हवलदार सुभाष चंद का जन्म हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के बराना दा बासा गांव में हुआ था । वे एक सैन्य परिवार से थे और जिस रेजिमेंट से उनके पिता प्यार सिंह 1981 में सेवानिवृत्त हुए थे। हवलदार सुभाष चंद हमेशा अपने पिता के नक्शेकदम पर चलना और सेना में शामिल होना चाहते थे। उन्होंने अपने सपने का पालन किया और प्रसिद्ध पंजाब रेजिमेंट के 24 पंजाब में भर्ती हो गए, जो कई युद्ध सम्मानों और अपने बहादुर सैनिकों के लिए जाना जाता है। उनके दादा भी 16 पंजाब बटालियन में कार्यरत थे।
दिसम्बर 2014 के दौरान हवलदार सुभाष चंद की यूनिट 24 पंजाब को जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में तैनात किया गया था। 05 दिसम्बर 2014 को जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में 31 फील्ड रेजिमेंट के सैन्य शिविर पर छह आतंकवादियों ने हमला कर दिया था। यह तड़के लगभग तीन बजे किया गया हमला था जिसका उद्देश्य सेना को आश्चर्यचकित करना और अधिकतम हताहत करना था। सेना का कैंप उरी शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित था। 05:45 बजे सेना ने 24 पंजाब के लेफ्टिनेंट कर्नल संकल्प कुमार के नेतृत्व में आतंकवादियों को पकड़ने के लिए जवाबी कार्रवाई शुरू की।
हवलदार सुभाष चंद लेफ्टिनेंट कर्नल संकल्प कुमार के नेतृत्व वाली टीम का हिस्सा थे। टीम तुरंत कार्रवाई में जुट गई और महुरा गन क्षेत्र के पश्चिमी हिस्से के आसपास रुक गई जहां छह आतंकवादी अंदर घुस आए थे। 0550 बजे हवलदार सुभाष चंद और टीम के अन्य सदस्य आतंकवादियों की गोलीबारी की चपेट में आ गये। हवलदार सुभाष चंद और उनके साथियों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए आतंकवादियों को ढेर कर दिया। इसके बाद गोलीबारी शुरू हो गई और अंततः सभी आतंकवादियों को मार गिराया गया। परन्तु ऑपरेशन के दौरान हवलदार सुभाष चंद गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। हवलदार सुभाष चंद ने कर्तव्य की पंक्ति में अपना जीवन लगा दिया और उन्हें उनकी वीरता, कर्तव्य के प्रति समर्पण और सर्वोच्च बलिदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से हवलदार सुभाष चंद को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन !




