सेकेंड लेफ्टिनेंट शैलेश कुमार, शौर्य चक्र (मरणोपरांत) को बिहार रेजिमेंट की 10 बिहार बटालियन में नियुक्त किया गया जो एक प्रसिद्ध पैदल सेना रेजिमेंट है। श्री भुवनेश्वर कुमार के पुत्र, उन्हें अपने सेवा करियर में बहुत पहले ही सक्रिय ऑपरेशन में भाग लेने का अवसर मिला क्योंकि उनकी यूनिट 'ऑपरेशन ब्लूस्टार' के हिस्से के रूप में पंजाब में तैनात हो गई थी।
जुलाई 1984 के दौरान सेकंड लेफ्टिनेंट शैलेश कुमार की यूनिट 10 बिहार को पंजाब में तैनात किया गया था। जून 1984 में 'ऑपरेशन ब्लूस्टार' के बाद भारतीय सेना पंजाब में आतंकवाद विरोधी अभियानों में शामिल हो गई। पंजाब में चरमपंथी तत्व बहुत सक्रिय हो गए और सेना की टुकड़ियाँ नियमित आधार पर उग्रवादियों के विरुद्ध अभियान में लग गईं। 10 जुलाई 1984 को सुरक्षा बलों को खुफिया सूत्रों से पंजाब के अमृतसर जिले के एक गाँव में आतंकवादियों के एक समूह की मौजूदगी के बारे में विश्वसनीय जानकारी मिली। खुफिया जानकारी के आधार पर 10 जुलाई 1984 को सेकंड लेफ्टिनेंट शैलेश कुमार को अमृतसर जिले के उस गांव में चरमपंथियों की खोज में यूनिट के कैप्टन रवि वत्स की सहायता के लिए 10 अन्य रैंकों के साथ जाने का आदेश दिया गया था। दस मिनट के अंदर वह अपनी टुकड़ी के साथ गांव पहुंच गये और एक घर की छत पर चढ़ गये. छत पर पहुंचते ही सरपंच जत्थेदार मोहन सिंह के घर से हर तरह के हथियारों की बौछार होने लगी।
परिणामस्वरूप सेकंड लेफ्टिनेंट शैलेश कुमार को गंभीर चोट लगी। चोट की परवाह किए बिना वह छत की मुंडेर पर चढ़ गया और जत्थेदार मोहन सिंह पर स्टेन बर्स्ट फायर कर दिया। इसके बाद वह नागरिक हताहतों से बचने का ख्याल रखते हुए चरमपंथियों पर अलग-अलग दिशाओं से गोलीबारी जारी रखता रहा। हालाँकि नियंत्रित आग को निर्देशित करते हुए सेकंड लेफ्टिनेंट शैलेश कुमार चोटों के कारण शहीद हो गए । सेकंड लेफ्टिनेंट शैलेश कुमा एक वीर सैनिक और साहसी अधिकारी थे जिन्होंने आगे बढ़कर नेतृत्व किया और भारतीय सेना की उच्चतम परंपराओं का पालन करते हुए अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। लेफ्टिनेंट शैलेश कुमार को उनके असाधारण साहस, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए 26 जनवरी 1986 को वीरता पुरस्कार "शौर्य चक्र" से सम्मानित किया गए ।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविधालय की ओर से सेकेंड लेफ्टिनेंट शैलेश कुमार, शौर्य चक्र (मरणोपरांत) को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन !




