हवलदार द्वारका नाथ जम्मू और कश्मीर के पूँछ के रहने वाले थे। हवलदार द्वारका नाथ की नियुक्ति प्रथम जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री (1 JAK LI) में थी । 11 अक्टूबर, 1987 को भारतीय शांति सेना ने श्रीलंका में जाफना को लिट्टे के कब्जे से मुक्त कराने के लिए ऑपरेशन पवन शुरू किया था। इसकी पृष्ठभूमि में भारत और श्रीलंका के बीच 29 जुलाई 1987 को हुआ शांति समझौता था। हवलदार द्वारका नाथ को भी भारतीय सेना की उस टुकड़ी में शामिल किया गया जो ऑपरेशन पवन के लिए श्री लंका गयी।
12 दिसंबर 1988 के दिन हवलदार द्वारका नाथ ने असाधारण साहस और नेतृत्व का परिचय दिया। वह गंभीर रूप से घायल हो गए लेकिन बेजोड़ दृढ़ संकल्प के साथ अपने लोगों का नेतृत्व करते रहे। और अंत में उन्होंने अपने प्राण न्यौछावर कर दिये।
उनके सर्वोच्च बलिदान देश के प्रति उनके समर्पण और कर्तव्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की याद दिलाता है। आज हवलदार द्वारका नाथ जैसे सभी सैनिकों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से हवलदार द्वारका नाथ को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन !




