मेजर कुणाल गोसावी का जन्म महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पंढरपुर में 19 मार्च 1986 के दिन हुआ था। मेजर कुणाल 2006 में सेना में शामिल हुए और उन्हें आर्टिलरी की 166 मीडियम रेजिमेंट में नियुक्त किया गया था। नवंबर 2016 के दौरान मेजर कुणाल जम्मू-कश्मीर के नगरोटा में स्थित अपनी यूनिट में कार्यरत थे। 29 नवंबर के दिन भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों के एक समूह ने नगरोटा में सुबह लगभग 5.30 बजे उनकी आर्टिलरी यूनिट पर हमला किया और चार सैनिकों को मार डाला। इसके बाद आतंकवादी अधिक जनहानि करने के प्रयास में दो आवासीय भवनों में घुस गए। हमले की सूचना मिलते ही मेजर कुणाल तुरंत हरकत में आए और यूनिट की क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी) को सक्रिय कर दिया। टीम का नेतृत्व करते हुए मेजर कुणाल घटनास्थल पर पहुंचे और घायल सैनिकों और परिवार के सदस्यों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। आवासीय क्षेत्र में सैनिकों और उनके परिवारों की सुरक्षा के लिए मेजर कुणाल और उनके सैनिकों ने क्षेत्र की घेराबंदी कर दी।
भीषण गोलीबारी के दौरान मेजर कुणाल को गोली लग गई और वे गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही मेजर कुणाल वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर कुणाल गोसावी और उनकी टीम ने न केवल आतंकवादियों से मुकाबला किया और आतंकवादियों को बंधक बनाया और निर्दोष लोगों का नरसंहार करने के नापाक मंसूबों को रोका, बल्कि उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि आतंकवादी शिविर क्षेत्र में फैल न सकें और महत्वपूर्ण सैन्य संपत्तियों को नुकसान न पहुंचा सकें। मेजर कुणाल गोसावी एक वीर सैनिक और एक साहसी अधिकारी थे, जो एक अच्छे सैन्य नेता की तरह आगे बढ़कर नेतृत्व करते थे। उनके अदम्य साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें वीरता पुरस्कार, "शौर्य चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय एवं समस्त सुभारती परिवार द्वारा मेजर कुणाल गोसावी को उनकी जयंती पर बारंबार नमन !




