मेजर पदà¥à¤®à¤ªà¤¾à¤£à¤¿ आचारà¥à¤¯, महावीर चकà¥à¤° (मरणोपरांत) का जनà¥à¤® 21 जून 1968 को ओडिशा में हà¥à¤† था। जो मूल रूप से ओडिशा से थे, लेकिन तेलंगाना में हैदराबाद में बस गà¤à¥¤ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ वायॠसेना के पूरà¥à¤µ विंग कमांडर, विंग कमांडर जगनà¥à¤¨à¤¾à¤¥ आचारà¥à¤¯, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ के साथ 1965 और 1971 के यà¥à¤¦à¥à¤§à¥‹à¤‚ के दौरान सेवा की थी और शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¤à¥€ विमला आचारà¥à¤¯ के पà¥à¤¤à¥à¤°, मेजर पदà¥à¤®à¤ªà¤¾à¤£à¤¿ आचारà¥à¤¯ का à¤à¤• à¤à¤¾à¤ˆ पदà¥à¤®à¤¸à¤‚à¤à¤µ था। अपने पिता से पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ होकर, उनके मन में बचपन से ही सशसà¥à¤¤à¥à¤° बलों में सेवा करने की तीवà¥à¤° इचà¥à¤›à¤¾ विकसित हà¥à¤ˆà¥¤ बड़े होने के दौरान उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने जà¥à¤¨à¥‚न का पालन करना जारी रखा और अंततः सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤• सà¥à¤¤à¤° की पढ़ाई के बाद पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सैनà¥à¤¯ अकादमी चेनà¥à¤¨à¤ˆ में शामिल होने के लिठचयनित हो गà¤à¥¤ वह अफसर टà¥à¤°à¥‡à¤¨à¤¿à¤‚ग अकादमी से à¤à¤¸à¤à¤¸ 56वें कोरà¥à¤¸ के à¤à¤¾à¤— के रूप में लेफà¥à¤Ÿà¤¿à¤¨à¥‡à¤‚ट के रूप में उतà¥à¤¤à¥€à¤°à¥à¤£ हà¥à¤à¥¤ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ 2 राजपूताना राइफलà¥à¤¸ बटालियन में नियà¥à¤•à¥à¤¤ किया गया था, जो à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सेना की à¤à¤• पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ और सà¥à¤¶à¥‹à¤à¤¿à¤¤ पैदल सेना रेजिमेंट थी।
अपना पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤£ पूरा करने के बाद वह अपनी यूनिट में शामिल हो गठऔर जलà¥à¤¦ ही à¤à¤• सखà¥à¤¤ सैनिक और अचà¥à¤›à¥‡ अधिकारी के रूप में विकसित हà¥à¤à¥¤ कà¥à¤› समय तक सेवा करने के बाद, उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने 1998 में सà¥à¤¶à¥à¤°à¥€ चारà¥à¤²à¤¤à¤¾ से शादी कर ली। मेजर आचारà¥à¤¯ के à¤à¤¾à¤ˆ पदà¥à¤®à¤¸à¤‚à¤à¤µ à¤à¥€ सेना में शामिल हो गठऔर सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ ऑपरेशन में शामिल हो गठजब उनकी यूनिट "ऑपरेटन विजय" के हिसà¥à¤¸à¥‡ के रूप में तैनात हà¥à¤ˆà¥¤ सैनिक कौशल में निपà¥à¤£ होने के अलावा, मेजर आचारà¥à¤¯ à¤à¤• उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹à¥€ पाठक थे और विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ विषयों पर उनका गहरा जà¥à¤žà¤¾à¤¨ था।
लेफà¥à¤Ÿà¤¿à¤¨à¥‡à¤‚ट करà¥à¤¨à¤² à¤à¤®à¤¬à¥€ रवींदà¥à¤°à¤¨à¤¾à¤¥ की कमान के तहत मेजर पदà¥à¤®à¤ªà¤¾à¤£à¤¿ आचारà¥à¤¯ की 2 राजपूताना राइफलà¥à¤¸, जो लोलाब घाटी में 81 माउंटेन बà¥à¤°à¤¿à¤—ेड का हिसà¥à¤¸à¤¾ थी, को 04 जून 1999 को दà¥à¤°à¤¾à¤¸ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में शामिल किया गया था। बटालियन 56 माउंट बीडीई की कमान के तहत काम कर रही थी। , मेजर जनरल मोहिंदर पà¥à¤°à¥€ के नेतृतà¥à¤µ में 8 माउंट डिवीजन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ समगà¥à¤° परिचालन नियंतà¥à¤°à¤£ किया जा रहा है। 1999 में लाहौर घोषणा पर हसà¥à¤¤à¤¾à¤•à¥à¤·à¤° करने के कà¥à¤› ही समय बाद, पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥€ सेना ने à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सेना की सरà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में खाली की गई चौकियों पर गà¥à¤ªà¥à¤¤ रूप से कबà¥à¤œà¤¾ कर लिया। 03 मई 1999 को, इन घà¥à¤¸à¤ªà¥ˆà¤ ों का पता चला और 26 मई 1999 को, à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ वायॠसेना (IAF) दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पहला हवा से ज़मीन पर हमला किया गया, इसके बाद à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सेना दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ घà¥à¤¸à¤ªà¥ˆà¤ ियों को बाहर निकालने के लिठऑपरेशन विजय चलाया गया। कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°. सेना ने पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥€ घà¥à¤¸à¤ªà¥ˆà¤ ियों को à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° से बाहर निकालने के लिठतà¥à¤°à¤‚त अपनी सेनाà¤à¤‚ जà¥à¤Ÿà¤¾à¤ˆà¤‚। 20 जून 1999 तक तोलोलिंग और पà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤‚ट 5140 पर कबà¥à¤œà¥‡ के बाद दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ पर दबाव बनाठरखना जरूरी था. कई टोही मिशनों ने पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ की कि पहले चरण में पà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤‚ट 4700 के साथ मिलकर 'थà¥à¤°à¥€ पिमà¥à¤ªà¤²à¥à¤¸ रिज' नामक कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° पर कबà¥à¤œà¤¾ करने की आवशà¥à¤¯à¤•ता थी। इसके बाद à¤à¤²à¤“सी तक पहà¥à¤‚चने के लिठपà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤‚ट 5100 पर कबà¥à¤œà¤¾ करना जरूरी था। 'थà¥à¤°à¥€ पिमà¥à¤ªà¤²à¥à¤¸ रिज' जो मारà¥à¤ªà¥‹ ला रिजलाइन पर पीटी 5100 से निकलती है, राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ राजमारà¥à¤—, दà¥à¤°à¤¾à¤¸ शहर और सैंडो घाटी पर हावी है। दà¥à¤°à¤¾à¤¸ में सैंडो नाला के पूरà¥à¤µ में घà¥à¤¸à¤ªà¥ˆà¤ को अलग करने के लिà¤, पीटी 5100 और उसके बाद पीटी 5600 पर कबà¥à¤œà¤¾ करने का मारà¥à¤— पà¥à¤°à¤¶à¤¸à¥à¤¤ करने के लिठइस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° पर कबà¥à¤œà¤¾ करना आवशà¥à¤¯à¤• था। थà¥à¤°à¥€ पिमà¥à¤ªà¤²à¥à¤¸ को बà¥à¤²à¥ˆà¤• रॉक कॉमà¥à¤ªà¥à¤²à¥‡à¤•à¥à¤¸ के रूप में à¤à¥€ जाना जाता है, जिसमें थà¥à¤°à¥€ पिमà¥à¤ªà¤²à¥à¤¸, लोन हिल, नॉल और काजल शामिल हैं और दो सà¥à¤ªà¤° लाइनों में विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ हैं। पà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤‚ट 4700 रिज में पीटी 4700, सैडल, टॉमी, संगर, रॉकी और जंकà¥à¤¶à¤¨ पà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤‚ट शामिल थे। उस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में वांछित उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने के लिà¤, दो चरणों में बहà¥à¤¦à¤¿à¤¶à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• हमले शà¥à¤°à¥‚ करने की à¤à¤• साहसिक योजना तैयार की गई थी।
परिचालन योजना के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, चरण- I में, 2 राजपूताना राइफलà¥à¤¸ को नॉल और लोन हिल पर कबà¥à¤œà¤¼à¤¾ करना था और 29 जून की सà¥à¤¬à¤¹ तक जंकà¥à¤¶à¤¨ पॉइंट से संपरà¥à¤• करना था। 18 गढ़ रिफ़ को 29 जून की सà¥à¤¬à¤¹ तक टॉमी, सैडल और पीटी 4700 को पकड़ने का काम सौंपा गया था। चरण- II में, 2 राजपूताना राइफलà¥à¤¸ को दोपहर तक थà¥à¤°à¥€ पिंपलà¥à¤¸ को साफ़ करना था और 16 गà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤°à¥à¤¸ बटालियन को सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ का फायदा उठाना था और 30 जून तक जंकà¥à¤¶à¤¨ पॉइंट पर कबà¥à¤œà¤¼à¤¾ करना था। इस चरण में, 18 गà¥à¤µà¤¾à¤² राइफलà¥à¤¸ को रॉकी और सेंगर पर कबà¥à¤œà¤¾ करने और उसके बाद 30 जून तक जंकà¥à¤¶à¤¨ पà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤‚ट पर 16 गà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤°à¥à¤¸ के साथ जà¥à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ का काम सौंपा गया था। 2 राजपूताना राइफलà¥à¤¸ और 18 गढ़ रिफ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ हमला 28 जून 1999 को 2030 बजे शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤†à¥¤ दà¥à¤°à¥à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ से, २ राजपूताना राइफलà¥à¤¸ की हमला कंपनी को दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ सेना के à¤à¤¾à¤°à¥€ तोपखाने हमले के कारण बड़ी संखà¥à¤¯à¤¾ में हताहतों का सामना करना पड़ा। 'à¤' कंपनी कमांडर के रूप में मेजर पदà¥à¤®à¤ªà¤¾à¤£à¤¿ आचारà¥à¤¯ के पास दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ की उस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पर कबà¥à¤œà¤¼à¤¾ करने का कठिन काम था, जो à¤à¤¾à¤°à¥€ किलेबंद, मजबूती से पकड़ी हà¥à¤ˆ और बारूदी सà¥à¤°à¤‚गों और वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• मशीन गन और तोपखाने की आग से ढकी हà¥à¤ˆ थी। बटालियन और बà¥à¤°à¤¿à¤—ेड ऑपरेशन की सफलता इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पर शीघà¥à¤° कबà¥à¤œà¤¼à¤¾ करने पर निरà¥à¤à¤° थी। हालाà¤à¤•ि, कंपनी का हमला शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में ही लगà¤à¤— लड़खड़ा गया जब दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ की तोपखाने की आग सीधे अगà¥à¤°à¤£à¥€ पलटन पर गिरी, जिससे बड़ी संखà¥à¤¯à¤¾ में लोग हताहत हà¥à¤à¥¤ अपनी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ की पूरी परवाह न करते हà¥à¤, मेजर आचारà¥à¤¯ ने अपनी कंपनी की रिज़रà¥à¤µ पà¥à¤²à¤¾à¤Ÿà¥‚न को ले लिया और तोपखाने के गोले बरसाने के बावजूद उसका नेतृतà¥à¤µ किया। यहां तक कि जब उनके लोग दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ की घातक गोलीबारी में गिर रहे थे, तब à¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने लोगों को पà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करना जारी रखा और अपनी आरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ पलटन के साथ खड़ी चटà¥à¤Ÿà¤¾à¤¨ पर चढ़कर दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ पर हमला किया।
दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ से गोलियों की बौछार की परवाह किठबिना, मेजर आचारà¥à¤¯ दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ तक रेंगते रहे और हथगोले फेंके। इस दà¥à¤¸à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¸à¤¿à¤• हमले में वह गंà¤à¥€à¤° रूप से घायल हो गये और à¤à¤¾à¤°à¥€ चोटों और हिलने-डà¥à¤²à¤¨à¥‡ में असमरà¥à¤¥ होने के बावजूद, उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने लोगों को उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ छोड़कर दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ पर हमला करने का आदेश दिया, जबकि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ पर गोलीबारी जारी रखी। अंततः दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पर काबू पा लिया गया और उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ पर कबà¥à¤œà¤¼à¤¾ कर लिया गया। हालाà¤à¤•ि, मेजर पदà¥à¤®à¤ªà¤¾à¤£à¤¿ आचारà¥à¤¯ ने अपनी चोटों के कारण शहीद हो गà¤à¥¤ मेजर पदà¥à¤®à¤ªà¤¾à¤£à¤¿ आचारà¥à¤¯ के अलावा,2 राजपूताना राइफलà¥à¤¸ के दो अनà¥à¤¯ अधिकारियों और दस सैनिकों ने उस दिन पूरे ऑपरेशन के दौरान अपनी जान दे दी। अनà¥à¤¯ शहीद बहादà¥à¤°à¥‹à¤‚ में शामिल हैं, कैपà¥à¤Ÿà¤¨ विजयंत थापर, कैपà¥à¤Ÿà¤¨ नीकेà¤à¤¾à¤•à¥à¤“ केंगà¥à¤°à¥à¤¸à¥‡, हवलदार à¤à¤¸à¤à¤¸ सेंगर, हवलदार सतà¥à¤¯à¤¬à¥€à¤° सिंह, नायक आनंद सिंह, लांस नायक सतपाल सिंह, लांस नायक विकà¥à¤°à¤® सिंह, राइफलमैन जेà¤à¤¸ शेखावत, राइफलमैन सतà¥à¤¯à¤µà¥€à¤° सिंह, राइफलमैन ओम पà¥à¤°à¤•ाश , राइफलमैन जसवीर सिंह और राइफलमैन कंवर पाल सिंह। मेजर पदà¥à¤®à¤ªà¤¾à¤£à¤¿ आचारà¥à¤¯, कैपà¥à¤Ÿà¤¨ नीकेà¤à¤¾à¤•à¥à¤“ केंगà¥à¤°à¥à¤¸à¥‡ à¤à¤µà¤‚ कैपà¥à¤Ÿà¤¨ विजयंत थापर को उनकी उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ बहादà¥à¤°à¥€, अडिग नेतृतà¥à¤µ और सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š बलिदान के लिठमेजर पदà¥à¤®à¤ªà¤¾à¤£à¤¿ आचारà¥à¤¯ को "महावीर चकà¥à¤°" (मरणोपरांत), कैपà¥à¤Ÿà¤¨ नीकेà¤à¤¾à¤•à¥à¤“ केंगà¥à¤°à¥à¤¸à¥‡ को "महावीर चकà¥à¤°" (मरणोपरांत) à¤à¤µà¤‚ कैपà¥à¤Ÿà¤¨ विजयंत थापर को "वीर चकà¥à¤°" (मरणोपरांत) से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया गया था।
सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ विवेकानंद सà¥à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤²à¤¯ की ओर से मेजर पदà¥à¤®à¤ªà¤¾à¤£à¤¿ आचारà¥à¤¯, महावीर चकà¥à¤° (मरणोपरांत), कैपà¥à¤Ÿà¤¨ नीकेà¤à¤¾à¤•à¥à¤“ केंगà¥à¤°à¥à¤¸à¥‡, "महावीर चकà¥à¤°" (मरणोपरांत), कैपà¥à¤Ÿà¤¨ विजयंत थापर "वीर चकà¥à¤°" (मरणोपरांत), हवलदार à¤à¤¸à¤à¤¸ सेंगर, हवलदार सतà¥à¤¯à¤¬à¥€à¤° सिंह, नायक आनंद सिंह, लांस नायक सतपाल सिंह, लांस नायक विकà¥à¤°à¤® सिंह, राइफलमैन जेà¤à¤¸ शेखावत, राइफलमैन सतà¥à¤¯à¤µà¥€à¤° सिंह, राइफलमैन ओम पà¥à¤°à¤•ाश , राइफलमैन जसवीर सिंह और राइफलमैन कंवर पाल सिंह को उनकी पà¥à¤£à¥à¤¯à¤¤à¤¿à¤¥à¤¿ पर बारंबार नमन !




