लेफ्टिनेंट कणाद भट्टाचार्य का जन्म 06 अगस्त 1974 कोलकाता के बीटी रोड के समीप बारानगर में हुआ था। एक आयकर अधिकारी के पुत्र कैप्टन कणाद का जन्म और पालन-पोषण उत्तरी कलकत्ता में श्यामबाजार के पास ताला में हुआ। उन्होंने सेंट जेम्स स्कूल से पढ़ाई की और कोलकाता के एसए जयपुरिया कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की।लेफ्टिनेंट कणाद अपने छात्र जीवन के दौरान एक उत्साही खिलाड़ी थे और बहुत अच्छा क्रिकेट खेलते थे। उनका मार्शल आर्ट की ओर भी रुझान था और वह कराटे ब्लैक बेल्ट होल्डर थे।
लेफ्टिनेंट कणाद के मन में हमेशा सशस्त्र बलों में शामिल होने का विचार था और उन्होंने कॉलेज की शिक्षा के बाद अपने सपने को पूरा किया। वे ओटीए के माध्यम से सेना में शामिल हुए और उन्हें प्रसिद्ध सिख रेजिमेंट के 8 सिख में नियुक्त किया गया जो अपने निडर सैनिकों और कई युद्ध सम्मानों के लिए जानी जाने वाली सबसे पुरानी रेजिमेंटों में से एक है। कमीशनिंग के बाद अपने पहले असाइनमेंट के रूप में लेफ्टिनेंट कणाद को उस यूनिट में तैनात किया गया जो जम्मू-कश्मीर में तैनात थी और कारगिल युद्ध में शामिल हो गए।
मई 1999 में पाकिस्तानी घुसपैठ की खबरें आई थीं और उस दौरान लेफ्टिनेंट कणाद भट्टाचार्य की यूनिट को एलओसी पर टाइगर हिल के पास तैनात किया गया था। मई 1999 के तीसरे सप्ताह तक इन रिपोर्टों की वैधता सिद्ध हो गई और यह स्थापित हो गया कि टाइगर हिल क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर घुसपैठ की गई थी। नतीजतन 21 मई को लेफ्टिनेंट कणाद भट्टाचार्य को टाइगर हिल के पास उत्तरपूर्वी रिज पर पैर जमाने का काम सौंपा गया। रास्ता दुर्गम था और बर्फ से ढका हुआ था। उन्होंने भारी हथियारों के साथ नीचे आ रहे घुसपैठियों की हरकत का पता लगाया। घुसपैठियों ने भारी स्वचालित और स्नाइपर फायर से गश्ती दल पर गोलीबारी शुरू कर दी। लेफ्टिनेंट कणाद भट्टाचार्य ने गश्ती दल को दो समूहों में विभाजित किया और विभिन्न स्थानों से घुसपैठियों को उलझाना शुरू कर दिया जिससे उत्कृष्ट पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन हुआ। लेफ्टिनेंट कणाद के गश्ती दल और घुसपैठियों के बीच भारी गोलीबारी जारी रही। बाद में जब मदद के लिए अतिरिक्त टुकड़ी मौके पर पहुंची तो लेफ्टिनेंट कणाद भट्टाचार्य का कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार 21 मई, 1999 को उन्हें लापता घोषित कर दिया गया। 15 जुलाई 1999 को टाइगर हिल पर जब भारतीय जवानों ने कब्जे के बाद लेफ्टिनेंट कणाद को बर्फ में दफन पाया। तब पार्थिव शरीर कोलकाता स्थित सेना की पूर्वी कमान मुख्यालय फोर्ट विलियम के पूर्वी कमान स्टेडियम लाया गया। टाइगर हिल पर जोश, जज्बा और जुनून का परिचय देकर देश के लिए जान न्यौछावर करने वाले इस जांबाज को तब भारत सरकार ने उन्हें सेना मेडल (मरणोपरांत) से सम्मानित किया था।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय द्वारा लेफ्टिनेंट कणाद भट्टाचार्य को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन !




