कैप्टन कपिल सिंह थापा, "महावीर चक्र" (मरणोपरांत) का जन्म 02 नवम्बर 1937 उत्तराखंड के देहरादून जिले के पंडितवाड़ी गांव में हुआ था। 30 जून 1963 को वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 3 जाट रेजिमेंट में नियुक्त किया गया। सितम्बर 1965 के दौरान उनकी यूनिट पंजाब सेक्टर में तैनात थी। इसी दौरान पाकिस्तान ने जम्मू और कश्मीर के अखनूर पर कब्जा करने के उद्देश्य से "ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम" शुरू किया। तभी भारतीय सेना ने भी अपने युद्ध का क्षेत्र पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र को बनाया ताकि दुश्मन को पंजाब की रक्षा के लिए अखनूर ऑपरेशन में लगे सैनिकों को स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया जा सके। 21 सितम्बर 1965 को कैप्टन कपिल सिंह थापा को डोगराई गांव के उत्तर-पश्चिमी छोर पर कब्जा करने का काम सौंपा गया। वे अपने साथियों के साथ मिलकर दिए गए लक्ष्य पर कब्ज़ा करने में सफल रहे। परन्तु इसी दौरान भारी गोलीबारी में कैप्टन थापा गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। कैप्टन कपिल सिंह थापा को उनके अदम्य साहस, उत्कृष्ट नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के दूसरे सबसे बड़े वीरता पुरस्कार "महावीर चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।




