Hav Gajendra Singh Bisht AC

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हवलदार गजेंद्र सिंह बिष्ट, अशोक चक्र (मरणोपरांत) का जन्म उत्तराखंड के गणेशपुर गांव में हुआ था । उन्होंने नया गांव के जनता इंटर कॉलेज में पढ़ाई की और उनके शिक्षक उन्हें एक अनुशासित छात्र के रूप में याद करते हैं, जो स्कूल में आयोजित हर कार्यक्रम में भाग लेते थे, चाहे वह खेल हो या सांस्कृतिक गतिविधियां। हवलदार गजेंद्र सिंह 1991 में गढ़वाल राइफल्स में शामिल हुए और बाद में उन्हें 10 पैरा (स्पेशल फाॅर्स) में नियुक्त किया गया ।  हवलदार गजेंद्र ने 1999 में कारगिल ऑपरेशन में भी सक्रिय भाग लिया था। हालांकि हवलदार गजेंद्र भारतीय सेना के विशेष बलों के एक प्रशिक्षित कमांडो थे लेकिन उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के विशिष्ट विशेष कार्रवाई समूह में सेवा देने के लिए प्रतिनियुक्त किया गया ।

26 नवंबर 2008 की रात को दक्षिण मुंबई की कई प्रतिष्ठित इमारतों पर हमला किया गया । नरीमन हाउस के यहूदी केंद्र पर भी आतंकवादियों ने हमला किया  और उन्होंने इस अंतरराष्ट्रीय केंद्र में कई निर्दोष लोगों को बंधक बना लिया  और उनका आघात दो दिनों तक जारी रहा। हवलदार गजेंद्र सिंह राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के 51 स्पेशल एक्शन ग्रुप के सदस्य थे जिन्हें इस बड़े संकट से निपटने की जिम्मेदारी दी गई । वे एनएसजी कमांडो की टीम का हिस्सा थे जिन्हें आतंकवादियों को मार गिराने के लिए एक ऑपरेशन में नरीमन हाउस की छत पर एक हेलीकॉप्टर से उतारा गया था जिन्होंने कई लोगों को बंधक बना रखा था।

हवलदार गजेंद्र सिंह के नेतृत्व वाली टीम ने 14 नागरिकों को निकाला जिन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। छत साफ होने के बाद हवलदार गजेंद्र सिंह उस स्थान पर चले गए जहां आतंकवादियों ने हमला करने वाली टीम पर हमला करने के लिए खुद को तैनात किया था। इसके बाद हवलदार गजेंद्र सिंह ने एक आतंकवादी को भागने की कोशिश करते देखा और उस पर गोली चला दी। एक अन्य आतंकवादी ने उन पर ग्रेनेड फेंका जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। निडर होकर हवलदार गजेंद्र सिंह को एहसास हुआ कि टीम को हावी होने के लिए इस अवसर का लाभ उठाना होगा और आगे बढ़ना जारी रखा। उन्होंने आतंकवादियों की ओर पीठ नहीं की और घायल होने के बावजूद अन्य कमांडो के लिए रास्ता बनाया। वे तब तक आगे बढ़ते रहे और आतंकवादियों पर गोलीबारी करते रहे जब तक कि वे शहीद नहीं हो गए । हवलदार गजेंद्र सिंह के साहसी कार्य और अडिग भावना ने उनके साथियों को सभी आतंकवादियों को खत्म करने और मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए प्रेरित किया। हवलदार गजेंद्र सिंह को उनकी असाधारण बहादुरी, अदम्य भावना और सर्वोच्च बलिदान के लिए देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार "अशोक चक्र" (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया।

 स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से हवलदार गजेंद्र सिंह बिष्ट, अशोक चक्र (मरणोपरांत) को उनकी पुण्यतिथि  पर बारंबार नमन !

हवलदार गजेंद्र सिंह, अशोक चक्र (मरणोपरांत)  के परिवार में उनकी पत्नी विनीता देवी, बेटी प्रीति और बेटा गौरव हैं।

 

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Amazing place

Amazing place. Gives a sense of patriotism in yourself once you visit the Subharti Shaheed Smarak & Upwan.

Mukul Aggarwal

Visitor

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Magnificent Place

This magnificent place is situated at Subharti University Campus and it is especially filled with the spirit of national pride.

Sara Khan

Visitor

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Feel of Patriotism

There are many more stories regarding the patriotism of Indian people & many more monuments to glorify that too. Standing at this place all those stories made me remember how privileged & honored the Indians feel when it comes to talk about their patriotism.

Sagar Kumar

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