सूबेदार गमर बहादुर थापा का जन्म नेपाल के रेपेंदेही जिले के करहिया गांव में हुआ था । वर्ष 1993 में वे सेना में शामिल हुए और उन्हें 8 गोरखा राइफल्स की 2/8 गोरखा राइफल्स में नियुक्त किया गया, यह रेजिमेंट अपने वीर सैनिकों और कई युद्ध सम्मानों के लिए जानी जाती है।
2018 तक सूबेदार गमर बहादुर थापा ने लगभग 25 वर्षों की सेवा पूरी कर ली थी और उनके पास चुनौतीपूर्ण कार्य परिस्थितियों के साथ विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में काम करने का अनुभव था।
दिसम्बर 2018 के दौरान सूबेदार गमर बहादुर थापा की यूनिट 2/8 जीआर को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में एलओसी के पास केरन सेक्टर में तैनात किया गया था। यूनिट कुपवाड़ा जिले में आगे की चौकियों पर तैनात थी और सैनिकों को हमेशा हाई अलर्ट पर रहना पड़ता था। इस क्षेत्र में हर समय पाकिस्तानी बलों द्वारा अकारण गोलीबारी का खतरा बना रहता था। 21 दिसम्बर 2018 को सूबेदार गमर बहादुर थापा को केरन सेक्टर के जुमगुंड इलाके में एलओसी के पास पीर बाबा ग्रहाट में अग्रिम चौकी पर तैनात किया गया था। एलओसी के पास का यह सेक्टर काफी अस्थिर है क्योंकि दुश्मन सेनाएं अक्सर सीमा पार से बिना उकसावे के गोलाबारी करती रहती हैं।
21 दिसम्बर 2018 को पाकिस्तानी सेना की ओर से 2/8 जीआर की पीर बाबा ग्राहत पोस्ट के पास स्नाइपर शॉट दागे गए थे। सेना ने उचित तरीके से जवाबी कार्रवाई की जिसके परिणामस्वरूप भारी गोलीबारी हुई। इस गोलीबारी के दौरान सूबेदार गमर बहादुर थापा गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें तुरंत निकालकर ड्रैगमुल्ला के सैन्य अस्पताल ले जाया गया जहाँ वे शहीद हो गए। सूबेदार गमर बहादुर थापा एक अनुशासित और प्रतिबद्ध सैनिक थे जिन्होंने 42 साल की उम्र में देश की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए ।
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की ओर से सूबेदार गमर बहादुर थापा को उनकी पुण्यतिथि पर बारंबार नमन !
सूबेदार गमर बहादुर थापा अपनी पत्नी और दो बेटों से बचे हैं।




