आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
Read MoreBattle Casualty
Lance Naik Dinesh Singh स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Battle Casualty
Naik Rajesh Kumar स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Battle Casualty
मेजर रमन दादा, कीर्ति चक्र(मरणोपरांत) पंजाब के जालंधर से थे।वे वर्ष 1991 में सेना में शामिल हो गए। उन्हें प्रसिद्ध सिख रेजिमेंट की 11 सिख रेजिमेंट में कमीशन दिया गया। वर्ष 1999 में मेजर रमन दादा की यूनिट को 21 माउंटेन डिवीजन के तहत असम में तैनात किया गया था। 01 मई 1999 को सुरक्षा बलों को खुफिया स्रोतों से सूचना मिली कि मध्य असम के सोनीतर जिले के बिस्वनाथ चरियाली रिजर्व वन क्षेत्र में नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) से जुड़े कुछ कट्टर उग्रवादियों की मौजूदगी है। मेजर रमन दादा के नेतृत्व में उग्रवादियों को खदेड़ने के लिए एक अभियान शुरू करने का निर्णय लिया गया। वे जैसे ही सैनिक ठिकाने के पास पहुंचे, उग्रवादियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी । मेजर रमन दादा और उनके सैनिकों ने जवाबी कार्रवाई की और एक साहसी कार्रवाई में कुछ उग्रवादियों को मार गिराया। इसके बाद मेजर रमन दादा को एक अन्य आतंकवादी से हाथापाई करनी पड़ी। मेजर दादा ने एक आतंकवादी को मार गिराया, लेकिन इस प्रक्रिया में वे गंभीर रूप से घायल हो गए। हालांकि उनका खून बहुत ज़्यादा बह रहा था, लेकिन उन्होंने भागने से मना कर दिया और भाग रहे एक अन्य आतंकवादी को गोली मार दी, लेकिन बाद में वे वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर रमन दादा को उनके असाधारण साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, "कीर्ति चक्र" दिया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
करà¥à¤¨à¤² आशà¥à¤¤à¥‹à¤· शरà¥à¤®à¤¾, सेना मेडल (मरणोपरांत) का जनà¥à¤® 03 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 1975 को उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के बà¥à¤²à¤‚दशहर जिले के परवाना गांव में हà¥à¤† था । उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सेना की 19 गारà¥à¤¡à¥à¤¸ में नियà¥à¤•à¥à¤¤ किया गया। उनकी बहादà¥à¤°à¥€ के कारà¥à¤¯ के लिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ 26 जनवरी 2018 को वीरता के लिठ"सेना मैडल" और 15 अगसà¥à¤¤ 2019 "बार टू सेना मेडल" से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया। 01 मई 2020 को à¤à¤• संयà¥à¤•à¥à¤¤ तलाशी अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ के दौरान करà¥à¤¨à¤² आशà¥à¤¤à¥‹à¤· शरà¥à¤®à¤¾ को गोली लगी जिससे वे गंà¤à¥€à¤° रूप से घायल हो गठऔर वीरगति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो गà¤à¥¤ करà¥à¤¨à¤² आशà¥à¤¤à¥‹à¤· शरà¥à¤®à¤¾ को उनके उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ साहस नेतृतà¥à¤µ और सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š बलिदान के लिठ26 जनवरी 2021 को तीसरी बार वीरता पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार “सेना मेडल†(मरणोपरांत)से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Battle Casualty
Major Anuj Sood स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
लांस नायक ओम प्रकाश,” शौर्य चक्र”(मरणोपरांत ) पुत्र नेक राम का जन्म 02 मई 1983 को हिमाचल प्रदेश के चिखल में हुआ था। लांस नायक ओम प्रकाश ने जुगर के हाई स्कूल से दसवीं कक्षा पास की थी और 2003 में सेना में भर्ती हुए थे। आतंकवादी हमला: फरवरी 2016 लांस नायक ओम प्रकाश 5 जेएंडके राइफल्स में शामिल हुए थे और पैरा कमांडो कोर्स करने के बाद 9 पैरा (कमांडो) बटालियन का हिस्सा बन गए थे। 9 पैरा के लांस नायक ओम प्रकाश 21 फरवरी 2016 में कश्मीर घाटी में पुलवामा जिले के पंपोर इलाके में ईडीआई बिल्डिंग में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। लांस नायक ओम प्रकाश ने खुद पर गोली चलाकर एक आतंकवादी को मार गिराते हुए अनुकरणीय सौहार्द और अद्वितीय लचीलापन दिखाया। उन्हें अगस्त 2016 में मरणोपरांत “शौर्य चक्र” से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
लेफ्टिनेंट कर्नल एलम्बुलेसरी कलारिक्कल निरंजन ,शौर्य चक्र (मरणोपरांत ) का जन्म 02 मई 1981 को केरल के पालघाट जिले में हुआ था। उन्हें 17 सितंबर 2004 को कोर ऑफ इंजीनियर्स में कमीशन मिला और उन्हें असम के तेजपुर में 10 इंजीनियर्स रेजिमेंट में तैनात किया गया। 01 जनवरी 2016 को भारतीय वायु सेना के वायु सेना स्टेशन पठानकोट पर भारी हथियारों से लैस आतंकवादी समूह द्वारा हमला किया गया था। अगली सुबह लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन ने अपनी बॉम्ब डिस्पोसल टीम का नेतृत्व करते हुए उन्हें सौंपे गए कार्य को करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बूबी ट्रैप को निष्क्रिय करने के बाद आतंकवादियो के दो शवों को प्रभावी ढंग से संभाला। इसी दौरान एक बूबी ट्रैप सक्रिय हो गया और लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन अत्यंत गंभीर रूप से घायल हो गये और 03 जनवरी 2016 को शहीद हो गए। उनकी बहादुरी, अदम्य भावना और बलिदान के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन ई के को 15 अगस्त 2016 को मरणोपरांत "शौर्य चक्र" से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







