर दी जिसमे लेफ्टिनेंट दिग्विजय पंवार गंभीर रूप से घायल हो हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। लेफ्टिनेंट दिग्विजय पंवार एक बहादुर सैनिक और एक अच्छे अधिकारी थे जिन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lieutenant Digvijay Panwar को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
| DOB | 1974-08-06 |
| Martyr | Battle Casualty |
लेफ्टिनेंट कणाद भट्टाचार्य, "सेना मेडल" (मरणोपरांत) का जन्म 06 अगस्त 1974 कोलकाता के बीटी रोड के समीप बारानगर में हुआ था। उन्हें भारतीय सेना की 8 सिख रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। अपने पहले असाइनमेंट के रूप में लेफ्टिनेंट कणाद की यूनिट जम्मू-कश्मीर में तैनात थी और वे कारगिल युद्ध में शामिल हो गए। 21 मई 1999 को लेफ्टिनेंट कणाद भट्टाचार्य को टाइगर हिल के पास उत्तरपूर्वी रिज पर पैर जमाने का काम सौंपा गया। रास्ता दुर्गम था और बर्फ से ढका हुआ था। वहाँ पर पहले से उपस्थित घुसपैठियों ने भारी स्वचालित और स्नाइपर फायर से गश्ती दल पर गोलीबारी शुरू कर दी। गोलीबारी समाप्त होने पर जब मदद के लिए अतिरिक्त टुकड़ी मौके पर पहुंची तो लेफ्टिनेंट कणाद भट्टाचार्य का कोई सुराग नहीं मिला और उन्हें लापता घोषित कर दिया गया। 15 जुलाई 1999 को टाइगर हिल पर कब्जे के बाद लेफ्टिनेंट कणाद का पार्थिव शरीर बर्फ से ढके युद्ध के मैदान से निकला गया। टाइगर हिल पर जोश, जज्बा और जुनून का परिचय देकर देश के लिए जान न्यौछावर करने वाले इस जांबाज को भारत सरकार ने "सेना मेडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Lt Kanad Bhattacharya को उनकी जयंती पर बारंबार नमन!
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







