नायक सरवन कà¥à¤®à¤¾à¤° ठाकà¥à¤° हिमाचल पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के मंडी जिले के हवानी गांव के रहने वाले थे। पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• शिकà¥à¤·à¤¾ पूरी करने के बाद वह सेना में शामिल हो गये। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤°à¥€ रेजिमेंट की 315 फीलà¥à¤¡ रेजिमेंट में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ किया गया था, जो à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सेना की लड़ाकू सहायता शाखा है जो अपनी बढ़ती बंदूकों और à¤à¤¾à¤°à¥€ हथियारों के लिठपà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ है। कà¥à¤› समय तक सेवा करने के बाद उनका विवाह हिमाचल पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ की रहने वाली सà¥à¤¶à¥à¤°à¥€ कांता देवी से हà¥à¤†à¥¤ वरà¥à¤· 1999 तक, उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कई वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ की सेवा पूरी कर ली थी और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ नाइक के पद पर पदोनà¥à¤¨à¤¤ किया गया था। तब तक वह à¤à¤• बहादà¥à¤° सैनिक और à¤à¤• सà¥à¤µà¤¾à¤à¤¿à¤®à¤¾à¤¨à¥€ तोपची के रूप में विकसित हो चà¥à¤•े थे।
नायक सरवन कà¥à¤®à¤¾à¤° की इकाई, करà¥à¤¨à¤² à¤à¤¨à¤ सà¥à¤¬à¥à¤°à¤®à¤£à¥à¤¯à¤® की कमान के तहत 315 फीलà¥à¤¡ रेजिमेंट, 14 मई 1999 को कारगिल यà¥à¤¦à¥à¤§ के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ चरण में दà¥à¤°à¤¾à¤¸ में तैनात होने वाली पहली तोपखाने इकाई थी। पहला दिन जब रेजिमेंट बेस पर पहà¥à¤‚ची दà¥à¤°à¤¾à¤¸ में शिविर में, उन पर à¤à¤¾à¤°à¥€ गोलीबारी की गई। à¤à¤²à¥‡ ही वे दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ से अनजान थे, फिर à¤à¥€ वे बहादà¥à¤°à¥€ से लड़े और हमले का जवाब दिया। उस अवधि के दौरान नाइक सरवन कà¥à¤®à¤¾à¤° की 315 फीलà¥à¤¡ रेजिमेंट, 1 नागा, 8 सिख, 17 जाट और 16 गà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤°à¥à¤¸ रेजिमेंट के लिठसहायक अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° थी, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अंततः टोलोलिंग, पà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤‚ट 5140, बà¥à¤²à¥ˆà¤• टूथ, टाइगर हिल, पà¥à¤µà¤¾à¤‡à¤‚ट 4875 (गन) पर कबà¥à¤œà¤¾ कर लिया। हिल), दà¥à¤°à¤¾à¤¸-मà¥à¤¶à¥à¤•ोह घाटी में घà¥à¤¸à¤ªà¥ˆà¤ ियों से। 14 से 31 मई के बीच की अवधि यूनिट के लिठसबसे कठिन थी कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ लगातार पहचान से बचने के लिठà¤à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर गोलीबारी करनी पड़ी और तà¥à¤°à¤‚त दूसरे सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर जाना पड़ा। अपने कंधों पर पैदल सेना इकाइयों की जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ के साथ, 315 फीलà¥à¤¡ रेजिमेंट को अकà¥à¤¸à¤° रात में दो विकलà¥à¤ªà¥‹à¤‚ का सामना करना पड़ता था - या तो वे गोलीबारी बंद कर सकते थे और सà¥à¤¬à¤¹ तक इंतजार कर सकते थे या वे पैदल सेना इकाइयों की रकà¥à¤·à¤¾ के लिठगोलीबारी जारी रख सकते थे। 315 फीलà¥à¤¡ रेजिमेंट ने बाद वाले को चà¥à¤¨à¤¾ और पैदल सेना इकाइयों को à¤à¤• सतत ढाल पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ की।
चल रहे ऑपरेशन के हिसà¥à¤¸à¥‡ के रूप में, बà¥à¤°à¤¿à¤—ेडियर à¤à¤®à¤ªà¥€à¤à¤¸ बाजवा की कमान में 8 माउंटेन डिवीजन की 192 माउंटेन बà¥à¤°à¤¿à¤—ेड को 04 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ तक "टाइगर हिल" पर कबà¥à¤œà¤¾ करने का काम सौंपा गया था। 18 गà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤°à¥à¤¸ और 8 सिखों के हमले से पहले, दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ की सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ को कमजोर करने के लिठआरà¥à¤Ÿà¤¿à¤²à¤°à¥€ इकाइयों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤• फायर योजना तैयार की गई थी। 2 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 1999 की शाम को, 315 à¤à¤«à¤¡à¥€ रेजट के पास विकलà¥à¤ª था - गोलीबारी जारी रखना या गोलीबारी बंद करना। यदि वे रà¥à¤• जाते तो पैदल सेना इकाइयाठ(18 गà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥‡à¤¡à¤¿à¤¯à¤°à¥à¤¸ और 8 सिख) ख़तरे में पड़ जातीं। नायक सरवन कà¥à¤®à¤¾à¤° के 'सेकंड-इन-कमांड' मेजर दà¥à¤µà¤¿à¤µà¥‡à¤¦à¥€ ने फिर से पहले वाले को चà¥à¤¨à¤¾, अपने तंबू से बाहर निकले और अपने लड़कों को दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ पर हमला करते रहने के लिठगोलीबारी जारी रखने के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ किया। नाइक सरवन कà¥à¤®à¤¾à¤°, जो à¤à¤• बंदूक चला रहे थे, अधिकतम कà¥à¤·à¤¤à¤¿ पहà¥à¤‚चाने के लिठदà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ के ठिकानों पर हमला करते रहे। हालाà¤à¤•ि, à¤à¤¾à¤°à¥€ गोलाबारी के दौरान, नायक सरवन कà¥à¤®à¤¾à¤° दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ के à¤à¤• गोले से गंà¤à¥€à¤° रूप से घायल हो गà¤à¥¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने जलà¥à¤¦ ही दम तोड़ दिया और शहीद हो गà¤à¥¤ नायक सरवन कà¥à¤®à¤¾à¤° के अलावा, ऑपरेशन के दौरान 315 à¤à¤«à¤¡à¥€ रेजिमेंट के अनà¥à¤¯ शहीद बहादà¥à¤°à¥‹à¤‚ में उनके 'सेकंड-इन-कमांड' मेजर सीबी दà¥à¤µà¤¿à¤µà¥‡à¤¦à¥€, लांस हवलदार मलयà¥à¤¯à¤¾, नायक बिशà¥à¤¨à¥€ राय, à¤à¤²/à¤à¤¨à¤•े पी गोपैया, जनरल राजकà¥à¤®à¤¾à¤° और जनरल सà¥à¤Ÿà¤¾à¤« शामिल थे। आईà¤à¤¨à¤¸à¥€ सिंघा.
नायक सरवन कà¥à¤®à¤¾à¤° ठाकà¥à¤° à¤à¤• बहादà¥à¤° और समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ सैनिक थे, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ का पालन करते हà¥à¤ अपना जीवन बलिदान कर दिया।
सà¥à¤µà¤¾à¤®à¥€ विवेकानंद सà¥à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤²à¤¯ की ओर से नायक सरवन कà¥à¤®à¤¾à¤° ठाकà¥à¤° को उनकी पà¥à¤£à¥à¤¯à¤¤à¤¿à¤¥à¤¿ पर बारंबार नमन !




