आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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कैप्टन सूरज शर्मा का जन्म 15 अक्टूबर 1975 को पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में हुआ था। जून 1998 में वे भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट हुए और उन्हें 2 पैराशूट रेजिमेंट (एस ऍफ़) में नियुक्त किया गया। जुलाई 2001 के दौरान उनकी यूनिट को "ऑपरेशन रक्षक" के हिस्से के रूप में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर में तैनात किया गया। 08 जुलाई 2001 को उनकी यूनिट ने कुपवाड़ा जिले के राजवार जंगल में एक तलाशी अभियान शुरू किया। कैप्टन सूरज शर्मा को 20 सैनिकों की एक टीम के साथ उस ऑपरेशन का नेतृत्व करने का काम सौंपा गया था। जब सैनिकों द्वारा तलाशी अभियान जारी था तभी छिपे हुए आतंकवादियों ने सैनिकों पर गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई जिसमें कैप्टन सूरज शर्मा को गोलियां लगीं और वे शहीद हो गए। कैप्टन सूरज शर्मा एक प्रतिबद्ध सैनिक और साहसी अधिकारी थे जिन्होंने आगे बढ़कर नेतृत्व किया और अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से कैप्टन सूरज शर्मा को उनकी जयंती पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
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कैप्टन सज्जन सिंह मलिक, कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) का जन्म राजस्थान के चुरू जिले की राजगढ़ तहसील के कीर्तन गांव में हुआ था। आईएमए से पास आउट होने के बाद उन्हें 10 पैरा (एसएफ) में नियुक्त किया गया। 2004 के दौरान कैप्टन सज्जन सिंह मलिक की यूनिट आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जम्मू-कश्मीर में तैनात थी। 07 जुलाई 2004 की रात को बारामूला जिले की बांदीपुर तहसील में कैप्टन मलिक और उनकी टीम ने एक योजनाबद्ध ऑपरेशन शुरू किया जिसमे उन्होंने तीन आतंकवादियों को मार गिराया। लेकिन इसी दौरान कैप्टन सज्जन सिंह मलिक गंभीर रूप से घायल हुए और 08 जुलाई 2004 को वीरगति को प्राप्त हुए। कैप्टन सज्जन सिंह मलिक को उनके उत्कृष्ट साहस, अदम्य लड़ाई की भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय की ओर से कैप्टन सज्जन सिंह मलिक, कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन ! स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन!
Naib Subedar Aram Singh Gurjar स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







