सेकेंड लेफ्टिनेंट जितेंद्र कुमार शर्मा स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे चेन्नई में अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी में शामिल हुए और सेकंड लेफ्टिनेंट के पद पर शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी के रूप में उत्तीर्ण हुए। उन्हें गढ़वाल राइफल्स की 13 गढ़वाल राइफल्स में नियुक्त किया गया। जो एक पैदल सेना रेजिमेंट है जो अपने निडर सैनिकों और कई युद्ध सम्मानों के लिए जानी जाती है।
1997 के दौरान सेकंड लेफ्टिनेंट जितेंद्र कुमार शर्मा की यूनिट को "ऑपरेशन रक्षक" के हिस्से के रूप में संकटग्रस्त कश्मीर घाटी में तैनात किया गया था। चूंकि यूनिट की जिम्मेदारी का क्षेत्र (एओआर) आतंकवादी गतिविधियों से प्रभावित था इसलिए यूनिट के सैनिकों को हर समय उच्च स्तर की तैयारी बनाए रखनी पड़ती थी और अक्सर आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन करना पड़ता था। चूँकि उनकी यूनिट के ऑपरेशन का क्षेत्र आतंकवादियों द्वारा घुसपैठ की संभावना वाला था यूनिट ने नियमित आवृत्ति के साथ सशस्त्र गश्त तैनात की। गश्ती मार्गों पर बारूदी सुरंगों ने सैनिकों के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर दिया था और यूनिट के बम निरोधक दस्ते को अक्सर मार्गों को साफ करने के लिए बुलाया जाता था। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर सेकंड लेफ्टिनेंट जितेंद्र कुमार को मेजर संजीत चौधरी के साथ 31 अक्टूबर 1997 को आतंकवाद विरोधी अभियान का काम सौंपा गया था।
योजना के मुताबिक सेकेंड लेफ्टिनेंट जितेंद्र कुमार अपनी टीम के साथ ऑपरेशन के लिए निकले। जब सेकेंड लेफ्टिनेंट जितेंद्र कुमार शर्मा और उनके साथी नियोजित गश्ती मार्ग के अनुसार चुनौतीपूर्ण इलाके से गुजर रहे थे तो एक बड़ा आईईडी विस्फोट हुआ। विस्फोट का विनाशकारी प्रभाव पड़ा जिसमें सेकंड लेफ्टिनेंट जितेंद्र कुमार शर्मा, मेजर संजीत चौधरी और उनके कई साथी घायल हो गए। घायल जवानों को तुरंत इलाज के लिए श्रीनगर के बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ पर सेकंड लेफ्टिनेंट जितेंद्र कुमार शर्मा और मेजर संजीत चौधरी शहीद हो गए। सेकेंड लेफ्टिनेंट जितेंद्र कुमार शर्मा एक प्रतिबद्ध सैनिक और अच्छे अधिकारी थे जिन्होंने देश की सेवा में अपने प्राण नौछावर कर दिए।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से सेकंड लेफ्टिनेंट जितेंद्र कुमार शर्मा को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन !




