आम जनता को यह अवगत कराना आवश्यक है कि भारत को स्वतन्त्रता बिना खड्ग, बिना ढ़ाल के ना तो मिली और ना ही एयर कन्डीशन्ड कमरों में या सभागारों में बैठकर मीठी-मीठी बातों से उसकी सुरक्षा की जा रही है। भारत को स्वतन्त्रता असंख्य वीरों के बलिदानों के फलस्वरूप मिली है एवं आज भी देश के भीतर एवं देश की सीमाओं पर उसकी प्रतिदिन सुरक्षा सिपाहियों एवं सैनिकों के बलिदानों से की जा रही है। हमारा यह दायित्व है कि हम ऐसे वीरों के परिवारों, जिन्होंने देश को स्वतन्त्रता दिलाने एवं उसकी रक्षा करने के लिए अपने जीवन का बलिदान कर दिया हो समाज में विशेष सम्मान दिलवाएं एवं उनको हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराएं। ऐसे सैनिकों के परिवारों को भी उचित मान-सम्मान, संरक्षण दिलाया जाए जोकि सीमा पर विषम परिस्थितियों में रहकर भी हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं।
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राइफलमैन मोहम्मद आरिफ शफी आलम खान पठान का जन्म 10 मार्च 1996 को गुजरात के वडोदरा जिले के नवायार्ड गांव में हुआ था। 2015 में सेना में शामिल हुए और उन्हें 18 जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स में नियुक्त किया गया। 2019 के दौरान उनकी यूनिट जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में तैनात थी। 22 जुलाई 2019 को पाकिस्तानी सेना के जवानों ने राजौरी में सीमा पार से भारतीय चौकियों पर अकारण गोलीबारी की । भारतीय सेना ने पाकिस्तानी आक्रमण का मुंहतोड़ जवाब दिया। परन्तु इसी दौरान राइफलमैन मोहम्मद आरिफ शफी आलम खान पठान गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
कर्नल गुरबीर सिंह सरना, कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) का जन्म 10 मार्च 1966 को नई दिल्ली में हुआ था । वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 9 ग्रेनेडियर रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। जून 2005 में उन्हें जम्मू कश्मीर में तैनात 29 राष्ट्रीय राइफल्स (आर आर) के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया गया। 23 दिसम्बर 2006 को उनकी यूनिट को खुफिया सूत्रों से बारामूला सेक्टर के बेहरामपुर में चार कट्टर आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में विश्वसनीय जानकारी मिली। उन्होंने आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए एक खोज और विनाश अभियान शुरू किया जिसका नेतृत्व कर्नल गुरबीर सिंह सरना ने स्वयं किया क्योंकि वे हमेशा आगे से नेतृत्व करने में विश्वास करते थे। ऑपरेशन शुरू होते ही सैनिकों ने आतंकवादियों को घेर लिया और कर्नल सरना तलाशी लेने के लिए अपने सैनिकों के साथ घर में दाखिल हुए जहाँ आतंकवादी छिपे हुए थे । चुनौती दिए जाने पर एक आतंकवादी ने सैनिकों पर गोलीबारी शुरू कर दी। इसी दौरान कर्नल सरना ने 2 आतंकवादियों को मार गिराया और तीन अन्य आतंकवादियों को घायल कर दिया । परन्तु इसी दौरान वे खुद गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। कर्नल गुरबीर सिंह सरना को उनके वीरतापूर्ण कार्य और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के दूसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "कीर्ति चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया । स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से जयंती पर बारंबार नमन !
Our endeavour is to spread awareness for the forthcoming generations to learn and recognise the sacrifice made by our young officers and men of the Armed Forces and an attempt to honour them by remembering them.







