शहीद स्मारक एवं उपवन क्लब - स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविदयालय परिसर

 

आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।

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Death Anniversary Test

Captain Chander Choudhary
DOB 1971-10-16
Martyr Battle Casualty

कैप्टन चंदर चौधरी सिहाग का जन्म 16 अक्टूबर 1971 को राजस्थान के बीकानेर जिले के डूंगरगढ़ तहसील के बीगावास रामसरा गांव में हुआ था। वर्ष 1998 में वे ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी, चेन्नई से पास आउट हुए और उन्हें 4 ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। जुलाई 2002 के दौरान उनकी यूनिट काउंटर इंसर्जेंसी ऑपरेशन के लिए जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के महोर तहसील में तैनात थी । 09 सितम्बर 2002 को उनकी यूनिट ने उधमपुर जिले के डुबरी गांव में एक खोज एवं विनाश ऑपरेशन शुरू किया जिसका नेतृत्व कैप्टन चंदर चौधरी सिहाग को सौंपा गया। कैप्टन चौधरी मौके पर पहुंचे और तुरंत अपनी घातक प्लाटून के साथ संदिग्ध क्षेत्र की घेराबंदी कर दी। इसी दौरान दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई जिसमें कैप्टन चौधरी और उनके सैनिकों ने एक के बाद एक छह आतंकवादियों को मार गिराया। परन्तु कैप्टन चौधरी को भी मुठभेड़ के दौरान गोली लगी और शहीद हो गए। कैप्टन चंदर चौधरी एक बहादुर और प्रतिबद्ध सैनिक थे जिन्होंने देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिये। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Captain Chander Choudhary को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!

Major Akash Singh SC
DOB 1975-04-15
Martyr Battle Casualty

मेजर आकाश सिंह,"शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 15 अप्रैल 1975 को जम्मू में हुआ था। 04 सितम्बर 1999 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 5 मराठा लाइट इन्फेंट्री में नियुक्त किया गया । 2009 के दौरान उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर में तैनात थी और आतंकवाद विरोधी अभियानों में लगी हुई थी । 09 सितम्बर 2009 को मेंढर सेक्टर में गश्त के दौरान मेजर आकाश और उनके सैनिकों द्वारा नियंत्रण रेखा के पास कुछ सशस्त्र आतंकवादियों के एक समूह की गतिविधि देखी गयीं और वे कार्रवाई में जुट गए। आतंकवादियों को चुनौती दिए जाने पर उन्होंने सैनिकों पर गोलीबारी शुरू कर दी । इसी दौरान भारी गोलीबारी हुई जिसमें मेजर आकाश और उनके सैनिकों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया। परन्तु इसी दौरान मेजर आकाश सिंह गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। मेजर आकाश सिंह को उनके अदम्य साहस, नेतृत्व, सौहार्द और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Akash Singh SC को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!

Birth Anniversary


CAPT VIKRAM BATRA- PVC
DOB 1974-09-09
Martyr Battle Casualty

कैप्टन विक्रम बत्रा, "परमवीर चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 09 सितंबर 1974 को हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में हुआ था। 06 दिसम्बर 1997 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स में नियुक्त किया गया । 1999 के दौरान उनकी यूनिट कारगिल युद्ध में शामिल थी। 20 जून 1999 को पॉइंट 5140 चोटी पर भीषण युद्ध के बाद उन्होंने उसे अपने कब्ज़े में ले लिया। इसके बाद पॉइंट 4875 पर कब्ज़ा करने की जिम्मेदारी कैप्टन विक्रम बत्रा को दी गयी। उन्होंने दुश्मन की भारी गोलीबारी के सम्मुख इस असंभव कार्य को भी पूरा कर प्वॉइंट 4875 पर भी कब्ज़ा कर लिया लेकिन इस युद्ध के दौरान वे गंभीर रूप से घायल हो गये और अपने गंभीर जख्मो के कारण 07 जुलाई 1999 को वीरगति को प्राप्त हुए। कैप्टन विक्रम बत्रा को शत्रु के सम्मुख अत्यन्त उत्कृष्ट व्यक्तिगत वीरता तथा उच्चतम कोटि के नेतृत्व के प्रदर्शन के लिए 15 अगस्त 1999 को देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार "परमवीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से CAPT VIKRAM BATRA- PVC को उनकी जयंती पर नमन!

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Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.

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Gallery - Glimpses of remembering the Bravehearts!

Lets salute the martyrs for the sacrifices they made and thank them for saving our freedom.

Pricing -Membership Plans

General (सामान्य सदस्यता)

  • सदस्यों को यह अधिकार होगा कि वह शहीद उपवन में निःशुल्क प्रवेश कर सकें एवं भ्रमण कर सकें।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की कैन्टीन में 10 प्रतिशत छूट के साथ भोज्य पदार्थ उपलब्ध होंगे।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की दुकान पर उपलब्ध सामग्री 10 प्रतिशत छूट के साथ उपलब्ध होगी।
  • सदस्यों को मार्स रिसोर्ट्स हाॅटल तस्मय भोजनालय में 10 प्रतिशत छूट की दर से भोज्य उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • सभी सदस्यों को शहीदों एवं महापुरूषों की जयन्ती, पुण्यतिथि एवं विशिष्ट तिथियों को स्मरण कराने हेतु सूचनाएँ भेजी जाएंगी ताकि उन सूचनाओं से अपने परिवार के युवाओं, बच्चों को संस्कारित कर सकें एवं अपने मित्रों को भी सूचना दे सकें।
Rs.1,000 (Annually)
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Amazing place

Amazing place. Gives a sense of patriotism in yourself once you visit the Subharti Shaheed Smarak & Upwan.

Mukul Aggarwal

Visitor

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Magnificent Place

This magnificent place is situated at Subharti University Campus and it is especially filled with the spirit of national pride.

Sara Khan

Visitor

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Feel of Patriotism

There are many more stories regarding the patriotism of Indian people & many more monuments to glorify that too. Standing at this place all those stories made me remember how privileged & honored the Indians feel when it comes to talk about their patriotism.

Sagar Kumar

Visitor

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