सीएचएमई आशु सिंह राजावत, शौर्य चक्र (मरणोपंत) का जन्म राजस्थान के नागौर जिले के चितावा गांव में हुआ था। 2016 के दौरान वे भारतीय नौसेना के सेंटॉर श्रेणी के विमानवाहक पोत आईएनएस विराट में चीफ मैकेनिकल इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। आईएनएस विराट 2013 में आईएनएस विक्रमादित्य के कमीशन होने से पहले नौसेना का प्रमुख पोत था।
06 मार्च 2016 को लगभग 4:00 बजे शाम को देश के प्रतिष्ठित विमानवाहक पोत आईएनएस विराट के 'बी' बॉयलर रूम में पानी के पाइपों को ऊष्मा इन्सुलेशन प्रदान करने वाली सामग्री सुलगने लगी। सीएचएमई आशु सिंह ने सही प्रक्रियागत कदम उठाकर मशीनरी की सुरक्षा में अनुकरणीय साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने अन्य सभी वॉच कीपर और स्टैंडिंग सी फायर पार्टी (एसएसएफपी) कर्मियों के साथ 35 मिनट तक लगातार आग पर सफलतापूर्वक काबू पाने में अग्रणी भूमिका निभाई।
सीएचएमई आशु सिंह ने भीषण गर्मी और भारी धुएं के बीच खुद की सुरक्षा के बारे में सोचे बिना जो कार्य किया वह अनुकरणीय था और इससे एक बड़ी आपदा टल गई। उन्होंने अन्य अग्निशमन कर्मियों को समय पर बॉयलर रूम से बाहर निकालकर उनकी जान भी बचाई। इस प्रक्रिया में सीएचएमई आशु सिंह ने बिना किसी डर और अपनी जान की परवाह किए, अदम्य वीरता, अनुकरणीय नेतृत्व, निस्वार्थ सेवा का परिचय दिया और भारतीय नौसेना की सच्ची परंपराओं के अनुसार "स्वयं से पहले सेवा" का एक उदाहरण पेश किया। सीएचएमई आशु सिंह ने दर्द और घुटन की परवाह किए बिना साथी जहाज़ियों और नौसेना की सबसे बड़ी और सबसे महंगी संपत्ति आईएनएस विराट की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए अपने अपने प्राण न्योछावर कर दिए । सीएचएमई आशु सिंह को उनके साहस और सर्वोच्च बलिदान के लिए वीरता पुरस्कार "शौर्य चक्र" (मरणोपंत) से सम्मानित किया गया।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से सीएचएमई आशु सिंह राजावत, शौर्य चक्र (मरणोपंत) को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन !




