शहीद स्मारक एवं उपवन क्लब - स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविदयालय परिसर

 

आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।

Read More

Death Anniversary Test

Capt Dilip Kumar Jha KC
DOB 1977-01-02
Martyr

कैप्टन दिलीप कुमार झा, कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 02 जनवरी 1977 को बिहार के दरभंगा जिले के हरिपुर गाँव में हुआ था। 11 दिसम्बर 1999 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें आर्मी ऑर्डनेन्स कोर में नियुक्त किया गया। उनकी पहली नियुक्ति 7 जाट रेजिमेंट में हुई जो जम्मू एंड कश्मीर के पुंछ जिले में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए तैनात थी। 02 अक्टूबर 2002 को कैप्टन दिलीप कुमार पुंछ जिले के मेंढर सेक्टर में गश्त पर थे उसी समय उन्होंने आतंकवादियों के एक समूह को नाले के माध्यम से घुसपैठ करते हुए देखा। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने घुसपैठियों को घेरने के लिए तुरंत अपने सैनिकों को तैनात किया और घुसपैठियों पर गोलीबारी शुरू कर दी । इसी दौरान कैप्टन दिलीप और उनके सैनिकों ने कुल तीन आतंकवादियों को मार गिराया। परन्तु गोलीबारी के दौरान कैप्टन दिलीप को कई गोलियां लगीं और वे शहीद हो गए। कैप्टन दिलीप कुमार झा को उनके अनुकरणीय साहस, अडिग लड़ाई की भावना, सौहार्द और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Capt Dilip Kumar Jha KC को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!

Major Kumandur Prabhakar Vinay
DOB 1977-03-18
Martyr

मेजर कुमंदुर प्रभाकर विनय, कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 18 मार्च 1977 को बैंगलोर में हुआ था। वर्ष 1999 वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 53 मेडियम रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। 2007 के दौरान उन्हें कश्मीर घाटी के बारामूला क्षेत्र में तैनात 37 राष्ट्रीय राइफल्स में नियुक्त किया गया । 02 अक्टूबर 2007 को मेजर विनय की यूनिट ने बारामूला के एक गांव में छिपे आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए एक ऑपरेशन शुरू किया जिसका वे हिस्सा थे। जल्द ही उनके सैनिकों ने आतंकवादियों से संपर्क किया और चुनौती दिए जाने पर आतंकवादियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद कई घंटों तक चली भीषण गोलीबारी में कुल नौ उग्रवादियों को मार गिराया गया। परन्तु मेजर विनय के सिर और छाती में दुश्मन की कई गोलियाँ लगीं और वे शहीद हो गए । मेजर विनय को उनके अदम्य साहस, अदम्य लड़ाई की भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Kumandur Prabhakar Vinay को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!

Major Dinesh Raghu Raman AC
DOB 1978-04-06
Martyr Ashok Chakra

मेजर दिनेश रघु रमन, अशोक चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 06 अप्रैल 1978 को हुआ था। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 19 जाट रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। वर्ष 2006 में उन्हें 34 राष्ट्रीय राइफल्स में नियुक्त किया गया जो जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए तैनात थी। 02 अक्टूबर 2007 को मेजर रमन को बारामूला के एक गांव में छिपे आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए एक ऑपरेशन शुरू करने का काम सौंपा गया। मेजर रमन ने संदिग्ध क्षेत्र की घेराबंदी करने के लिए अपनी कंपनी को तैनात किया । मेजर रमन ने तुरंत स्थिति का विश्लेषण किया और कार्यवाही में जुट गए। इसी दौरान दोनों ओर से भीषण गोलीबारी हुई जिसमें मेजर दिनेश रघु रमन ने अकेले ही दो आतंकवादियों को मार गिराया परन्तु खुद गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। मेजर दिनेश रघु रमन को उनके असाधारण साहस, सौहार्द, लड़ाई की भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से Major Dinesh Raghu Raman AC को उनकी पुण्यतिथि पर नमन!

Birth Anniversary


NB SUB MANGEJ SINGH- VrC
DOB 1958-10-02
Martyr Battle Casualty

नायब सूबेदार मंगेज सिंह का जन्म 2 अगस्त 1958 को हुआ था और वे राजस्थान के नागौर जिले की परबतसर तहसील के हरनावा गाँव के रहने वाले थे। वे सेना में शामिल हुए और उन्हें राजपूताना राइफल्स रेजिमेंट की 11वीं बटालियन में भर्ती किया गया। 1999 में,कारगिल युद्ध के दौरान नायब सूबेदार मंगेज सिंह की यूनिट जम्मू और कश्मीर में लाइन ऑफ़ कंट्रोल (LoC) पर तैनात थी। नायब सूबेदार मंगेज सिंह की यूनिट को तुरतुक सेक्टर में ऑपरेशन थंडरबोल्ट में हिस्सा लेने का काम सौंपा गया। 6 जून 1999 को, पेट्रोल टीम लगभग 18,500 फीट की ऊंचाई पर तय जगह को सुरक्षित करने के लिए आगे बढ़ी। हालांकि, जैसे ही वे टारगेट के पास पहुंचे, दुश्मन ने उनकी हरकत देख ली, जिसने तुरंत आगे बढ़ रही सेना पर भारी और सटीक फायरिंग शुरू कर दी। हालात की गंभीरता को समझते हुए, नायब सूबेदार मंगेज सिंह ने मीडियम मशीन गन की कमान संभाली और एक खुली जगह से दुश्मन से भिड़ना शुरू कर दिया। इसी दौरान, नायब सूबेदार मंगेज सिंह के सीने में गोली लगने से वे गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गए। नायब सूबेदार मंगेज सिंह को युद्ध के दौरान उनकी ज़बरदस्त बहादुरी, हिम्मत और सबसे बड़े बलिदान के लिए, "वीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से NB SUB MANGEJ SINGH- VrC को उनकी जयंती पर नमन!

HAV HANGPAN DADA- AC
DOB 1979-10-02
Martyr Battle Casualty

हवलदार हंगपन दादा, "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 2 अक्टूबर 1979 को अरुणाचल प्रदेश के तिरप जिले के बोरदुरिया गांव में हुआ था। वे 28 अक्टूबर 1997 को पैराशूट रेजिमेंट की तीसरी बटालियन में नियुक्त हुए और 24 जनवरी 2008 को असम रेजिमेंट की चौथी बटालियन में नियुक्त हुए। 2016 के दौरान हवलदार दादा को 35 आरआर में तैनात किया गया। 26 मई 2016 को उनकी यूनिट के मीरा पोस्ट पर एक सैनिक ने संदिग्ध हरकत देखी। हवलदार दादा बिना किसी देरी के हरकत में आए और आतंकवादियों को घेरने के लिए अपने सैनिकों को तैनात कर दिया। हवलदार दादा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आतंकवादियों को ढेर कर दिया। इसके बाद हुई आमने-सामने की लड़ाई में हवलदार दादा ने अपनी राइफल की बट से तीसरे आतंकवादी को भी कुचल दिया और फिर उसकी गर्दन काट दी। हवलदार दादा ने इस ऑपरेशन में अकेले ही चार आतंकवादियों को मार गिराया। हालाँकि इसी बीच उनकी गर्दन में गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुए और वे वीरगति को प्राप्त हो गए। हवलदार हंगपन दादा को 2016 में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शांतिकालीन अभियानों के दौरान देश का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार, "अशोक चक्र" (मरणोपरांत ) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से HAV HANGPAN DADA- AC को उनकी जयंती पर नमन!

NK KASHMIR SINGH- VrC
DOB 1966-10-02
Martyr Battle Casualty

नायक कश्मीर सिंह पटवाल, "वीर चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 02 अक्टूबर 1966 को हुआ था और वे उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पनुन गांव के रहने वाले थे। 25 फरवरी 1984 को 18 साल की उम्र में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 16 बिहार बटालियन में नियुक्त किया गया। बाद में वे 18 गढ़वाल राइफल्स बटालियन में नियुक्त हुए। जून 1999 में, कर्नल एसके चक्रवर्ती की कमान में नायक कश्मीर सिंह की बटालियन को द्रास क्षेत्र में शामिल किया गया था। 1999 में लाहौर घोषणा पर हस्ताक्षर करने के तुरंत बाद, पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना की सर्दियों में खाली की गई चौकियों पर चुपके से कब्ज़ा कर लिया। 03 मई 1999 को, इन घुसपैठों का पता चला और 26 मई 1999 को, भारतीय वायु सेना (आईएएफ) द्वारा पहला हवा से ज़मीन पर हमला किया गया, जिसके बाद भारतीय सेना ने घुसपैठियों को भारतीय क्षेत्रों से बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू किया। उनकी यूनिट को पॉइंट 4700 पर कब्ज़ा करने का कार्य सौंपा गया। ऑपरेशनल प्लान के मुताबिक दोपहर तक थ्री पिंपल्स को खाली करना था और 30 जून तक जंक्शन पॉइंट पर कब्ज़ा करना था। यूनिट ने 28 जून 1999 को रात 8:30 बजे हमला शुरू किया। पक्के बेस से टारगेट तक जाना बहुत मुश्किल था क्योंकि दुश्मन लगातार आगे बढ़ रहे सैनिकों से आर्टिलरी और ऑटोमैटिक हथियारों से लड़ रहा था। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से NK KASHMIR SINGH- VrC को उनकी जयंती पर नमन!

Become a Member! Join us and become a member of Subharti Shaheed Smarak & Upwan Club.

Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.

Leaf Png
Leaf Png
Leaf Png
Gallery - Glimpses of remembering the Bravehearts!

Lets salute the martyrs for the sacrifices they made and thank them for saving our freedom.

Pricing -Membership Plans

General (सामान्य सदस्यता)

  • सदस्यों को यह अधिकार होगा कि वह शहीद उपवन में निःशुल्क प्रवेश कर सकें एवं भ्रमण कर सकें।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की कैन्टीन में 10 प्रतिशत छूट के साथ भोज्य पदार्थ उपलब्ध होंगे।
  • सदस्यों को शहीद उपवन एवं स्मारक परिसर की दुकान पर उपलब्ध सामग्री 10 प्रतिशत छूट के साथ उपलब्ध होगी।
  • सदस्यों को मार्स रिसोर्ट्स हाॅटल तस्मय भोजनालय में 10 प्रतिशत छूट की दर से भोज्य उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • सभी सदस्यों को शहीदों एवं महापुरूषों की जयन्ती, पुण्यतिथि एवं विशिष्ट तिथियों को स्मरण कराने हेतु सूचनाएँ भेजी जाएंगी ताकि उन सूचनाओं से अपने परिवार के युवाओं, बच्चों को संस्कारित कर सकें एवं अपने मित्रों को भी सूचना दे सकें।
Rs.1,000 (Annually)
Register Now
image
image
image
Tree image
Tree image

quote icon

Amazing place

Amazing place. Gives a sense of patriotism in yourself once you visit the Subharti Shaheed Smarak & Upwan.

Mukul Aggarwal

Visitor

quote icon

Magnificent Place

This magnificent place is situated at Subharti University Campus and it is especially filled with the spirit of national pride.

Sara Khan

Visitor

quote icon

Feel of Patriotism

There are many more stories regarding the patriotism of Indian people & many more monuments to glorify that too. Standing at this place all those stories made me remember how privileged & honored the Indians feel when it comes to talk about their patriotism.

Sagar Kumar

Visitor

Partner Image
Partner Image
Partner Image
Partner Image
Partner Image
Partner Image
Membership
Donate Now