हवलदार पलविंदर सिंह का जन्म 17 सितंबर 1980 को पंजाब के गुरदासपुर जिले की बटाला तहसील के राय चक गांव में हुआ था । उनके पिता श्री संतोख सिंह जो सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में सेवारत थे। पलविंदर सिंह वर्ष 2000 में बीस वर्ष की आयु में सेना में शामिल हुए। उन्हें प्रसिद्ध सिख रेजिमेंट के 10 सिख रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। जो अपने बहादुर सैनिकों और विभिन्न युद्ध सम्मानों के लिए जाना जाता है।
2017 के दौरान हवलदार पलविंदर सिंह की यूनिट को कुलगाम के काजीगुंड क्षेत्र में नियंत्रण रेखा पर तैनात किया गया था। उस क्षेत्र में नियंत्रण रेखा बहुत अस्थिर और सक्रिय है जहां दुश्मन अक्सर अकारण गोलीबारी करता है। सुरक्षा बलों द्वारा निरंतर आधार पर सशस्त्र गश्ती दल लगाकर इसकी निगरानी और रखवाली की जाती है। 04 दिसंबर 2017 को सेना का एक काफिला श्रीनगर में ऑपरेशन करने के लिए उधमपुर से निकला जिसमें हवलदार पलविंदर सिंह शामिल थे। जब सेना का काफिला खानबल क्षेत्र को पार कर रहा था तो रास्ते में झाड़ियों के पीछे सुरक्षित स्थानों पर छिपे आतंकवादियों ने उन पर घात लगाकर हमला किया। आतंकवादियों ने पूर्व नियोजित चाल में यह हमला किया था। उन्होंने भारी स्वचालित हथियारों से काफिले पर हमला किया और रॉकेट और ग्रेनेड दागे। काफिले का अधिकांश हिस्सा जिसमें हवलदार पलविंदर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और शहीद हो गए।
उनके पार्थिव शरीर को उनके गृहनगर लाया गया जहाँ पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। सैकड़ों नागरिकों और सेना के जवानों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। हवलदार पलविंदर सिंह एक बहादुर और समर्पित सैनिक थे, जिन्होंने 37 साल की छोटी उम्र में देश की सेवा में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। हवलदार पलविंदर सिंह के सर्वोच्च बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
हवलदार पलविंदर सिंह के परिवार में उनकी पत्नी पलविंदर कौर, बेटी सिमरनदीप कौर और बेटा सहजदीप हैं।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से हवलदार पलविंदर सिंह को उनकी जयंती पर नमन!




