आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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कैपà¥à¤Ÿà¤¨ अमित वरà¥à¤®à¤¾ का जनà¥à¤® 31 अगसà¥à¤¤ 1976 को पंजाब के अमृतसर में हà¥à¤† था। जून 1997 में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सेना की 9 महार में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ किया गया। 04 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 1999 को कैपà¥à¤Ÿà¤¨ अमित वरà¥à¤®à¤¾ को अपने छह साथी सैनिकों के साथ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° का सरà¥à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤£ करने और 15500 फीट पर à¤à¤• पोसà¥à¤Ÿ संà¤à¤¾à¤²à¤¨à¥‡ का काम सौंपा गया था।योजना के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° कैपà¥à¤Ÿà¤¨ अमित वरà¥à¤®à¤¾ अपने साथियों के साथ निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ कारà¥à¤¯ के लिठनिकल पड़े। जैसे ही कैपà¥à¤Ÿà¤¨ वरà¥à¤®à¤¾ और उनके लोग दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ के बंकर पर कबà¥à¤œà¤¼à¤¾ करने के लिठआगे बढ़ रहे थे, उन पर à¤à¤¾à¤°à¥€ गोलीबारी हà¥à¤ˆà¥¤ कैपà¥à¤Ÿà¤¨ वरà¥à¤®à¤¾ और उनके लोगों ने बहादà¥à¤°à¥€ से मà¥à¤•ाबला किया लेकिन दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨à¥‹à¤‚ की संखà¥à¤¯à¤¾ बहà¥à¤¤ अधिक थी। कैपà¥à¤Ÿà¤¨ वरà¥à¤®à¤¾ और उनके वीर सैनिक पीछे नहीं हटे और सौंपे गठकारà¥à¤¯ को पूरा करने में अपने पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ की आहà¥à¤¤à¤¿ दे दी। बाद में कैपà¥à¤Ÿà¤¨ वरà¥à¤®à¤¾ और उनके बहादà¥à¤° सैनिकों के शव बरामद हà¥à¤ जब à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सेना ने तोलोलिंग चोटी पर कबà¥à¤œà¤¼à¤¾ कर लिया । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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सिपाही कालू राम जाखड़ का जनà¥à¤® 12 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 1974 को राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के जोधपà¥à¤° जिले के खेड़ी चारना गांव में हà¥à¤† था । 28 अपà¥à¤°à¥ˆà¤² 1994 को उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सेना की 17 जाट में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ किया गया। 04 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 1999 को 17 जाट को पà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤‚ट 4875 पर कबà¥à¤œà¤¾ करने का काम सौंपा गया जिसका सिपाही कालू राम हिसà¥à¤¸à¤¾ थे। à¤à¥€à¤·à¤£ यà¥à¤¦à¥à¤§ में सिपाही कालू राम और उनके साथियों ने दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ के दो बंकरों पर कबà¥à¤œà¤¼à¤¾ कर लिया लेकिन तीसरे बंकर की लड़ाई के दौरान वे गंà¤à¥€à¤° रूप से घायल हà¥à¤ और वीरगति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो गà¤à¥¤ स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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Flt Lt Pramod Kumar Singh स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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WG. CDR. MANDEEP SINGH DHILLON स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
कैपà¥à¤Ÿà¤¨ गà¥à¤°à¤œà¤¿à¤‚दर सिंह सूरी, महावीर चकà¥à¤° (मरणोपरांत) का जनà¥à¤® 04 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 1974 को हरियाणा के अंबाला जिले में à¤à¤• सैनà¥à¤¯ परिवार में हà¥à¤† था। 07 जून 1997 को वे सेना में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ हà¥à¤ और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सेना आयà¥à¤§ कोर में नियà¥à¤•à¥à¤¤ किया गया ।09 नवमà¥à¤¬à¤° 1999 को पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥€ सेना ने à¤à¤¾à¤°à¥€ तोपखाने से à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ चौकी पर हमला किया। दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ की लगातार शतà¥à¤°à¥à¤¤à¤¾à¤ªà¥‚रà¥à¤£ कारà¥à¤°à¤µà¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚ को समापà¥à¤¤ करने के लिठà¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सेना ने à¤à¤• अचà¥à¤›à¥€ तरह से समनà¥à¤µà¤¿à¤¤ अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ शà¥à¤°à¥‚ करने का फैसला किया। इस ऑपरेशन को "ऑपरेशन बिरसा मà¥à¤‚डा" कहा गया। सामने से नेतृतà¥à¤µ करते हà¥à¤ कैपà¥à¤Ÿà¤¨ गà¥à¤°à¤œà¤¿à¤‚दर आगे बढ़े और अपनी à¤à¤•े 47 राइफल से दो दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ सैनिकों को मार डाला और दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ की मशीन गन को शांत कर दिया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤• बंकर में दो हथगोले फेंके। इसके बाद वे गोलियां बरसाते हà¥à¤ बंकर में घà¥à¤¸ गठऔर दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ के à¤à¤• और सैनिक को मार गिराया। इस समय वे गंà¤à¥€à¤° रूप से घायल हो गये और वीरगति को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हो गà¤à¥¤ कैपà¥à¤Ÿà¤¨ गà¥à¤°à¤œà¤¿à¤‚दर सिंह सूरी को उनकी असाधारण बहादà¥à¤°à¥€, लड़ाई की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ और à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सेना की उचà¥à¤šà¤¤à¤® परंपराओं में सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š बलिदान के लिठदेश के दूसरे सबसे बड़े वीरता पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार "महावीर चकà¥à¤°" (मरणोपरांत) से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







