Captain Shubham Gupta SM

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कैप्टन शुभम गुप्ता, सेना मैडल (मरणोपरांत) का जन्म 07 अक्टूबर 1995 को उत्तर प्रदेश के आगरा के ताज गंज इलाके में हुआ था । श्री बसंत कुमार गुप्ता और श्रीमती पुष्पा देवी गुप्ता के बेटे कैप्टन शुभम गुप्ता का एक छोटा भाई ऋषभ गुप्ता था। उन्होंने अपने छोटे दिनों से ही सशस्त्र बलों में गहरी रुचि विकसित कर ली थी और बड़े होने के दौरान भी उन्होंने अपने सपने को पूरा करना जारी रखा। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जॉर्जेस इंटर कॉलेज, आगरा से पूरी की और उसके बाद 2015 में 19 साल की उम्र में सेना में शामिल होने के लिए चयनित हो गए। प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद टीईएस (तकनीकी प्रवेश योजना) के माध्यम से उनका चयन सेना में शामिल होने के लिए हो गया।  वर्ष 2018 में वे  ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए), गया से पास आउट हुए। । उन्हें सिग्नल कोर में लेफ्टिनेंट के रूप में नियुक्त किया गया था जो एक महत्वपूर्ण शाखा है जो युद्ध और शांति के दौरान भारतीय सेना को संचार प्रदान करती है।

कैप्टन शुभम गुप्ता दिल से एक सैनिक थे और साहसिक जीवन पसंद करते थे, इसलिए उन्होंने विशेष बलों के लिए स्वयंसेवक बनने का फैसला किया। कठिन चयन प्रक्रिया और प्रशिक्षण के बाद कैप्टन शुभम को विशिष्ट 9 पैरा (स्पेशल फाॅर्स) में शामिल किया गया जो 1966 में गठित एक इकाई थी जो माउंटेन वारफेयर और काउंटर इंसर्जेंसी/काउंटर टेररिज्म ऑपरेशंस में विशेषज्ञता रखती थी। 9 पैरा (स्पेशल फाॅर्स) के सैनिक बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी वीरता और साहसी कमांडो ऑपरेशन के लिए जाने जाते हैं। कैप्टन शुभम इस विशिष्ट बल का हिस्सा बनकर खुश थे और बाद में उन्हें जम्मू-कश्मीर में तैनात किया गया।

नवंबर 2023 के दौरान कैप्टन शुभम गुप्ता की यूनिट 9 पैरा (एसएफ) को भारतीय सेना के 16  कोर के परिचालन नियंत्रण के तहत कार्यरत 'रोमियो' फाॅर्स  के हिस्से के रूप में कश्मीर घाटी के राजौरी सेक्टर में तैनात किया गया था।  चूंकि यूनिट की जिम्मेदारी का क्षेत्र (एओआर) उग्रवादियों से प्रभावित क्षेत्र में पड़ता था, इसलिए यूनिट को नियमित आधार पर उग्रवाद विरोधी अभियान चलाना पड़ता था। बुद्धिमान स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर यूनिट ने 22 नवम्बर 2023 को 63 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) और जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ एक खोज और घेरा अभियान शुरू करने का निर्णय लिया। तदनुसार, 21/22 नवंबर 2023 की मध्यरात्रि को एक संयुक्त अभियान शुरू किया गया। 63 आरआर, 9 पैरा (एसएफ) और जम्मू-कश्मीर पुलिस के तत्व। योजना के अनुसार संयुक्त टीम राजौरी जिले के गुलाबगढ़ जंगल के संदिग्ध कालाकोट इलाके में पहुंची और घेराबंदी एवं तलाशी अभियान शुरू किया। सेना की टुकड़ी के हिस्से के रूप में कैप्टन शुभम गुप्ता 63 आरआर के सैनिकों के साथ 9 पैरा (एसएफ) के सैनिकों का नेतृत्व कर रहे थे।

जब तलाशी अभियान चल रहा था, आतंकवादियों ने खतरे को भांपते हुए भागने की कोशिश में सैनिकों पर गोलीबारी की। इसके बाद दोनों ओर से भारी गोलीबारी के साथ भीषण गोलीबारी शुरू हो गई। आतंकवादी अपने नेता सहित एक ढोक (अस्थायी फूस की छत वाला मिट्टी का घर) में छिपे हुए थे और वहां से सैनिकों को निशाना बना रहे थे। कैप्टन शुभम गुप्ता को अपने साथियों और नागरिकों के लिए भी ख़तरा महसूस हुआ और वे आतंकवादियों को पकड़ने के लिए अपने कवर से बाहर आ गए। हालाँकि ऐसा करते समय, कैप्टन शुभम गुप्ता गोलीबारी की चपेट में आ गए और गोली लगने से घायल हो गए और शहीद हो गए। ऑपरेशन जारी रहा और अंततः सभी आतंकवादियों को मार गिराया गया। परन्तु  कैप्टन शुभम गुप्ता के अलावा, 9 पैरा (एसएफ) और 63 आरआर के चार अन्य बहादुर जवानों ने भी ऑपरेशन के दौरान अपनी जान गंवा दी। अन्य शहीद सैनिकों में कैप्टन एमवी प्रांजल, हवलदार अब्दुल माजिद, लांस नायक संजय बिष्ट और पैराट्रूपर सचिन लौर शामिल थे। कैप्टन शुभम गुप्ता एक बहादुर सैनिक और साहसी अधिकारी थे जिन्होंने 28 साल की उम्र में देश की सेवा में अपना जीवन न्योछावर कर दिया। कैप्टन शुभम गुप्ता को उनकी सराहनीय वीरता, कर्तव्य के प्रति समर्पण और सर्वोच्च बलिदान के लिए 26 जनवरी 2024 को "सेना मैडल" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।

स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से कैप्टन शुभम गुप्ता, सेना मैडल (मरणोपरांत) को उनकी पुण्यतिथि  पर बारंबार नमन !

कैप्टन शुभम गुप्ता, सेना मैडल (मरणोपरांत) के परिवार में उनके पिता श्री बसंत कुमार गुप्ता, माता श्रीमती पुष्पा गुप्ता और छोटा भाई श्री ऋषभ गुप्ता हैं।

 

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Amazing place

Amazing place. Gives a sense of patriotism in yourself once you visit the Subharti Shaheed Smarak & Upwan.

Mukul Aggarwal

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Magnificent Place

This magnificent place is situated at Subharti University Campus and it is especially filled with the spirit of national pride.

Sara Khan

Visitor

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Feel of Patriotism

There are many more stories regarding the patriotism of Indian people & many more monuments to glorify that too. Standing at this place all those stories made me remember how privileged & honored the Indians feel when it comes to talk about their patriotism.

Sagar Kumar

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