गनर दिवाकर दादूराम फलटणकर, "सेना मेडल" (मरणोपरांत) का जन्म 12 सितंबर 1984 को हुआ था। वे सितंबर 2003 को भारतीय सेना में शामिल हुए और उन्हें 'द रेजीमेंट ऑफ आर्टिलरी' की 224 फील्ड रेजीमेंट में नियुक्त किया गया। सितंबर 2009 के दौरान जब देश की सुरक्षा के लिए जम्मू-कश्मीर में काउंटर-इंसर्जेंसी अभियान चरम पर थे, तब वे सेना की विशिष्ट आतंकवाद-रोधी शाखा 32 राष्ट्रीय राइफल्स (32 RR) में प्रतिनियुक्ति पर कुपवाड़ा सेक्टर में तैनात थे। 21 सितंबर 2009 को भारतीय सेना को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा सेक्टर के तंगमुल्ला के घने जंगलों में खूंखार आतंकवादियों के छिपे होने की खुफिया जानकारी के आधार पर "ऑपरेशन पीर स्थान" शुरू किया गया। ऑपरेशन के दौरान उनकी यूनिट का सामना भारी हथियारों से लैस लश्कर के आतंकवादियों से हो गया। जंगलों की आड़ लेकर दुश्मनों ने उनकी यूनिट पर भारी गोलीबारी शुरू कर दी। तभी गनर दिवाकर दादूराम फलटणकर ने अदम्य साहस और उत्कृष्ट सैन्य कौशल का परिचय देते हुए आगे बढ़कर आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब दिया और अकेले ही 3 आतंकवादियों को मार गिराया। हालाँकि कई गोलियां लगने से वे गंभीर रूप से घायल हुए और वीरगति को प्राप्त हो गये। गनर दिवाकर दादूराम फलटणकर को उनके अदम्य साहस, उत्कृष्ट नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार "सेना मेडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।




