आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिखर कुलश्रेष्ठ का जन्म उत्तर प्रदेश के नोएडा में हुआ था। पढाई पूरी करने के बाद वे वायु सेना में शामिल हुए और उन्हें एक लड़ाकू पायलट के रूप में नियुक्त किया गया। 15 जुलाई 2013 को फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिखर कुलश्रेष्ठ को प्रशिक्षण के रूप में युद्ध कौशल का अभ्यास करने का काम सौंपा गया। इसी दौरान उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ और वे शहीद हो गए । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय की ओर से फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिखर कुलश्रेष्ठ को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
CAPT N KENGURUSE- MVC स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
SUB RANDHIR SINGH- VrC स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
मेजर सुशील ऐमा, कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 15 जुलाई 1966 को श्रीनगर में हुआ था। 1988 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें आर्मी एयर डिफेंस कोर में नियुक्त किया गया। 1997 में उन्हें आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर में तैनात 17 राष्ट्रीय राइफल्स में नियुक्त किया गया। 01 अगस्त 1999 को उनकी यूनिट को खबर मिली कि विदेशी भाड़े के आतंकवादियों का एक बड़ा समूह पास की पहाड़ी पर इकट्ठा हुआ है । मेजर सुशील और उनके सैनिकों ने जल्द ही दुश्मन से संपर्क किया और एक भीषण मुठभेड़ हुई जिसमे मेजर सुशील ने दो आतंकवादियों को मार गिराया। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान उनकी टीम ने कुल पांच आतंकवादियों को मार गिराया लेकिन खुद घायल हुए और शहीद हो गए। उनके असाधारण साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें देश का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय की ओर से मेजर सुशील ऐमा, कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का जन्म 15 जुलाई 1912 को उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के बीबीपुर गांव में हुआ था। 19 मार्च 1935 को वे एक युवा अधिकारी के रूप में भारतीय सेना में शामिल हुए और उनकी नियुक्ति 10वीं बलूच रेजिमेंट की 5वीं बटालियन में हुई । जब बलूच रेजिमेंट पाकिस्तान को आवंटित की गई तो ब्रिगेडियर उस्मान को डोगरा रेजिमेंट में स्थानांतरित कर दिया गया। मई 1948 में पाकिस्तान ने झंगर पर भारी बमबारी की लेकिन ब्रिगेडियर उस्मान ने उनके सभी प्रयासों को विफल कर दिया लेकिन इसी दौरान दुश्मन के एक गोले से वे घायल हुए और शहीद हो गए। उनके प्रेरक नेतृत्व और महान साहस के लिए उन्हें वीरता पुरस्कार "महावीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय की ओर से ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान, महावीर चक्र (मरणोपरांत) को उनकी जयंती पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







